Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 21

रामु इतना शरमिंदा था की वो सीधा अपने कमरे में चला जाता है।
देवकी, कौशल्या के पास आती है जा बेटी अपने पति के पास उसे तेरे साथ की बहुत ज़रुरत है।
कौशल्या, देवा को देखते हुए कमरे में चली जाती है।
रामु, बिस्तर पे बैठा हुआ था।
कौशल्या को देखते ही वो अपने पास बुला लेता है।
कौशल्या मुझे सच में माफ़ कर दे मुझसे भी भूल हो गई।
कौशल्या, अपनी ऊँगली रामु के होठो पे रख देती है।
देखिये जो हुआ उसे याद करके हम अपने आने वाली ज़िन्दगी क्यों ख़राब करे।
मै चाहती हूँ आप माँ से उतना ही प्यार करें जितना करते है । मै आप दोनों के बीच कभी नहीं आऊँगी बस अपने दिल के एक कोने में मुझे भी जगह दे दीजीए।
रामु, अपनी पत्नी कौशल्या पे झुकता चला जाता है।”
और कौशल्या दिल में देवा को धन्यवाद करते नहीं थकती। उस रात कौशल्या को असली मायने में एक पत्नी का सुख मिलता है रामु से।।
रात काफी हो चुकी थी पर देवा को नींद नहीं आ रही थी । आज उसका मन बहुत विचलित था आज तक उसके साथ ऐसा नहीं हुआ था। वो देवकी और रामु को तो समझा चुका था पर घर आने के बाद से उसके लंड में एक तरह की अकडन सी आ गई थी।
उसके ऑंखों के सामने देवकी और रामु ही घूम रहे थे। वो बार बार बस एक ही बात सोच रहा था की एक बेटे को अपनी माँ के साथ वो सब करने में कैसा आनंद आता होगा । वो कितना एहसास कैसा लगता होंगा जब अपने ही माँ की चूत में बेटे का लंड जाता होंगा।।ये सोच सोच के उसका लंड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।
तभी वहां देवकी आती है । देवकी को देख देवा उठके बैठ जाता है।
देवकी, क्या बात है बेटा नींद नहीं आ रही क्या।
देवा, नहीं मामी बस ऐसे ही।
मामी मुझे माफ़ कर दो मैंने आप पे हाथ उठाया।
देवकी, मै तुझे कब का माफ़ कर चुकी हूँ देवा।
तूने आज मुझ पे बहुत बड़ा एहसान किया है बेटा मै तेरा ये एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूल सकती।
देवा, मामी एक बात पूंछू।
देवकी, हाँ पुछ ना।
देवा, नहीं जाने दो आप बुरा मान जाओगी।
देवकी, नहीं बोलेंगा तो ज़रूर मान जाऊँगी चल बोल भी दे।
देवा, मामी अपने बेटे के साथ वो सब करना कैसा लगता है।
देवकी, बुरी तरह शर्मा जाती है और देवा को अपनी छाती से चिपका लेती है।”
तू है हट्टा कटा गबरू जवान पर तेरा दिल एकदम बच्चों जैसा है ।जो मन में आता है पूछ लेता है।
देवा, बोलो न मामी।
देवकी, तू सच में जानना चाहता है।
देवा, हाँ सच में।
देवकी, मुझे प्यार कर अपने मामी समझ के नहीं बल्कि अपनी माँ रत्ना समझ के तुझे पता चल जायेंगा की कैसा अनुभव होता है।
देवा, पर मामी।
देवकी, देवा के बोलने से पहले उसे अपने ब्रैस्ट से चिपका लेती है और देवा भी देवकी पे झुक जाता है।
देवकी, आहह बेटा अपनी माँ को नंगी करके खूब प्यार कर रे। चूत से लेके गाण्ड तक चाट ले अपनी माँ की देवा आह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा, माँ । देवकी के मुंह से ऐसे शब्द सुनके उसका लंड आज पहली बार पेंट फाड़ के बाहर आना चाहता था।
वो देवकी का ब्लाउज निकाल के फ़ेंक देता है और खुद के कपडे भी निकल देता है।
देवकी, हाँ बेटा आहह चूस अपनी माँ की चूचियां आहह पी जा आज फिर से मेरा सारा दूध आह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा, देवकी के ब्रैस्ट को मुंह में लेके चुसने लगता है वो इतनी ज़ोर ज़ोर से निप्पल्स को काटने लगता है की देवकी बर्दाश्त नहीं कर पाती।
देवा, आहह माँ मेरी माँ गलप्प आह।
देवकी, आह्ह्ह्ह्ह्ह देवा बेटा धीरे से।
देवा, ऑखें बंद करके देवकी के होठो को चुसने लगता है उसकी ऑखों के सामने रत्ना का चेहरा आ जाता है और वो एक झटके के साथ देवकी के होठो के एक एक रस के क़तरे को पीता चला जाता है गलप्प गलप्प्प।
देवकी, बेटा मुझे तेरा मुंह में लेने दे अपने बेटे का लंड चुसना है मुझे आहह देवा मुंह में डाल ना रे।
देवा : माँ वो बोल भी नहीं पा रहा था बस आज उसके सर पे जैसे जूनून सवार हो गया था । वो अपने लंड को देवकी के मुंह में पेल देता है और दोनों हाथों से देवकी के सर को पकड़ के लंड को ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगता है ।
आह्ह्ह्ह्ह्ह माँ चूस लो अपने देवा का लंड आहह माँ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवकी, की चूत से पानी के फुवार बाहर निकलने लगती है और वो देवा को अपने ऊपर आने की दावत देते हुए अपने दोनों पैर खोल देती है।
आजा मेरे राजा बेटा अपने माँ की चूत में आ जा।
देवा, के लंड की नसे कभी इतनी नहीं फुली थी।अपने लंड में उसे इतनी ताकत कभी महसूस नहीं हुई थी वो एक तरह से खुद को सर्व शक्तिमान महसूस कर रहा था। उसे देवकी की चूत नहीं बल्कि रत्ना अपनी माँ की चूत नज़र आ रही थी और पैर खोले औरत देवकी नहीं बल्कि रत्ना दिखाई दे रही थी । वो अपने लंड पे थोड़ा सा थूक गिराता है और देवकी की टाँग को अपने हाथ में पकड़ के लंड को जैसे ही देवकी की चूत पे रखता है देवकी की ऑखें बंद हो जाती है और चूत खुलती चली जाती है।”
देवकी, बेटा नही।
देवा, माँ आहह आह्ह्ह्ह्ह्।
देवकी, आहह बेटा तेरा बहुत मोटा और बड़ा है रे मर जाऊँगी मै आहह थोड़ा आराम से धक्के मार बेटा ।
देवा को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था । न कुछ समझ आ रहा था बस दिमाग में एक आवाज़ घूम रही थी । देवा बेटा अपने माँ रत्ना को चोदो ज़ोर से चोदो।
देवकी, बेटा धीरे धीरे आहह धीरे रे।
देवा, माँ चोदने दो न आहह ऐसी चूत मुझे आज तक नहीं मिली आहह कसम से मामी आपके चूत का जवाब नहीं है आह्हह्हह्हह्हह।
देवकी, पिछले 20 मिनट से देवा से चुदते चुदते निढाल हो गई थी।
उसे कभी भी किसी ने भी इतनी देर तक इस तरह से नहीं चोदा था।
देवा का लंड पानी छोडने को तैयार नहीं था और देवकी चूत में लंड लेने को मना कर रही थी । उसकी चूत जगह जगह से चीर गई थी। रह रहके खून भी बाहर बह रहा था वो किसी तरह देवा के पास से उठके अपने कमरे में जाना चाहती थी पर देवा उसका हाथ पकड़ के उसे फिर से अपनी गोद में बैठा देता है।
माँ अभी एक सुराख़ बचा है ना तुम्हारा।
देवकी।, नहीं वहां नहीं। देखता नहीं चूत की क्या हालत कर दी है तुमने। नहीं नही।
देवा, देवकी के चूतड़ पे थप्पड मारने लगता है निढाल सी देवकी कुछ देर बाद हार मानके अपनी गाण्ड का सुराख़ देवा को दिखाती है और देवा न सिर्फ उसे चाटता है बल्कि उसे भोग भी लगा देता है अपने लंड के तेज़ धार से वो देवकी की गाण्ड को भी एक तरह से चीर के रख देता है।
देवकी एक चालाक औरत थी । वो आज इसलिए देवा के पास आई थी के देवा को अपनी चूत देके उसका मुंह हमेशा के लिए बंद कर दे । उसे पता था की देवा एक न एक दिन अपनी माँ को उसके और रामु के बारे में ज़रूर बता देगा । बस एक यही तरीका था देवा का मुंह बंद करने का की उसे अपनी चूत दे दी जाये ।
पर ये उसकी सबसे बडी भूल भी साबित हुई थी वो जिस देवा को एक बच्चा समझ बैठी थी । उस बच्चे ने सुबह के ४ बजे तक उसे न सोने दिया और न उसे एक पल के लिए भी चैन से बैठने दिया।
देवा का लंड देवकी की चूत पे कहर बरपा के सो चुका था । पर एक नए दौड़ की शुरुवात देवा के ज़िन्दगी में हो चुकी थी। आज तक बाहर की औरतों को चोदने वाला देवा आज घर की औरत का स्वाद चख चुका था और ये स्वाद उसे बहुत पसंद भी आया था।
देवकी, अपने फ़ैले हुए चूत के साथ अपने कमरे में सोने चली जाती है और देवा अपनी यादों में डूबा हुआ सो जाता है।”
रात की कडी मेहनत के बाद देवा सुबह देर से जगता है।
रामु, सुबह सवेरे ही खेत में चला गया था।
देवकी, अपने चूत और गाण्ड के दर्द के वजह से अपने बिस्तर पे करवट बदल रही थी।
कौशल्या, किचन में सुबह के नाश्ते की तैयारी में लगी हुई थी की तभी देवा उसे पीछे से अपने बाँहों में जकड लेता है।
कौशल्या, आह्ह्ह माँ ओह्ह तुम हो मै तो डर ही गई थी।
उठ गए जनाब।
देवा, क्या बात है भाभी आज सुबह सुबह आपका चेहरा बड़ा खिला खिला लग रहा है क्या बात है।
कौशल्या के चेहरे पे शरम की लाली फ़ैल जाती है।
वो रात भर तो नहीं पर कुछ वक़्त अपने पति रामु के बाहों में ज़रूर थी और इसलिए कौशल्या का मूड काफी अच्छा था।
सब तुम्हारी वजह से भइया।
देवा बुरा सा मुंह बना लेता है।
भैया……अच्छा चलो मेरा इनाम निकालो
कौशल्या, कैसा इनाम।
देवा, अच्छा कल जो तुमने मुझे वादा की थी की अगर मैंने तुम्हे इस घर में वो मान सम्मान दिला दिया तो तुम मुझे मुंह माँगा इनाम दोगी।
कौशल्या, मुझे ऐसा कुछ याद नहीं है मैंने ऐसा कुछ कही थी क्या भइया।
देवा, अच्छा इसका मतलब आपने मुझसे झूठ कहा था। जाओ मै आपसे बात नहीं करता।
कौशल्या, अरे मै तो मज़ाक़ कर रही थी अच्छा बताओ क्या चाहिये तुम्हें।
देवा, पक्का सोच लो जो माँगूँगा देना होगा।
कौशल्या, मुस्कुराते हुए पक्का वादा।
देवा, फ़िलहाल तो आपको मुझे होठो पे चुमना पड़ेगा उसके बाद देखेंगे।
कौशल्या, क्या नहीं बिलकुल नही।
देवा, वादा किया है निभाना तो पड़ेगा।”
कौशल्या , देवा के पास आती है और उसके ऑखों पे अपने हाथ की हथेली रख के देवा के होठो को चुम लेती है।
बस अब ठीक है।
देवा, जी नहीं ऐसे नहीं ऐसे।
और देवा इस बार कौशल्या को अपने छाती से चिपका के उसके रसीले होठो को किसी आम की तरह मुंह में भर के चुसता चला जाता है और कौशल्या परकटे पंछी की तरह देवा की छाती पे मुक्के बरसाती जाती है।
पर कुछ देर बाद कौशल्या भी देवा का साथ देने लगती है। देवा अपने हाथ के पंजे से कौशल्या की नरम चूचि मसल देता है।
कौशल्या , उई ए क्या करते हो ।
देवकी, अपने कमरे से।
बहु मेरी चाय कहाँ है।
कौशल्या , देवा को पीछे धकलते हुए आई माँ जी।
वो तो चाये बनाना में लग जाती है और देवा देवकी के कमरे में चला जाता है।
बिस्तर पे लेटी हुए देवकी देवा को देख शरमा जाती है। जैसे कोई नई नवेली दुल्हन सुहागरात के बाद सुबह सुबह अपने पति को देख शरमाती है।
देवा रात की चुदाई के बाद बहुत ढीठ हो चुका था । अब उसे मामी भाभी इन सब रिश्तों के साथ छेड छाड़ करने में बहुत आनन्द आ रहा था। वो देवकी के पास जाके बैठ जाता है और अपना हाथ देवकी की जांघ पे रख देता है।
कैसे हो मामी।
देवकी, बड़ा ज़ालिम है रे तू। रात भर अपनी मामी पे ज़ुल्म करके पूछता है कैसी हो मामी। पूरा बदन दुःख रहा है ।
देवा, देवकी की जांघ पे रखा अपना हाथ आगे सरका के उसकी चूत पे रख देता है और देवकी के कुछ बोलने से पहले चूत को मसल देता है।
देवकी, आहह बेटा मत छू उसे। वो जग जाएँगी आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह।
देवा, देवकी को अपने बाँहों में कस लेता है और उसके गरदन को चुमते हुए धीरे से देवकी के कान में कहता है।
मामी आपकी चूत बहुत मस्त है दिल तो कर रहा है अभी आपको पूरा नंगा करके कस के चोद दुं।”
देवकी, बेटा चूत तो मेरी भी यही चाह रही है पर अभी बहु घर में है ना आहह आह्ह्ह्ह।
देवा, तो क्या हुआ वो तो रामु के साथ आपको देख चुकी है न।
देवकी, हाँ इसी बात से तो मै परेशान हूँ बेटा कैसे नज़रें मिलाऊँ उससे समझ नहीं आता।
देवा, अगर मै ऐसा कुछ कर दूँ की तुम्हें अपनी बहु के सामने से शर्म महसूस न हो तो…..
देवकी, अपनी छाती से देवा के मुंह को चिपका देती है। फिर तो तेरी ये मामी तेरे गुलाम बन जाएगी। तू जो कहेंगा जहाँ कहेंगा वो मै करुँगी।देवा अपनी मामी को कुछ समझा देता है फिर…..
देवा, अपने मामी के होंठ को चुमने लगता है और उसी समय कौशल्या चाय का कप ले के देवकी के रूम में आती है।
देवा, अपने होंठ देवकी के होठो से निकाल लेता है और देवकी चाय पीने लगते है।
और चाय पीके कौशल्या से बोलके खेत में चली जाती है।
कौशल्या, ये सब क्या हो रहा था देवा।
देवा, कुछ नहीं मै तो बस मामी के गले मिल रहा था ।
कौशल्या अच्छा सब देखा मैंने बड़े आये गले मिलने वाले। हूं……
वो देवा को घुरने लगती है और उसी मदमस्त निगाहो से वो देवा के सामने रखा चाय का कप उठाते हुए वापस किचन में चली जाती है।
देवा, उठके कौशल्या के पीछे पीछे चला जाता है ।
भाभी भाभी क्या हुआ ।
कौशल्या , कुछ नहीं मुझे काम करने दो।
देवा, मेरे अच्छी भाभी मेरी भोली भाभी मेरी सुन्दर भाभी इतना गुस्सा ठीक नहीं है चलो अब हँस भी दो।
कौशल्या, हंस पडती है अच्छा बाबा अब मुझे नहाने भी दोंगे या नहीं चलो हाथो मुझे नहाने जाना है। उसके बाद बहुत से काम है ।
देवा, आप नहाने जा रही हो ।
कौशल्या , हाँ क्यूं।
देवा, मुझे भी नहाना है मै भी साथ चलता हूँ।
कौशल्या : नहीं पागल तो नहीं हो गये न तुम।
देवा, भूल गई जो मै कहुंगा वो तुम्हें मानना होगा। वादा किया है तुमने।”
कौशल्या , अपने सर पे हाथ मारके रह जाती है।
देखो देवा तुम नहाते वक़्त कोई शरारत तो नही करोगे ना।
देवा, करूँगा हाहा।हाहा।
मेरी मर्ज़ी चलो जल्दी चलो।
चूत तो कौशल्या की भी फड़फड़ा रही थी देवा के साथ नहाने के लिए ।
दोनो बाथरूम में घुस जाते है। कौशल्या ने अपने जिस्म पे एक पतली सी साडी बांध रखी थी जिसके निचे कुछ भी नहीं था और देवा सिर्फ पेंट में।
कौशल्या बाथरूम में एक कोने में बैठके नहाने लगती है और देवा उसे देखने लगता है।
कौशल्या, अब खड़े खड़े मेरा मुंह क्या देख रहे हो नहाना नहीं है क्या।
देवा, हाँ हाँ नहाना है।
कौशल्या अपने ऊपर के जिस्म पे साबुन लगाने लगती है और साथ ही अपने चेहरे पर भी साबुन लगाके मलने लगती है।
इधर देवा अपने पेंट में से अपना लंड निकाल के सिर्फ उसपे पानी डालके उसे साबुन लगा के धोने लगता है जैसे कोई मैदान ए जंग का सिपाही जंग पे जाने से पहले अपने तलवार साफ़ करता है।
कौशल्या जैसे ही चेहरे पे लगे साबुन को पानी से धोके देवा की तरफ देखती है उसकी साँस चलना बंद हो जाती है।
काला लम्बा मोटा वो ज़हरीले साँप की तरह दिखने वाला देवा का वो लंड जिसे वो हाथ में लेके बैठा था कौशल्या देखते ही रह जाती है।
अपनी ज़िन्दगी में उसने छोटे मोटे लंड तो देखे थी पर असली लंड उसे आज देखने को मिला था। वो कभी देवा को देखती फिर उसके लंड को देखती और अपने जिस्म पे पानी डालती जाती।
देवा, क्या हुआ भाभी।
कौशल्या, कुछ नहीं वो अपने पीठ देवा की तरफ करके अपने धड़कते दिल को सँभालने ही लगती है की देवा उसे पीछे से पकड़ लेता है।
देवा, कुछ चाहिए भाभी।
कौशल्या, हाँ ..नहीं छोड़ो न तुमने वादा किया था की…..
देवा का लंड कौशल्या की पतली सी साडी के ऊपर से ठीक उसके गाण्ड के सुराख़ के पास चुभने लगता है। जिससे कौशल्या के शरीर में अकडन होना शुरू हो जाती है।”
देवा, कौशल्या को अपने जिस्म से कस के चिपका लेता है।
भाभी मुझे आपको करना है।
कौशल्या, ओह्ह्ह्ह करो न भैया रोका किसने है।
देवा, को यही सुनना था । वो अपने पेंट वही उतार के कौशल्या के जिस्म से साडी निकाल के उसे अपनी गोद में उठा लेता है और उसके होठो को चुमते हुए उसे उसके कमरे में ले आता है।
कौशल्या, कल रात रामु के साथ इस कमरे में चूदी थी वो चूदाई तो रामु से थी । पर हर धक्का उसे देवा की याद दिला देता था ।
देवा कौशल्या को लिटा के उसके मिठे मीठे नरम मखमली ब्रैस्ट को मुंह में लेके चुसने लगता है गलप्प भाभी। आपकी चूचियां कितनी नरम है गलप्प गलप्प्प।
कौशल्या, आहह तुम्हारे है भैया आहह पी लो सारा दूध अपनी बहन का आह्ह्ह्ह्ह।
देवा के हाथ नीचे कौशल्या की चूत पे रेंग रहे थे और मुंह उसके ब्रैस्ट को छोड़ने को तैयार नहीं था । जिसके वजह से कौशल्या की बुरी हालत थी। वो तो बस अपनी चूत में देवा का लंड लेना चाहती थी । पर देवा आज कौशल्या को पहले जी भर के पीना चाहता था उसके बाद उसे अपने लंड का पानी पीलाना चाहता था।
कौशल्या, भैया मुझे भी चाहिए।
देवा, क्या भाभी।
कौशल्या, ये।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *