Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 18

अरे देवा अच्छा हुआ तुम आ गये। मै तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी।
उसके भरे भरे सुडौल ब्रैस्ट देख देवा के लंड में हलचल होने लगती है।
रानी इतनी खूबसूरत थी की कोई भी उसे देख ले तो बस देखता रह जाये और अभी तो वो देवा के सामने सिर्फ ब्रा और नीचे शलवार में खडी थी।
देवा, वो मै ये बताने आया था की मै कुछ दिन के लिए अपने मां के यहाँ जा रहा हूँ।
रानी, दौड़ते हुए जाके देवा की छाती से चिपक जाती है नहीं नहीं तुम कही नहीं जाओंगे मै कैसे रहूँगी तुम्हारे बिना नहीं बिलकुल भी नही।
देवा, रानी बस कुछ दिनों की बात है मां की तबियत ख़राब है और माँ और बहन को भी वापस लाना है।
रानी, उदास हो जाती है और अपना चेहरा दूसरी तरफ फेर लेती है जाओ तुम ।
देवा, उसे घुमा के अपनी तरफ कर लेता है और रानी के कान पकड़ के कहता है।
अरे बाबा इस बार माफ़ी दे दो आगे से ऐसा नहीं होगा।
रानी, ये अच्छा है गलती करो खुद और कान भी मेरे पकडो।
जाओ मै तुमसे कभी बात नहीं करुँगी।
देवा, उसके चेहरे को ऊपर उठाता है कभी बात नहीं करोगी।
रानी, कभी नही।
देवा, कभी नही।
रानी, कुछ नहीं कहती बस ऑखें बंद कर लेती है।”
देवा, उसके काँपते हुए होठो को मुंह में ले के चुमने लगता है और हाथ पीछे ले जाके रानी की ब्रा का हुक खोल देता है।
रानी, देवा के मुंह में मुंह डाले मदहोशी की इन्तहा पे पहुँच रही थी की तभी देवा उसके निप्पल्स को बुरी तरह मसल देता है और इस दर्द से रानी अपना मुंह और खोल देती है। जिससे उसकी ज़ुबान भी अब देवा के कब्ज़े में आ जाती है।
रानी, आहह तुम तो चले जाओंगे फिर इनका ख्याल कौन रखेंगा ।
देवा, अभी तक मै रखता आया हूँ आगे भी मै ही रखूँगा मेरी रानी।
वो रानी के मोटे मोटे भरे भरे ब्रैस्ट को दोनों हाथों से मसलता हुआ निप्पल्स को मुंह में भर के बच्चे की। तरह चुसने लगता है गलप्प गलप्प।
गलप्प आहह गलप्प।
रानी, अपने हाथ से देवा का पेंट खोल देती है और उसे निचे गिरा देती है।
देवा, आहह नहीं रानी मुझे बहुत देर हो रही है जाने दे मुझे।
रानी, आहह गलप्प गलप्प। जाने से पहले अपनी रानी को एक बार चोदो। तरस जाऊँगी मैं तुम्हारे बिना गलप्प
आज बिना किये नहीं जाने दूंगी मै तुम्हें गलप्प गल्प।
वो निचे बैठ के देवा के लंड को मुंह में ले के चुसने लगती है।
देवा रानी के बचे हुए कपडे भी निकाल देता है।
लंड तो देवा का उसे देखते ही खड़ा हो जाता था ।
अगर वो किरण को चोदके नहीं आता तो रानी के बिना बोले उसे पलंग पे लिटा चुका होता ।
रानी अपने पैर खोल के देवा की तरफ देखने लगती है। जो हाथ में लंड पकड़ के उसे अपने थूक से गीला कर रहा था।
देख क्या रहे हो आ जाओ जल्दी से।
देवा रानी पे झुकता है और अपने लंड को उसकी चूत में घुसाता चला जाता है।”
रानी दर्द और जोश में हलकी हलकी सिसकारियां भरते हुए लंड को और अंदर जाने के जगह देती जाती है। शाबाश और अंदर रे आह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा, आहह मेरी रानी आह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह।
रानी, कुछ मत बोलो बस चोदते जाओ मुझे आहह हाँ ऐसे ही और अंदर तक आहह ये चूत बिना तेरे कैसे रह पायेंगी रे ज़ालिम आह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा, मैं भी तुझे चोदे बिना नहीं सो पाऊँगा वहां रानी। आह्ह्ह्ह्ह्ह।
रानी, चोद न ज़ोर से आहह माँ आहह बातें मत कर मुझे चोदते हुए बेहोश कर दे । आहह ऐसे ही माँ वो मै गई।
रानी की चूत इतनी गरम हो चुकी थी की वो खुद तो १५ मिनट में झड जाती है साथ ही साथ अपने चूत की गर्मी से देवा के लंड को भी अंदर ही अंदर झडा देती है।
दोनो एक दूसरे की बाहों में सिमटे एक दूसरे के चेहरे को चुमने लगते है।
कुछ देर बाद देवा रानी को जी भर के चुमने के बाद घर आ जाता है और ट्रेक्टर लेके मां के घर निकल जाता है।
इन्सान गरीब हो या अमीर वो बच्चा हो या जवान जब भी वो अपने मां के घर जाता है एक अजीब सी ख़ुशी उसे महसूस होती है ।
देवा को भी यही ख़ुशी महसूस हो रही थी जैसे जैसे वो मां के घर के क़रीब पहुँचता जा रहा था।
आखीर वो अपने मामा माधव सिंह के घर पहुँच जाता है
उसे देख देवकी भागती हुई किचन से आती है और अपने भांजे को अपनी छाती से लगा लेती है।
मामी के नरम और गरम छाती से लग के आज देवा को नया आनन्द महसूस हो रहा था । इससे पहले भी देवकी कई बार देवा को अपने छाती से लगा चुकी थी पर इस बार देवकी के चिपकने में कुछ नयापन था।
देवा, भी देवकी को कस के बाँहों में भर लेता है जिससे देवकी के मुंह से हलकी से शह्ह्हह्ह्ह्ह आवाज़ निकल जाती है।
पास खड़ी रामु की पत्नी कौशल्या ने शायद ये आवाज़ सुन ली थी इसलिए उसके चेहरे पे एक हलकी सी मुसकान फैल जाती है।”
देवा अपने भाई रामु से उसकी पत्नी कौशल्या से और रामु की बहन नूतन से भी मिलता है।
नुतन बड़े गौर से देवा को देख रही थी।
वो बेहद खूबसूरत थी । बिलकुल अपनी माँ देवकी के जैसे नयन नक्श। हालाँकि उसके ब्रैस्ट देवकी के जैसे भरे भरे नहीं थे। ना ही कमर देवकी के तरह चलते वक़्त हिलते थे। पर थी वो भी एक नमकीन चेहरे वाली लड़की।
देवा, अपनी माँ रत्ना के साथ मामा से मिलने चला जाता है।
माधव, की तबियत अब पहले से काफी बेहतर हो गई थी।
वो देवा को देख बहुत खुश होते है और देवा उनसे कितनी ही देर बातें करता रहता है।
रात के खाने का वक़्त हो गया था। वो सभी एक साथ मिलके खाना खाने लगते है।
कौशलया जिसे सब प्यार से काशी बुलाते थे। खाना परोस रही थी और नूतन भी उसका हाथ बटा रही थी।
रामु, देवा से खेती की बातें कर रहा था ।
देवकी, जो खाना कम खा रही थी और देवा के जिस्म को ज़्यादा देख रही थी।
सभी एक दूसरे से हँस बोल के बातें करते हुए खाना खाने लगते है।
देवा, चोर नज़रों से कैशलया को भी देख लेता था।
और जब भी वो कैशलया की तरफ देखता कौशल्या भी उसी समय उसकी तरफ देख एक हलकी सी मुस्कान चेहरे पे ले आती।
खाना खाने के बाद कुछ देर बातों का दौड़ चलता है और फिर धीरे धीरे करके सभी सोने चले जाते है।
नुतन ममता के साथ एक कमरे में सीफ्ट है।
एक कमरे में रामु और उसकी पत्नी कौशल्या सोने चली जाती है।
और एक कमरे में चारपाई के ऊपर माधव और उसी कमरे में निचे ज़मीन पे पहले रत्ना उसके बगल में देवा और उसके बगल में देवकी थोड़े थोड़े अंतर से लेट जाते है।
देवा रत्ना और देवकी धीमी आवाज़ में एक दूसरे से बातें करने लगते है।
की तभी माधव देवकी को डांटते है।
माधव, देवकी देवा थका मांदा घर आया है उसे आराम करने दे । कल बातें कर लेना। अभी बत्ती बुझा दो।
देवकी, अपने पती को कुछ नही कहती और जीरो लाइट लगा देती है और सभी चुप चाप लेट जाते है।
देवा, अपने ऑखों पे हाथ रखे रानी के बारे में सोचने लगता है।”
एक घंटे बाद-
देवा को किसी की खुसुर पुसुर की आवाज़ सुनाई देती है । वो ऑखों पे से थोड़ा सा हाथ हटाता है। जीरो लाइट की रौशनी में वो साफ़ देख सकता था की देवकी माधव के पास बैठी उसकी धोती निचे करके उसके लंड को चूस रही है।
देवा का हाथ खुद ब खुद अपने लंड पे चला जाता है और वो चादर के अंदर लेटे लेटे लंड को सहलाने लगता है ये अनुभव उसके लिए बिलकुल नया था उसने अपने मामा मामी को कभी ऐसी हालत में नहीं देखा था।
देवकी, अपना ब्लाउज खोले हुए माधव से अपनी ब्रैस्ट मसलवा रही थी।
कच देर बाद माधव उसे अपने ऊपर आने को केहता है और देवकी बिना आवाज़ किये माधव के ऊपर चढ़ जाते है और अपने कमर को निचे ऊपर करने लगते है
उसे ऐसा करते ज़्यादा देर भी नहीं हुई थी की देवकी कमर हिलाना बंद कर देती है और माधव को गाली दे के उसके ऊपर से उतर जाती है।
माधव अपने मुरझाये लंड को वापस धोती में डाल के करवट बदल के सो जाता है और देवकी साडी निचे करके ब्लाउज ठीक करके देवा के बगल में जाके लेट जाती है।
देवकी एक करवट लेटी हुई थी की अचानक उसे अपनी कमर में कुछ चुभता हुआ महसूस होता है।
ये देवा था जो नींद का बहाना करते हुए देवकी की कमर में पीछे से अपना लंड पेंट के अंदर से उसे चुभा रहा था।
देवकी अपनी कमर को आगे करने के बजाये पीछे देवा के लंड की तरफ झुका देती है और अपनी चूत को धीरे धीरे सहलाने लगती है।
देवा के लंड के एहसास से ही वो कुछ हे देर में झड जाती है ।
देवा अपना लंड देवकी की कमर से हटा के सीधा लेट जाता है जैसे उसे कुछ पता ही न हो और जो हुआ वो नींद में हुआ हो।
न देवा की आँख ठीक तरह से लग पाती है और न देवकी सो पाती है।”

सुबह जब देवा की आँख खुली तो उसके पास कोई नहीं था।
न रत्ना और न देवकी वो सबसे पहले फ्रेश होने चला जाता है।
बाथरूम से नहा के जब वो जिस्म पे सिर्फ टॉवल लपेट के बाहर निकलता है ।
तो सामने कुरसी पे कौशल्या बैठी मिलती है।
कौशलया, देवा को ऐसे देख शरमा के अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती है।
देवा, झट से अपनी क़मीज़ पहन लेता है।
भाभी कुछ काम था क्या।
कौशल्या, नहीं मै तो वो नाश्ते का पुछने के लिए आई थी
यहाँ ले आऊँ या बाहर लगा दुं।
देवा, माँ कहाँ है।
कौशल्या, वो ममता दीदी के साथ पास के सुषमा काकी के यहाँ गई है।
देवा, अच्छा ऐसा करो आप यही ले आओ नाशता।
कौशल्या, मुस्कुराते हुए नाश्ता लाने चली जाती है।
घर में सन्नाटा पसरा हुआ था।
आम तौर पे गांव के सभी लोग सुबह सुबह ही खेत में काम करने चले जाते थे और शाम ढले वापस आ जाते थे।
देवा, नाश्ता करते करते कौशल्या से पूछता है।
मामी और रामु भाई कही नज़र नहीं आ रहे।
कौशल्या, वो हमारे नए खेत में गए है वहां कुंवे की खुदाई का काम शुरू है।
देवा, अरे वाह मुझे भी खेत में कुंवा खुदवाना है।
आप मुझे खेत ले चलिये न मुझे आपका नया खेत पता नहीं है।
कौशल्या, नहीं मै नहीं आ सकती।
देवा, पर क्यूँ ।
कौशल्या, मुझे घर में बहुत काम है आप पूछते पूछते चले जाना।
देवा, अरे भाभी आप मुझे खेत दिखा के वापस आ जाना।
कौशल्या, कुछ देर खामोश रहती है फिर कुछ सोचते हुए कहती है।
ठीक है पर आप उनसे या माँ से ये मत कहना की मै आपके साथ खेत तक आई थी।
देवा, कुछ हैरान होता है पर कहता कुछ नही।
ठीक है नहीं कहूँगा।
नाशते के बाद कौशल्या और देवा खेत की तरफ चल देते है।”
देवा, भाभी एक बात पुछु।
कौशल्या, हाँ पुछो ना।
देवा, नहीं जाने दो आप बुरा मान जाएगी।
कौशल्या, ओफ़ हो देवरजी पूछ भी लो नहीं मानूगी बुरा।
देवा, वो मै ये पूछ्ना चाहता था की जबसे मै यहाँ आया हूँ तबसे मै गौर कर रहा हूँ की आप मुझे अजीब नज़रें से क्यों देख रही है।
कौशल्या, मुस्कुरा देती है।
बात ये है की आपकी सुरत मेरे भैया से बहुत मिलती जुलती है ।
जब भी आपको देखती हूँ मुझे ये महसूस होता है की मै भैया को देख रही हूँ।
देवा, ओह्ह तो ये बात है।
मै भी ना।
कौशल्या, क्या।
देवा, नहीं कुछ भी तो नही।
आपके भैया आपसे मिलने आते है।
कौशल्या, खेत आ गया अब मै चलती हूँ।
देवा, अरे रुको न ।
वैसे यहाँ तो कोई नज़र नहीं आ रहा कहाँ है मामी और भाई।
कौशल्या, घबराये हुए आवाज़ में चलो घर चलते है। शायद वो घर चले गए होंगे।
देवा: मैं ज़रा झोंपडी में देख लेता हूँ।
कौशल्या, नहीं नहीं देवरजी वहां मत जाओ।
देवा, अजीब नज़रों से कौशल्या को देखता है और चुपचाप झोपडे के पास चला जाता है वो बस झोपडे का दरवाज़ा खोलने ही वाला था की अंदर से आती आवाज़ सुनके उसके हाथ दरवाज़े पर ही रुक जाते है।
कौशल्या, भागते हुए देवा के पास आ जाती है
और धीमे आवाज़ में कहती है । चलो यहाँ से।
देवा, कौशल्या का हाथ पकड़ के उसे झोंपडे में बनी खिड़की के पास ले जाता है वो समझ रहा था की अंदर गांव के कोई लैला मजनु अपने रास लीला में मगन है।
जैसे ही वो खिड़की के पास पहुँच के अंदर झाँकता है उसके हाथ पैर सुन्न पड़ जाते है।”
झोंपडी के अंदर देवकी और रामु थे।
रामु, चारपाई पे लेटा हुआ था और उसके पास देवकी बैठी उसके पैर दबा रही थी।
ये देख देवा को कुछ अजीब सा लगता है क्यूंकि देवकी के हाथ रामु के जांघ के पास थे और वो जांघ को दबाते दबाते लंड को भी छु रही थी।
देवा और कौशल्या ऑखें फाड़े ये देख रहे थे।
रामु, माँ आज रहने दो न बदन बहुत दर्द कर रहा है।
देवकी, इसीलिए तो तेरे बदन की मालिश कर रही हूँ जानती हूँ न मै वो तेरी पत्नी कौशल्या तुझे रात भर सोने नहीं देती है ना और दिन में मेरे पास आने के बाद तेरा जिस्म दर्द करने लगता है।
रामु, अरे माँ ऐसी बात नहीं है।
देवकी, बस बस रहने दे सब जानती हूँ मै वैसे भी बूढी औरत किसे अच्छी लगती है।
तेरा बापु तो किसी काम के अब रहे नहीं। दो तीन धक्कों में सो जाते है।
बेटा है पर वो भी अब अपने जवान बीवी की ओखली में मुंह डाले पड़ा रहता है।
रामु, चुप कर साली 18 साल की उम्र से तुझे पेल रहा हूँ अभी तक तेरी चूत की आग नहीं बुझी।
देवकी, बेटा ये आग मरने के बाद ही बुझती है।
देख न मेरी चूचि भी कैसे सुख गई है बिना पानी के ।
रामु, देवकी को निचे गिरा देता है और देवकी के लटके हुए ब्रैस्ट को अपने मुंह में भर के चुसने लगता है । गलप्प गलप्प गप्प्पप्पलपल्लल्लल्ल

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