Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 53

शालु को खांसी आ जाती है और रत्ना उसके लिए पानी लेने अंदर चली जाती है।
उसके जाते ही शालु देवा के कान खिचती है।
क्यूं रे क्या बोल रहा था।
देवा, शालू के जांघ पर हाथ रख के चूत के पास के नरम हिस्से को सहला देता है।
इस काम के बारे में काकी।
शालु, खवाब देखता रह जा बेटा। तुझे बस कुछ नहीं मिलने वाला।”
रत्ना, ये लो पानी शालू।
शालु, रत्ना के हाथ से पानी ले के पीने लगती है और नज़रों से देवा को घुरने लगती है।
शालु, अच्छा रत्ना मै चलती हूँ घर में बहुत काम है रात भी होने को आई है।
रत्ना, हाँ मुझे भी बहुत नींद आ रही है। आज बहुत काम करना पडा हमे।
शालु, घर जाने के लिए खड़ी होती है।
देवा: काकी मै छोड दूँ घर तक।
शालु, नहीं मै चलि जाऊँगी।
छोटी छोटी बातों के लिए तुझे परेशान नहीं करुँगी मै बेटा।
देवा, क्या काकी तुम भी न। चलो मै आता हूँ रास्ते में बहुत अँधेरा है।
देवा भी शालु के साथ घर से बाहर निकल जाता है और रत्ना बिस्तर लगा देती है।
ममता, भी ऑखें छुपाते हुए रत्ना के पास जाके लेट जाती है।
रास्ते में अँधेरा बहुत था गांव के सभी लोग सो चुके थे।
शालु, आगे आगे चल रही थी और देवा पीछे पीछे।
देवा, रुक ज़रा।
शालु, रुक जाती है गली में अँधेरा के वजह से कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था ।
देवा , शालू के करीब जाता है और उसे पीछे से जकड लेता है।
शालु, आहह क्या करता है इसके लिए आया था ना तू उन्हह।
देवा, शालू के ब्रैस्ट मसलने लगता है और उसके मुँह से मुँह लगा देता है।
आज तो बहुत सुन्दर लग रही थी शालु। बहुत देर से तेरे होठो को चुमने को दिल कर रहा है मेरा गलप्प गलप्प।
शालु, बदन ढीला छोड देती है और देवा के बालों में उँगलियाँ फँसा देती है।
मत कर गलप्प गलप्प।
देवा, उसे बोलने नहीं देता और उसके नरम नरम ब्रैस्ट को मसलते हुए होठो को चुमने लगता है।
शालु की चूत में पानी के क़तरे आने लगते है मगर कुत्ते के भोकने से देवा शालु को छोड देता है और शालु अपनी गरम चूत पर हाथ रख कर घर चलि आती है।
देवा, घर आता है तब तक ममता और रत्ना रूम में बैठे बातें कर रही थी । देवा उनके पास नहीं बैठा बल्कि अपने रूम में चला जाता है।
रात के 2 बजे देवा के पेट पर ममता अपने हाथ फेरते उसे जगा देती है।
देवा आँख खोल देता है।
अरे ममता तू। माँ ने देख ली तो मुसीबत आ जाएगी।
ममता , माँ की फिकर है और मेरी नहीं। मुझे नहीं करने शादी भैया आप माँ से बोलो न मुझे नहीं करनी शादी।
रात के अँधेरे में ममता बहुत प्यारी लग रही थी वो देवा से एकदम चिपक के बैठी थी।
देवा, अपनी बहन को अपने बाहों में जकड लेता है।
ममता, उन्हह भैया कुछ करो न । शादी नहीं करुँगी मै किसी से भी।
देवा, चुप कर साली जब से देख रहा हूँ वही रट लगा रखी है।
अरे पगली तू शादी कर ले उसके बाद कौन तुझे कह रहा है हमेशा वहां रहने को। जब दिल करे आ जाना यहाँ मेरे लंड के निचे सोने के लिये।”
ममता, भैया मुझे बहुत याद आएंगी ना आपकी।
देवा, याद आयेंगी तू मुझे भी। मगर किया भी क्या जा सकता है।
गांव वालो को क्या कहुंगा मै की बहन की शादी नहीं कर रहा हूँ क्यूंकि वो नहीं चाहती।
ममता को देवा की बात समझ आ गई थी वो अपनी बाहें खोल देती है और देवा उसकी सलवार का नाडा खोल देता है और दोनों भाई बहें एक दूसरे से चिपक जाते है।
ममता , भैया आह्ह्ह्ह।
देवा, ममता की सलवार निकाल देता है और उसे लिटा देता है।
तेरी चूत बहुत मीठी है मेरी बहन गलप्प गलप्प गलप्प।
ममता , आहह चाट लो भैया । शादी के बाद नहीं मिलेगी ना रोज़ रोज़ आह्ह्ह्ह।
देवा, अपनी ज़ुबान से ममता की चिकनी चूत को चाटने लगता है गलप्प गलप्प्प।
ममता , भैया माँ जग जाएगी जल्दी से अंदर पेल दो ना आह्ह्ह्ह।
देवा, रुक जा ममता गलप्प गलप्प।
ममता , हाथ निचे ले जाके देवा का लंड पकड़ लेती है और उसे मुठी में भर के सहलाने लगती है।
देवा, आहह तेरा हाथ लगते ही देख कैसे उछल रहा है तेरे भाई का लंड ममता।
ममता , मेरी चूत का कुछ करो भइया।
देवा, ममता के दोनों पैर खोल के अपने लंड को ममता की चूत पर लगा देता है और अंदर पेल देता है।
ममता, भैया उईईईईई माँ।
जब भी लेती हूँ ऐसा लगता है पहली बार ले रही हूँ आहह।
देवा, बहुत छोटी सी चूत है बहना तेरी और छोटी सी चूत मेरे मोटे लंड को बहुत ज़ोर से जकड लेती है आअह्हह्हह्हह।
ममता , आपके लंड ने तो इसे खोला है भइया
और चोदो न आह ज़ोर से आहहह्ह्ह।
वा निचे से कमर उठाने लगती है और देवा ऊपर से ममता की चूत में लंड उतारने लगता है।
देवा, ममता को घुमा के उल्टा लिटा देता है और पीछे से कमर पर लेट जाता है।
ममता, भैया भाभी की गाण्ड बहुत ज़ोर से मारे थे न उन्हह तुमने।
देवा, हाँ ममता तेरी भी लुँगा मगर अभी नहीं वरना तू माँ को जगा देगी।
देवा, पीछे से ममता की कमर के दरार में लंड घूस्सा के लंड को चूत की जड तक पहुंचा देता है और घच से लंड को फिर से ममता की चूत की गहराइयों में उतार देता है।
ममता, चीख़ पडती है।
माँआआआआआआआआ………….”
ममता की चीख़ रत्ना के कान तक पहुँच जाती है और वो जग जाती है ममता को अपने पास ना पा के वो उठके देवा के रूम में चली जाती है और सामने का नज़ारा देख उसके पांव तले की ज़मीन खिसक जाती है।
रत्ना, चीखते हुए।
हमारखोरों।
क्या कर रहे हो तुम दोनो।
देवा, और ममता चौंकते हुए उठ के बैठ जाते है।
देवा का लंड ममता की चूत से आवाज़ के साथ बाहर निकल जाता है।
रत्ना, पास में पड़ी हुई लकड़ी ले के दोनों की पिटाई शुरू कर देती है।
कुते कमिने हरामज़ादे अपनी बहन के साथ ये सब करते तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आती।
देवा, और ममता की पीठ पर हर जगह रत्ना लकड़ी से मारना शुरू कर देती है।
देवा रत्ना का हाथ नहीं पकडता मगर ममता देवा को बचाने के चक्कर में खुद भी पिटती चली जाती है।
रत्ना, देवा के पास आती है और उसके बाल खीच के सटा सट सटा सट थप्पड की बौछार उसके मुँह पर कर देती है। पास में बैठी ममता भी ज़्यादा देर बच नहीं पाती और रत्ना ममता का मुँह भी लाल कर देती है।
रत्ना, कपडे पहनो तुम दोनों हरामखोरों।
देवा, अपने कपडे पहनता है और रत्ना उसे मारते मारते घर के बाहर ले आते है।
निकल जा मेरे घर से कुत्ते और आज के बाद तेरे शक्ल भी मुझे मत दिखाना समझा।
ममता, ऐसे मत करो न माँ।
वो रोने लगती है।
रत्ना, तुझे भी जाना है तो तू भी निकल जा कुतिया।
रत्ना एक ज़ोर से लकड़ी ममता के पैर पर मारती है और ममता वही रोते रोते बैठ जाती है।
देवा, अपने घर रत्ना और ममता को देखता हुआ घर से बाहर निकल जाता है।
रत्ना, ज़ोर से चीखते हुए उससे कहती है वापस मत आना कुत्ते।
रत्ना पलट के ममता के बाल खीचते हुए उसके मुँह पर चपत मारते हुए उसे घसिटते हुए घर के अंदर ले जाती है।”
रत्ना, ममता के बाल खीचते हुए घर के अंदर ले आती है।
बोल कब से चल रहा है ये सब। बोल कुतिया बोल।
ओ मुँह से भी बोल रही थी और हाथों का भी इस्तेमाल कर रही थी।
ममता थी की रोये जा रही थी उसे अपनी माँ की पिटाई से रोना नहीं आ रहा था वो तो अपने देवा के लिए परेशानी में रोये जा रही थी।
जीस तरह से देवा ने ममता की तरफ देखा था घर से निकलने से पहले वो सोच सोच के ममता का दिल घबरा रहा था।
की कही देवा कुछ उल्टा सीधा न कर दे कही कोई अनहोनी न हो जाए।
रत्ना, अरे बोलती क्यों नही।
ममता, आखिर कर रत्ना का हाथ पकड़ लेती है।
बस माँ बस…
रत्ना, साली मेरा हाथ पकड़ती है क्या यही शिक्षा दी है मैंने तुझे।
कामिनी तुझसे कुछ दिन भी नहीं रहा गया अपने भाई को अपने ऊपर चढाने में तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आई।
ममता, जब एक माँ अपने बेटे को अपने ऊपर चढ़ा सकती है तो बहन क्यों नही।
रत्ना, क्या। क्या बोली तू… वो ममता के बाल खीचते हुए दो तीन थप्पड और उसके गाल पर जड़ देती है।
ममता, तुम्हारी ननद देवकी मामी।
रत्ना, तू कहना क्या चाहती है।
ममता, हाँ हाँ तुम्हारी देवकी।
वो अपने बेटे रामु से चुदती है दिन रात।
तुम्हारे खानदान में होता है ये सब और तुम मुझे बोल रही हो।
हाँ मुझे शर्म नहीं आई क्यूंकि मै सच्चा प्रेम करती हूँ भैया से।
और अगर तुमने मुझे और भैया को अलग करने के बारे में सोचा भी ना माँ तो मैं कुँवें में कूद के जान दे दूंगी बोल देती हूँ।
जवान खून एक वक़्त तक ज़ुल्म सहता है मगर जब कोई भी चीज़ चाहे वो नाजायज़ प्रेम ही क्यों न हो
जब इन्तहा पर आता है तो उसे कोई नहीं रोक सकता।
रत्ना, ऑंखें फाड़े अपनी बेटी ममता को देखने लगती है। उसके कहे गए वो चंद शब्द उसके कानो में गूँजने लगते है।
रत्ना, सर पकड़ के बैठ जाती है।
रत्ना अभी जब अपने भाई के घर गई थी तब उसने ऐसा कुछ देखी थी जिस पर उसे यक़ीन नहीं हुआ था।
उसने रामु को और देवकी को एक दूसरे के गले लगते हुए देखी थी और रामु देवकी की कमर दबाते हुए उसे चुम रहा था।
रात का अँधेरा था मगर रत्ना को लगा था की वो कौशल्या नहीं बल्कि सुडौल जिस्म वाली देवकी ही होगी।
उस बात को वो भूलना चाहती थी मगर आज जब ममता के मुँह से उसने ये बात सुनी तो उसके पांव तले की ज़मीन निकल गई थी।
वो रात न ममता सोई और न रत्ना।”
जहां एक तरफ रत्ना, देवा और ममता के रिश्ते को लेके परेशान थी की कही गांव में ये बात पता चल गई की एक भाई अपनी बहन को चोदता है।
तो क्या होंगा।
ये बात उससे परेशान तो कर रही थी मगर एक और चीज़ उसके जिस्म में हलचल मचा रही थी।
ममता के कही हुई वो बात की जब एक बेटा अपनी माँ को चोद सकता है तो एक भाई क्यों नही।
रामु, देवकी को चोदता है।
यही एक बात उसके तन बदन में आग लगा रही थी।
वो अपने बिस्तर पर सोई हुई थी।
बाहर मौसम ठण्डा था हलकी हलकी बरसात ने मौसम को ख़ुशगवार बना दिया था मगर रत्ना का जिस्म भट्टी के तरह जल रहा था।
आंखे बंद करते ही उसे देवा और ममता चुदाई करते हुए नज़र आ जाते।
वो बेचैन भी थी और परेशान भी दूसरी तरफ ममता का पूरा ध्यान देवा की तरफ था।
वो दिल हि दिल में अपने भगवान से दुआ मांग रही थी की बस उसके भाई को सही सलामत घर भेज दे चाहे तो उसकी जान ले ले।
रात का वो ख़ौफ़नाक सन्नाटा तो किसी तरह कट गया मगर सुबह का सूरज भी नए उम्मीद ले के नहीं आया था।
सुरज सर पर आ गया था मगर देवा का कोई अता पता नहीं था।
ममता , रत्न के पास जाके बैठ जाती है।
माँ….
रत्ना की ऑखें सूजी हुई थी वो शायद रात भर रोई थी
वो ममता की तरफ नहीं देखती।
ममता, माँ मेरी बात तो सुनो….
माँ तुम मुझे जान से मार दो मगर भैया को देखो न कहाँ गए है। कितनी देर हो गई है।
उन्होने कुछ खाया भी नहीं माँ किसी को खेत में भेज के पता लगाओ ना माँ की भैया कहाँ है।
रत्ना, ममता की तरफ ज़हरीली नज़रों से देखती है।
ममता, माँ मै जानती हूँ तुम मुझसे नफरत करती तो मै ये भी नहीं चाहती की तुम मुझे माफ़ करो।
मगर भैया को कुछ हो गया ना माँ तो मै तुम्हें कभी माफ़ नहीं करुँगी।
रत्ना, अच्छा मुझे माफ़ नहीं करेगी कलमुँही जा मर जा तू भी अपने भाई के साथ जा के । मेरा पीछा छोड़ो तुम दोनो ।मुझे तुझसे कोई बात नहीं करनी।
ममता, रोती बिलखती वहां से उठके अपने रूम में चली जाती है।”
इधर हवेली में भी सब कुछ उथल पुथल होने के क़रीब था।
हिम्मत राव की बेरुख़ी जहाँ रुक्मणी को परेशान किये हुए थी । वही रानी भी बहुत ग़ुस्से में था।
रुक्मणी, हिम्मत राव के पास जाके बैठ जाती है। वो उस वक़्त हुक्का पी रहा था।
हिम्मत, एक नज़र उठाके रुक्मणी की तरफ देखता है।
रुक्मणी, मैं पूछती हूँ आखिर कब तक आपके दोस्त की बीवी यहाँ रहेंगी।
हिम्मत, क्यूँ तुझे क्या तकलीफ हो गई है बिंदिया से।
रुक्मणी, देखिये मै चुप हूँ इसका मतलब ये नहीं की मै कुछ नहीं कर सकती।
हिम्मत, हुक्का एक तरफ रख के खड़ा हो जाता है।
क्या मतलब है तेरे कहने का।

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