Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 52

न हिम्मत राव रानी की तरफ ध्यान दे रहा था और न उसकी प्यासी चूत की उसे कोई परवाह थी जबसे बिंदिया हवेली में आई थी रानी की चूत पर पानी की एक बूंद भी नहीं गिरी थी।
रानी, हिम्मत राव के पास जाके बैठ जाती है।
रानी, बापू मुझे आपसे कुछ बात करनी है।
हिम्मत राव, उस वक़्त ऑंखें बंद किये चिलम फूँक रहा था।
वो ऑखें खोल के रानी की तरफ देखता है और वापस अपने चिलम में ध्यान लगा देता है।
रानी, ओफ हो मैंने कुछ कहा है सुनाई दिया की नही।
हिम्मत राव, आवाज़ निचे करके बात कर बोल क्या बात है।
रानी, वो जो आपके साथ आई है आपके दोस्त की बीवी वो और कितने दिन यहाँ रुकने वाली है।
हिम्मत राव, क्यूं।
रानी, नहीं बस मै इसलिए पूछ रही थी की उसके आने से आप बहुत ज़्यादा बदल गए हो मेरे कमरे में दिखाई भी नहीं देते। माँ के साथ ज़्यादा मजा आ रहा है क्या।
हिम्मत राव, रानी की तरफ देखता है और अपने हाथ से रानी की चूत को रगड देता है।
रानी, बापू आहह मत छूओ उसे।
हिम्मत राव, क्यूं तू मेरी जायदाद है मै कुछ भी करुं।
रानी, बस बस देख भाल तो कर नहीं सकते बड़े आये हुकूमत करने वाले हूँहह।
हिम्मत राव, अरे बिटिया मै थोड़ा परेशान हूँ आज कल। इसलिए तेरे पास नहीं आ रहा हूँ बस थोड़े दिन और रहेंगी बिंदिया यहाँ पर उसके बाद सब ठीक हो जायेगा।
रानी, दिल में सोचने लगती है जब तक क्या मै अपने चूत में बैगन डालु क्या। वो हरामी देवा भी माँ के पीछे पीछे घुमता रहता है मूआ। आज कल तो दिखाई भी नहीं देता।
हिम्मत राव, क्या हुआ क्या सोच रही है।
रानी, बुरा सा मुँह बनाके अपने रूम में चली जाती है।
रात घिर जाती है और देवा थका माँन्दा अपने घर लौट आता है । आज उसे पप्पू कही नज़र नहीं आया था।
वो एक पल के लिए उसके घर की तरफ जाने का सोचता है मगर फिर कुछ सोचके अपने घर के अंदर चला जाता है।
रत्ना ममता के साथ रोटियां पका रही थी।
ममता की ऑखें सूजी हुई दिखाई दे रही थी।रत्ना ने ममता से पूछा भी की आँख क्यों सूज गई है मगर उसने कचरा चला गया कहके बात ख़तम कर दी। जब देवा ममता के चेहरे की तरफ देखता है तो बात समझते उसे देर नहीं लगती की बात क्या है।”
रत्ना, चल हाथ मुँह धो ले मै खाना लगा देती हूँ।
देवा, माँ तेरे हाथ के खाने की बात ही कुछ और है बहुत याद आती है मुझे तेरी जब तू घर में नहीं होती है ना ममता।
ममता: हाँ….
रत्ना, तू खाना नहीं खाएँगी क्या बडी चुप चुप सी है।
ममता, मुझे भूख नहीं है माँ। ये कहके ममता रूम में चली जाती है।
देवा, खाना ख़तम करके रत्ना के पास बैठ जाता है और इधर उधर की बातें करने लगता है मगर उसका पूरा ध्यान ममता की तरफ ही था।
रत्ना, ममता को आवाज़ देती है जब ममता वहां आती है तो रत्ना उसे बिस्तर लगाने को कहती है और उसका बिस्तर भी साथ लगाने को कहती है।
ममता, अपने भाई देवा की तरफ देखती है बडी आशा भरी नज़रों से। वो देवा से कुछ बात करना चाहती थी मगर रत्ना की मौजूदगी में उसे वो मौका नहीं मिल पा रहा था। ममता अपना और रत्ना का बिस्तर साथ लगा देती है और देवा अपने रूम में चला जाता है। थकान के कारन उसे तो बहुत जल्दी नींद आ जाती है मगर ममता रात भर ऑखों आँखों में निकाल देती है ।
उधर
हवेली में हिम्मत रुक्मणी के सोने के बाद दबे पांव बिंदिया के रूम में चला जाता है। रुक्मणी उस वक़्त तक सोई नहीं थी वो बस देखना चाहती थी की हिम्मत किस हद तक गिरता है।
बिंदिया, अपने रूम में हिम्मत का ही इंतज़ार कर रही थी मगर आज उसकी ऑखों में वो प्यार नहीं था जो हर रात हिम्मत के साथ हुआ करता था।
अब बिंदिया की चूत और गाण्ड पर देवा का क़ब्ज़ा था।
हिम्मत , बिंदिया को अपनी बाहों में जकड लेता है।
बिंदिया, आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या करते हैं जी आज नहीं। मुझे बहुत दर्द हो रहा है कमर में।
हिम्मत, क्या दर्द हो रहा है तो मै क्या करुं। चल आजा।
बिंदिया , नहीं ना जी सुनो ना आहह नहीं सुनो आज नही।
हिम्मत राव, चपाट करके एक ज़ोरदार चपत बिंदिया के मुँह पर जड़ देता है तो तुझे मेरा नहीं चाहिए।
बिंदिया, कैसी बात कर रहे हैं आप ये।
हिम्मत, छी साली एक और चपत बिंदिया के मुँह पर पडता है और बिंदिया रोने लगती है।
हिम्मत राव, अपनी लुंगी उतार के लंड बाहर निकाल लेता है और बिंदिया के बाल पकड़ के उसे अपनी तरफ खीचता है ।चल मुँह खोल। साली छिनाल है तू मेरी । तेरा काम है मेरी सेवा करना बदले में तुझे लंड मिलेगा मेरा । चल आ जा।”
बिंदिया, हाथ में लंड पकड़ के मुँह में ले लेती है उसे। हिम्मत राव से नफरत सी होने लगी थी घिन आने लगी थी हिम्मत की बातों से मगर वो मजबूर थी
हिम्मत , अपने लंड को बिंदिया के मुँह में अंदर बाहर करने लगता है।
आह छिनाल साली चल कुतिया बन जा यहाँ मेरे सामने।
बिंदिया, उठके अपनी सलवार उतार के कुतिया की तरह झुक जाती है और हिम्मत पीछे से जाके उसकी कमर पर दो चार और थप्पड जड़ देता है।
बिंदिया, आहह दर्द होता है न जी।
हिम्मत, अपने लंड पर थूक लगाता है और पीछे से बिंदिया की चूत और गाण्ड पर रगडने लगता है।
बिंदिया, ये माँ आहह।
हिम्मत राव, हाय मेरी छिनाल साली आहह।
हिम्मत, का लंड सीधा अंदर घुस जाता है और वो दोनों हाथों में बिंदिया की मोटी मोटी कमर पकड़ के लंड को अंदर बाहर करने लगता है औरत का दिल कहे या ना कहे मगर जब लंड उसके चूत में उतर जाता है तो उसे भी मस्ती चढ़ ही जाती है । बिंदिया का भी वही हाल हुआ था हिम्मत की लंड से उसकी चूत भी रोने लगती है और चिपचिपा सा पानी बिंदिया की चूत से बहने लगता है।
रुक्मणी, बाहर खड़ी अपने पति को देखने लगती है ये नज़ारा उसके लिए नया नहीं था मगर उसे एक बात तो पता चल गई थी की उसके पति को औरत की कोई परवाह नहीं वो बस अपने काम से मतलब रखता है। बिंदिया की चीख़ें रुक्मणी की चूत को और उकसा देती है और लंड लेने की इच्छा उसकी चूत में और ज़्यादा बढ़ती चली जाती है।
सुबह 7 बजे।
रत्ना, सुबह जल्दी जग गई थी और उसने शालु को भी घर बुला ली थी ममता को तैयार करवाने के लिये।
देवा, भी नहा धोके मेहमानो के इंतज़ार में बैठा हुआ था।
ममता को शालु तैयार तो कर रही थी मगर ममता का पूरा ध्यान देवा की तरफ था।
ममता, काकी देवा भैया को यहाँ भेज दोगी मुझे कुछ काम है।
शालु, अभी भेजती हूँ।
शालु, देवा अरे वो देवा इधर आ ममता को कुछ काम है तुझसे।
देवा, उठके ममता के पास आ जाता है।
हाँ बोल ममता क्या बात है।
रत्ना, अरे देवा तू यहाँ क्या कर रहा है मैंने तुझे मिठाई लाने के लिए कही थी न। लाया तु….
देवा, हाँ माँ मै अभी लाता हूँ।
ममता , भैयाआआ।
कहते कहते रुक जाती है।
देवा: मैं अभी आता हूँ न ममता।
ये कहके देवा दुकान की तरफ चला जाता है।”
ममता को देवा से बात करनी थी मगर कोई न कोई उनके बीच में आ रहा था।
वो बेचैन सी हो गई थी मगर कर भी क्या सकती थी ममता चुपचाप बैठ जाती है।
थोड़ी देर बाद देवा मिठाई ले के घर पहुँचता है।
उनके साथ साथ घर में कुछ और लोग भी आ जाते है।
रत्ना, दौड के उन लोगों के पास पहुँचती है।
अरे आप लोग आ गये।
देवा, हाँ माँ मै दुकान पर था तभी इन पर नज़र पडी।
चार लोग ममता को देखने आये थे।
एक तो हरी था २५ साल का हट्टा कटा जवान।
दूसरी थी उसकी माँ कोमल एक ४५ साल की गदराई हुए औरत उसे देख के लगता था की उसकी चूत हमेशा पानी छोड़ती होंगी। देवा उसे देख कर ही समझ गया था के ये एक चूद्दकड औरत है। बड़े बड़े ब्रैस्ट और बाहर को निकलते हुए कमर लिए कोमल खड़ी थी।
कोमल के पति आनन्द राव एक 55 साल के आदमी थे
और एक 18 साल की साँवली मगर बेहद आकर्षक लड़की थी प्रिया। कोमल के एकलौती बेटी।
रत्ना, सभी को बैठाती है और देवा उन्हें पानी वग़ैरा पिलाता है।
कोमल, आपका घर तो बहुत सुन्दर है और कौन कौन रहता है यहाँ।
रत्ना, बस हम तीन लोग रहते है मै ये मेरा बेटा देवा और मेरी बेटी ममता।
देवा के बापु को कई साल पहले ही देहांत हो गया है।
कोमल, ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह।
देवा क्या करते हो तुम।
देवा, खेती बाडी
आनन्द राव, हाँ भाई आज के दौड़ में ज़िन्दगी गुज़ारना बहुत मुश्किल हो गया है।
देवा, ऐसी बात नहीं है काका। इंसान को अपने आप पर विशवास होना चाहिए।
कोई भी चीज़ मुश्किल नहीं रहती फिर।
रत्ना, ये कौन है आपके साथ।
कोमल, ये मेरी बेटी है प्रिया।
रत्ना, बहुत सुन्दर है।
प्रिया, रत्न और देवा को देख मुस्कुरा देती है।
कोमल, देवा से हरी को मिलाती है।
सभी आपस में बैठ के बातें करने लगते है।
रत्ना, देवा बेटा जा ज़रा देख तो ममता तैयार हुई की नही।
देवा, अंदर चला जाता है।
ममता, देवा को देखने लगती है।
देवा मुस्कुरा कर उसके पास आता है।
शालु, देवा तू यही रुक मै ज़रा मेहमानो की खातिरदारी करके आती हूँ थोडी देर बाद ममता को बाहर ले आना है।
शालु, मिठाई ले के बाहर चली जाती है।”
शालू के बाहर जाते ही-
ममता, देवा से चिपक जाती है।
मुझे नहीं करनी शादी भैया। आपसे अलग नहीं रहना मुझे।
देवा, चुप हो जा पगली शादी तो हर लड़की को करनी पडती है।
बस बस देख रो रो के चेहरा बिगाड लेगी तु।
रत्ना, बाहर से देवा को आवाज़ देती है।
देवा ममता को ले आ।
देवा, ममता का हाथ पकड़ के उसे बहार ली आता है।
सभी बडी बडी ऑखों से ममता को देखने लगते है।
ममता के लिए ये पहला अनुभव था जब वो सज धज के किसी पराए लोगों के सामने पेश हो रही थी।
कोमल, ममता को अपने पास बैठा लेती है।
क्या नाम है बेटी तुम्हारा।
ममता, जी वो ममता।
कोमल, बड़ा प्यारा नाम है
क्या क्या आता है।
रत्ना, अजी ये पुछिये की क्या नहीं आता।
सिलाई बुनाई कटाई सब कर लेती है हमारी ममता। खाना तो ऐसे बनाती है की पुछो मत।
कोमल, अरे वाह ये तो बड़ी अच्छी बात है।
ये देखो ये है हमारा बेटा हरी।
ममता शर्माने लगती है और ऊपर सर उठाके नहीं देखती।
कोमल, अरे बाबा डरो मत ऊपर देखो कल को ये हमे कहेंगा की अंधी लड़की गले बांध दी हमारे।
सभी हंसने लगते है और ममता सर उठाके हरी की तरफ देखती है वो देखना भर काम कर जाता है और हरी वही चारो खाने चित हो जाता है।
लडके वालों को ममता बहुत पसंद आई थी वो रिश्ते की बात आगे बढाने के लिए कहते है।
रत्ना, आप लोगों ने तो हमे देख लिया है।
मगर हमे भी आप के बारे में जानना है इस लिए मेरा बेटा देवा आपके यहाँ जायेंगा उसके बाद ही बात आगे बढ़ायेंगे ठीक है न।
कोमल, बिलकुल ठीक बात कही आपने।
बेटी का मामला है सब कुछ सोच समझ के ही करना चाहिए।
मै भी मेरी बेटी के शादी जल्दबाज़ी में नहीं करुँगी।
शालु, ये लिजीये इसी बात पर मुँह मीठा कीजिये।
सभी लोग एक दूसरे का मुँह मीठा कराते है।
इन सब से दूर ममता का दिल सुलग रहा था वो अंदर ही अंदर रो रही थी । वो अपने घर को देवा को छोड के किसी पराए घर नहीं जाना चाहती थी।
सभी लोग खाना खाने बैठ जाते है।”
कोमल बाहर रत्ना और देवा के साथ बातें कर रही थी। रत्ना बातों बातों में कोमल के बारे में सब कुछ जान लेना चाहती थी आखिर कोमल ममता की होने वाली सास थी और सास सबसे अहम होती है किसी भी घर में।
कोमल, एक खुश मिज़ाज़ औरत थी जैसे वो बाहर से थी वैसे ही अंदर से भी खुशमिजाज़ हँसमुख।
देवा, और रत्ना को बहुत शांति मिलती है। उससे बातें करके एक सुकून सा महसूस होता है।
शालु, अंदर से रत्ना को आवाज़ देती है और रत्ना उठके अंदर चलि जाती है।
कोमल, देवा तुम बहुत सुन्दर हो । कोई लड़की देखी है की नहीं तुम्हारी माँ ने शादी के लिये।
देवा, जी वो….
अभी ममता की शादी हो जाये उसके बाद सोचेंगे मुझे भी कोई जल्दी नहीं है।
कोमल, हाँ तुम्हारे जैसे गबरू जवान को तो रोज़ बाहर दिवाली होती होगी।
देवा, ऑंखें फाड़े कोमल की तरफ देखने लगता है और कोमल कमर मटकाते हुए खाना खाने अंदर चलि जाती है।
खाना खाके मेहमान अपने गांव चले जाते है और जाते जाते देवा को घर आने का बोल जाते है।
शालु रत्ना और देवा घर के ऑगन में बैठे मेहमानो के गुन गा रहे थे और अंदर ममता ऑसू बहा रही थी।
रत्ना, बड़े नसीबो वाली है हमारी ममता जो इतना अच्छा रिश्ता चल के आया है।
शालु, हाँ बात तो सही है अब देखो न रश्मि की शादी भी ऐसे ही जल्द बाज़ी में हुई थी। मगर बहुत खुश है मेरी रश्मि भी अपने ससुराल में।
देवा, काकी रश्मि कब आ रही है मायके।
शालु, देवा को घुरते हुए कहती है । आ जायेगी लगता है भाई को अपनी बहन की याद सता रही है।
रत्ना, हाँ मेरा देवा है ही ऐसा अपनी सभी बहनो का बड़ा ख्याल रखता है।
देवा, माँ मै तो काकी से भी कहता हूँ कुछ भी मत सोचा करो निसंकोच बोल दिया करो मै ख़ुशी ख़ुशी कर दूंगा तुम्हारा काम।

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