Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 56

देवा, हाँ में सर हिला देता है।
और शालु मुस्कुराते हुए दरवाजा बंद करके अपने घर में चलि जाती है।
सुबह जब शालु की आँख खुलती है तो देवा उसे उस रूम में नहीं मिलता।”
देवा, उठके सीधा अपने खेत में चला जाता है।
रत्ना, को कोई गांव वाला आके बताता है की उसने देवा को खेत में देखा है तो रत्ना नीलम और ममता भागते हुए खेत में पहुँच जाते है।
देवा, खेत में काम कर रहा था।
रत्ना, ममता और नीलम रोते हुए उसके पास जाके उससे लिपट जाते है।
रत्ना, कहाँ चला गया था तू देवा अपनी माँ को छोड़ के। चल घर चल।
देवा, मुझे नहीं जाना घर वर । चले जाओ यहाँ से…
ममता, भैया कैसी बातें कर रहे हो चलो न । देखो कैसे हालत हो गई है माँ और मेरी भी। नीलम भी कितनी परेशान है।
देवा, नीलम की तरफ देखता है रो रो के तीनो की ऑखें सूज गई थी।
तभी वहां शालु और पप्पू भी आ जाते है।
सभी देवा को समझाने लगते है मगर देवा घर आने से इंकार कर देता है।
देवा, अगर मुझे घर आने के लिए मजबूर करोगे तो मै हमेशा हमेशा के लिए यहाँ से कही दूर चला जाऊँगा।
रत्ना, नहीं नहीं बेटा ऐसी बात मत कर।
शालु, रत्ना और ममता को एक तरफ ले जाती है।
देखो रत्ना अभी वो बहुत ग़ुस्से में है।
दो तीन दिन में मै उसे समझा बुझा के घर भेज दूँगी।
शुकर है वो गांव तो वापस आ गया।
तूम घर जाओ मै उसे खाना खिला कर पप्पू के साथ घर में सुला दूँगी।
रत्ना, को शालु की बात ठीक लगती है।
उसे तो बस यही ख़ुशी थी की देवा घर न सही गांव में सही सलामत तो आ गया है।
ममता और रत्ना दोनों घर चली जाती है।
और शालु पप्पू के साथ खेत में एक तरफ चली जाती है।
देवा, नीलम के पास आता है।
नीलम के कंधे पर जैसे ही वो अपना हाथ रखता है।
नीलम हाथ झटक देती है।
नीलम, मुझसे बात मत करो कहाँ चले गए थे। ज़रा भी परवाह नहीं है ना मेरी।
पता है एक पल भी जीना मुहाल हो गया था मेंरा।
देवा, नीलम को अपने सीने से लगा लेता है।
मुझे माफ़ कर दे नीलम आज के बाद मै कभी ऐसे नहीं जाऊँगा।
नीलम: सच ।
देवा: देख तेरे सर की कसम।
नीलम, आज के बाद कभी गए न तो बोल देती हूँ मै अपनी जान दे दूंगी।
देवा, इतना प्यार करती हो मुझसे।
नीलम, नफरत करती हूँ मै तुमसे।
ये कहते कहते वो दूबारा देवा के सीने से लिपट के रोने लगती है।
देवा से उसके ऑंसू बर्दाश्त नहीं होते और वो उसके ऑसू बंद करने के लिये अपने होंठ उसके होठो पर रख देता है।
नीलम, सिसकते सिसकते चुप हो जाती है।
बास कुछ ही पल गुज़रे थे मगर नीलम की ऑखों में मोहब्बत के दिए टिमटिममाने लगते है।
वो सब कुछ भूल जाती है और एक नई नवेली किसी दुल्हन की तरह देवा के छाती पर मुक्का मारके वहां से भाग जाती है।”
नीलम देवा को तड़पा के वहां से अपने घर भाग जाती है मगर देवा की कोई इच्छा नहीं थी अपने घर वापस जाने का।
शालु और पप्पू दूर खड़े देवा के बारे में ही बातें कर रहे थे। दोनो माँ बेटे सलाह करके देवा के पास आते है और शालु देवा को घर चल के खाना खाने के लिए कहती है।
देवा, मना करता है मगर शालु उसे ज़बर्दस्ती अपने घर ले आती है।
खाना खाने के बाद देवा आराम करने पीछे के रूम में चला जाता है और पप्पू अपने खेत में काम करने के लिए निकल जाता है।
शालु और नीलम घर में साफ़ सफाई कर रहे थे।
शालु, अरे नीलम बेटी वो ज़रा देवा को हल्दी वाला दूध का एक गिलास दे दो।
नीलम, ठीक है माँ। नीलम एक गिलास में दूध डालके उस में थोडी सी हल्दी मिलाके देवा के पास जाती है।
देवा उस वक़्त बिस्तर पर लेटा अपनी माँ और बहन के बारे में सोच रहा था । नीलम को देख वो उठके बैठ जाता है।
नीलम, शर्माते हुए दूध का गिलास देवा की तरफ बढाती है देवा गिलास लेने के बहाने नीलम का नाज़ुक हाथ दबा देता है।
नीलाम, बनावटी ग़ुस्से से देवा को घुरने लगती है।
देवा, इशारे से नीलम को बैठने के लिए कहता है।
नीलम, चुप चाप एक कोने में बैठ जाती है।
एक बात पुछु।
देवा, हाँ पूछ ना।
नीलम, वो वो आप माँ से नाराज़ क्यों है।
देवा, माँ मेरी शादी करवाना चाहती है उनके रिश्तेदार की लड़की से।
नीलम, चौंक के देवा की तरफ देखती है।
क्या।
देवा, हाँ नीलम बस इसी बात को ले के माँ और मेरे बीच तू तू मै मै हो गई थी।
नीलम की ऑखों में ऑंसू आ जाते है वो अपने ऑसू छूपाने के लिए सर झुका लेती है।
देवा, क्या हुआ।
नीलम, कुछ नही।
आप क्या चाहते है।
देवा, माँ को मै नाराज़ नहीं देख सकता नीलम।
नीलाम, ये सुनके सिसक पडती है।
देवा, अरे अरे रोती क्यों है।
नीलम, देवा का हाथ झटक के खड़ी हो जाती है।
देवा, अरे पगली रो मत मै तो मज़ाक़ कर रहा था।
माँ कोई मेरी शादी वादी नहीं करवाना चाहती वो तो बस एक छोटी सी बात पर माँ और मेरे बीच बहस हो गई थी । तू भी न पगली कही की।
नीलम , दना दन देवा की छाती पर मुक्कों की बरसात कर देती है।
और देवा हँसता हुआ नीलम को अपने बाहों में समेट लेता है।”
नीलम, आइन्दा ऐसी बात मुँह से निकली भी न मेरे सिवा किसी और के बारे में सोचना भी मत।
देवा, और अगर सोचा तो।
नीलम, जान से मार दुंगी।
देवा, किसे मुझे।
नीलाम, नहीं आपको नहीं उसे और फिर खुद भी मर जाऊँगी बोल देती हूँ।
देवा, नीलम को अपनी छाती से और कस के चिपका लेता है।
मेरे दिल के एक एक धड़कन में तू बसी है नीलम मुझे तेरे सिवा कोई नहीं भाता।
अरे मेरी जान ऐसे ही नहीं कहता मै तुझे।
नीलम, सब झूठ है।
हमेशा सताते रहते हो मुझे।
देवा, एक ही है ना मुँह लगाने को। दो चार होती तो इतना नहीं सताता।
नीलम, एक से ही काम चलाना पडेगा।
देवा, नीलम की ऑखों में देखने लगता है।
नीलम, ऐसे क्या देख रहे हो जी।
देवा, अपने आप को देख रहा हूँ।
नीलम, ऑंखें बंद कीजिये।
देवा, क्यूं।
नीलम, बंद करो ना।
देवा, ऑखें बंद कर देता है।
और उसकी ऑखें बंद होते ही नीलम के नाज़ुक होंठ देवा को अपने गालों पर महसूस होते है।
नीलम, धीरे से देवा के कान में कहती है।
मै आपसे बहुत प्यार करती हूँ देवेन्द्र।
देवेन्द्र , देवा का असली नाम । कोई भी उसे इस नाम से ना जानता था और न पुकारता था। बस नीलम उसे कभी कभी इस नाम से पुकारती थी।
और देवा समझ जाता था की नीलम को क्या चाहिए।
देवा, ऑखें खोल के दोनों हाथों में नीलम के चेहरे को थाम लेता है और उसके होठो पर अपने होंठ रख के उसे एक डीप किस करके होंठ हटा लेता है।
नीलम उसी बेहोशी की आलम में बिना कुछ कहे वहां से बाहर चली जाती है।
अजीब मोहब्बत थी दोनों की।
एक देवा जिसे औरत में सिर्फ दो चीज़ें नज़र आते थी चूत और गाँड।
मगर नीलम के मामले में वो बिलकुल किसी बच्चे की तरह पेश आता था नीलम के साथ।
एक नीलम बहुत खामोश तबियत लड़की।
अपने दुनिया में रहने वाली उसकी दुनिया का राजकुमार था उसका देवा।
जो उसे एक दिन घोड़े पर बैठा के दूर किसी दूसरी दुनिया की सैर करवाने ले जाने वाला था अपने मोहब्बत के लिए वो दुनिया से भी लड जाए ऐसी थी नीलम।”
रात घिरने लगती है और ममता देवा से मिलने शालु के घर आती है।
ममता, काफी देर से देवा के पास बैठी उसे समझाने की कोशिश कर रही थी मगर देवा था की चलने को तैयार नहीं था।
ममता , भैया अगर आप मेरे साथ नहीं आएंगे न तो मै अपनी जान दे दूंगी सच्ची । वो बोलते सिसक सिसक के रो पडी।
देवा, तू जानती है ना ममता मै वहां कैसे किस मुँह से जाऊँ। माँ को देखते ही मुझे वो सब याद आ जायेगा।
ममता , भैया माँ ने कहा है की तुम घर आ जाओ वो तुम्हें कुछ नहीं कहेंगी।
तुम्हेँ जैसा रहना है वैसे रहो बस घर लौट आओ।
तुम्हे अपनी बहन की कसम।
देवा, ऐसा कहा माँ ने।
ममता , हाँ बिलकुल ऐसे ही वो खुद तुम्हें लेने आने वाली थी मगर तुम्हारा ग़ुस्सा देख नहीं आई। चलो न भैया घर चलो ना।
देवा, तू जा मै कल सुबह आ जाऊँगा।
ममता , अभी क्यों नही।
देवा, जा बोला न दिमाग ख़राब मत कर।
ममता , देवा का पारा चढ़ता देख खड़ी हो जाती है।
कल कितने बजे लेने के लिए आऊँ मै फिर….
देवा, जा मै आ जाऊंगा सुबह खेत से सीधा घर आऊँगा।
ममता , ठीक है।
वो अपने ऑंसू पोछते हुए वहां से अपने घर लौट जाती है।
शालु, देवा के पास आके बैठ जाती है।
क्या कह रही थी ममता।
देवा, कुछ नहीं मुझे घर चलने के लिए कह रही थी।
शालु, क्या कहा तुमने उससे।
देवा, यही के कल आऊँगा।
शालु, अच्छा चलो रात बहुत हो गई है तुम पिछे वाले रूम में जा के सो जाओ।
देवा, तुम नहीं चलोगी।
शालु, धत बेशरम जा मुझे भी नींद आ रही है।
शालु नीलम और पप्पू के पास जाके लेट जाती है।
और देवा उठके रूम में जाके लेट जाता है।
रात का अँधेरा गहरा होने लगता है।
देवा , को नींद नहीं आ रही थी।
की तभी उसके रूम का दरवाज़ा खुलता है।
वो दरवाज़े की तरफ देखता है और
उसके मुँह से बस इतना ही निकल पाता है तुम यहाँ इस वक़्त।”
दरवाज़े पर पप्पू खड़ा था।
चेहरे पर मुस्कान लिए वो देवा के जिस्म को घुर रहा था।
देवा, क्या हुआ बात क्या है।
पप्पू, देवा के क़रीब आके उसके पैरों में बैठ जाता है।
मुझे नींद नहीं आ रही है देवा।
देवा, क्यूं।
पप्पू, शरमा जाता है।
उसके इस तरह शरमाने से देवा
अच्छी तरह वाकिफ़ था।
वो पप्पू को ऊपर चारपाई पर बैठा देता है।
देवा, साले अब तो छोड ये सब। तेरी शादी होने वाली है।
तेरी माँ ने देख लिया तो क्या सोचेगी तेरे और मेरे बारे में।
पप्पू, अपना हाथ देवा के जांघ पर रख के उसके जांघ के पास सहलाने लगता है।
देवा, तुझे सुनाई नहीं दिया। मै क्या कह रहा हूँ जा मुझे सोने दे।

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