Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 58

शालु, आहह देवा आह्ह्ह्ह्ह।
शालु, मेरे मरद ने भी मुझे ऐसे नहीं चोदा देवा आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
आज से तुम ही मेरे मरद हो मेरे बच्चों के माँ की।
आज से हम सब तेरे गुलाम हैं मेरे देवा।
देवा शालू के मोटे चुतडो को कस-कस कर अपने हाथो से भिचता हुआ उसकी गान्ड मारने लगता है और शालू अपने हाथो के पंजो से चादर को पकड़े हुए अपने देवा का मोटा लंड अपनी गदराई गान्ड मे लेने लगती है।
देवा करीब 15 मिनिट तक अपनी सासु माँ की धीरे-धीरे लेकिन गहरे धक्के मारता हुआ उसकी मोटी गान्ड चोदता रहता है, उसके बाद देवा शालू की गान्ड को हुमच-हुमच कर चोदना शुरू कर देता है।
शालू: आह आहह्ह्ह्ह ओह देवा बहुत खुजली हो रही है आह बहुत अच्छा लग रहा है देवा।थोडा तेज चोदो आह-आह ओह देवा तू कितना अच्छा है थोड़ा कस कर पेल। आह-आह, चोद देवा । आह-आह ओह और तेज पेल और तेज।
देवा शालू की मोटी गान्ड को सटासट चोदने लगता है और उसके चुतडो पर हल्के-हल्के थप्पड़ मारते हुए उसकी गान्ड मे सटासट लंड पेलने लगता है।
कुछ देर गांड मारने के बाद देवा अपना लंड शालू की गांड से निकाल कर उसकी चूत में पेल देता है। शालू की चूत बहुत पानी छोड़ रही थी वह पूरी तरह से गीली हो चुकी है। देवा का लंड आराम से शालू की चूत में घुस जाता है फिर देवा जोर जोर से शालू की चूत में अपना मोटा लंड पेलने लगता है ।5 मिनट की बुर चुदाई में ही शालू की चूत पानी छोड़ देती है और वह झड़ जाती है। जब शालू झड़ जाती है तब देवा अपना लंड फिर से शालू की मोटी गांड में पेल देता है।”
करीब 20 मिनिट तक शालू की गान्ड को मारते हुए देवा का लंड उसकी कसी हुई गान्ड मे पानी छोड़ देता है और देवा हान्फता हुआ उसकी कमर के उपर झुक जाता है और शालू बेड पर पेट के बल पसर जाती है, देवा सीधा शालू की गान्ड मे लंड फसाए उसके उपर लेट जाता है और करीब 2 मिनिट बाद उसका लंड शालू की गान्ड से बाहर निकल आता है।
कुछ देर बाद फिर से देवा का लंड खड़ा हो जाता है।वह फिर से शालू की गीली चूत और मोटी गांड फाड़ने लगता है।
देवा, अपनी शालु को रात भर ऐसे ही चोदता है ।
शालू को चोदना देवा का बहुत दिनों का सपना था।देवा जबसे जवान हुआ था तभी से उसे गांव की दो औरतें सब से ज्यादा पसंद थी।एक तो उसकी माँ रत्ना और दूसरी शालू।एक सपना आज उसका पूरा हो गया था।
वह शालू को रातभर बेदर्दी से चोदता है देवा का लंड कभी शालू की चूत में जाता है तो कभी उसकी गांड में। देवा शालू को किसी रंडी की तरह चोदता है।
सुबह तक शालु ठीक से चल भी नहीं पाती और लडखडाती हुए अपने बिस्तर पर जा कर लेट जाती है।
और देवा सुबह सुबह अपने खेतों में चला जाता है।
उधर हवेली में हिम्मत का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था उसे हर तरफ से नाकामी ही मिल रही थी।
वो जल्द से जल्द देवा की ज़मीन और रुक्मणी की जायदाद हथियाना चाहता था मगर उसके सारी चालें नाकाम साबित हो रही थी।
झुंझलाया हुआ हिम्मत अपने रूम में रानी के साथ बैठा हुआ था।
रानी, बापू इतनी चिंता मत करो।
हिम्मत, हरामज़ादी मुझे मत सीखा।
तू किसी काम की नहीं है । तुझे भी आज़मा के देख चूका हूँ मै। अब मुझे ही कुछ करना होंगा।
रानी, क्या करने वाले हो आप।
हिम्मत, ख़ून।
रानी, खून किसका।
हिम्मत, देवा का। उस हराम के जने को मै हमेशा हमेशा के लिए दुनिया से भेज दूंगा वहां जहाँ उसका बाप है।
रानी, अपने बाप के ऑखों में उतरे खून को भाँप गई थी वो जान गई थी की हिम्मत कुछ ऐसा सोच चूका है। जिसका अंजाम पूरे गांव वालों को और खास कर देवा के खानदान वालों को भुगतना होंगा।
हिम्मत, मैंने कुछ लोग शहर से बुलाये है रानी।
रानी, काँपते होठो से।
किसलिए बापु।
हिम्मत, अपनी बन्दूक उठाके उसका निशाना रानी के सर की तरफ करते हुए।
तू जानती है किसलिये।
बाहर खड़ी खड़ी रुक्मणी के हाथ पैर काँपने लगते है।”
रानी, बापू ये क्या कर रहे हो गोली चल जाएगी।
हिम्मत, अच्छा देखता हूँ क्या सच में गोली चलती भी है या नहीं बहुत दिन से किसी का शिकार नहीं किया मैने।
रानी, बापू मज़ाक़ छोड़ो सच में गोली चल जाएगी।
हिम्मत, एक मिनट हिलना मत रानी।
वो बन्दूक की नाल को रानी के सर की तरफ रख के ऊँगली ट्रीगर पर रख देता है।
रानी हिल भी नहीं पाती ज़रा ची चूक उसका भेजा उड़ा सकती थी।
उसे अपने बाप पर बिलकुल भरोसा नहीं था शराब के नशे में हिम्मत कुछ भी कर सकता था।
रुक्मणी, ऑंखें फाड़े कभी हिम्मत को तो कभी रानी के पसीने में तरबतर चेहरे को देखने लगती है।
रानी, बापु।
हिम्मत की ऊँगली ट्रीगर पर दब जाती है।
रुक्मणी, भागते हुए रूम में अंदर आ जाती है रानी
रानी।
गोली रानी की कनपट्टी के पास से होकर गुज़री थी उस गोली की गूंज से रानी सुन्न पड़ गई थी।
अपने सर के इतने क़रीब से गोली गुज़रने से रानी जैसे बेसुध सी हो गई थी।
और सामने बैठा हिम्मत राव खिलखिला कर हँस रहा था।
रुक्मणी, अपने पति को ज़हरीली नजरों से देखने लगती है।
हिम्मत, ये क्या देख रही है हाँ क्या देख रही है साली। मादरचोद की बच्ची ऑखें दिखाती है।
वो रुक्मणी के मुँह पर सटा सट थप्पड़ों की बरसात कर देता है। थप्पड़ों की आवाज़ से रानी को होश आता है
और वो रुक्मणी को हिम्मत के हाथों पिटता देख हिम्मत का हाथ पकड़ लेती है।
रानी, बस बापू क्यों गोबर पर तलवार मार रहे हो।
माँ कुछ नहीं कहती इसका मतलब ये नहीं की वो बेजान है।
जाओ यहाँ से हमे अपने हाल पर छोड दो।
हिम्मत, रानी और रुक्मणी को घूरता हुआ हवेली के बाहर निकल जाता है।
रानी, माँ चुप हो जाओ चुप हो जाओ माँ।
बापु पागल हो गये हैं देवा को बताना पड़ेगा वरना वो पता नहीं क्या कर बैठेंगे।
रुक्मणी का दिल भी धड़कने लगता है हिम्मत बन्दूक लेकर गांव में गया था।”
उधर से देवा अपने खेत से काम करके अपने घर की तरफ लौट रहा था।
और इधर से हिम्मत अपने कार में शराब पीता हुआ उसी रास्ते पर आ रहा था।
अचानक दोनों एक दूसरे के आमने सामने आ जाते है।
चररररर चरर की आवाज़ के साथ हिम्मत ब्रेक लगा देता है।
देवा बस कार के नीचे आते आते ही बचता है।
देवा, हिम्मत की तरफ देखता है और बिना कुछ बोले सर झुकाये आगे बढ़ जाता है।
हिम्मत, कार से उतरता है और देवा के सामने आ जाता है।
क्यूं बे कुत्ते अभी कार के नीचे आ जाता तो….
देवा, माफ़ करना मालिक मैंने आपकी कार देखी नही।
हिम्मत, शराब के नशे में धुत्त था।
मालिक के बच्चे हरामी साले कहाँ देख के चल रहा था। आईन्दा मेरे सामने दिखाई भी दिया न तो….
इस में की सारी गोलिया तेरे भेजे में उतार दूँगा।
देवा, दोनों हाथ जोड के हिम्मत से माफ़ी माँगता है।
हिम्मत की आवाज़ सुनके आस पास के खेत में काम करने वाले भी वहां जमा हो जाते है।
इसलिए हिम्मत राव बात को आगे नहीं बढाता।
वो तो बस चाहता था की देवा कुछ उल्टा सीधा कहे या कुछ बोले के वही उसका काम तमाम कर दे….
मगर लोगों की मौजूदगी को देखते हुए हिम्मत अपने कार में बैठ के बिजली की तेजी से वहां से चला जाता है।
लोग हिम्मत को उसके जाने के बाद बुरा भला कहते है मगर देवा बिना कुछ कहे अपने घर की तरफ चल देता है।
हिम्मत, दिल ही दिल में सोचते हुए इस हरामी के लिए मुझे शहर ही जाना पडेगा।
अब बहुत हुआ। हाँ बहुत हुआ। वो कार शहर की तरफ मोड देता है।
जब देवा घर पहुँचता है तो ममता भागते हुए देवा से आके लिपट जाती है।
ममता, माँ देखो ना भैया आ गये है।
रत्ना, भी दौड़ते हुए देवा के क़रीब आ जाती है।
दोनो एक दूसरे की ऑखों में देखने लगते है।
मगर दोनों कुछ नहीं कहते।
रत्ना जैसे सारे गिले शिकवे भूलने को तैयार थी उसका बेटा देवा जो घर आ गया था।
ममता , अब्ब यही खड़े रहोगे या अंदर भी चलोगे। आओ मैंने तुम्हारे लिए गरम गरम हलवा बनाई हूँ।
देवा, अपने रूम में चला जाता है और नहा धोके खाना खाने बैठ जाता है।
खाना खाते खाते भी सिर्फ ममता बड़ बड करती है। देवा और रत्ना चुप चाप खाना खाते है।
मगर रत्ना बार बार चोर नज़रों से देवा को देखती रहती है।
रत्ना खाना ख़तम करके अपने रूम में चलि जाती है।
ममता भी खाने के प्लेटें साफ़ करने बैठ जाती है।”
देवा ममता को देखता हुआ रत्ना के रूम में चला जाता है
देवा, माँ…
रत्ना, उस वक़्त आइने के सामने अपने बाल संवार रही थी देवा के मुँह से माँ सुनके वो मुड के देखती है।
और भागते हुए देवा की छाती से जाके लिपट जाती है।
रत्ना, क्यूँ चला गया था तू मुझे छोड के।
इतना बड़ा हो गया है तू की अपनी माँ से नाराज़ होके चला गया कितनी परेशान थी मै। तुझे पता है।
देवा, रत्ना को अपनी बाहों में समेट लेता है।
नही माँ मै तुमसे नाराज़ नहीं था।
बस उस वक़्त पता नहीं क्या हो गया था । मुझे घर आने को दिल नहीं कर रहा था अब आ गया हूँ ना । अब कही नहीं जाऊँगा।
रत्ना, कभी मुझे छोड के मत जाना अरे सब कुछ तो तेरा है ये घर सारी ज़मीन जायदाद ममता मैं…..
रत्ना के मुँह से अचानक ही निकल जाता है मैं….
देवा और रत्ना की ऑखें टकराती है।
और देवा की पकड़ रत्ना की कमर पर थोड़े कस जाता है।
उन दोनों के होंठ एक दूसरे के इतने क़रीब थे की दोनों एक दूसरे की साँसें भी महसूस कर सकते थे।
देवा, धीरे से कहता है।
सब कुछ मेरा है माँ।
इससे पहले की रत्ना कुछ कहती ममता के क़दमों की आहट दोनों के कानो में आ जाती है और
रत्ना देवा से अलग होकर बाहर निकल जाता है।
देवा एक तरफ खुश था की उसकी माँ पहले जैसा बर्ताव उसके साथ कर रही है।
मगर दूसरी तरफ देवा को बहुत ज़्यादा उत्सुक्ता भी थी ये जानने की आखिर रत्ना के दिल में है क्या।
ममता , भैया आपका बिस्तर लगा दी हूँ । आप आराम करो।
देवा, ममता का हाथ पकड़ के अपने पास खीच लेता है
तू नहीं चलेंगी।
ममता , देवा के मुँह पर हाथ रखते हुए माँ सुन लेगी धीरे बोलो।
देवा, सुनने दे चल मेरे साथ।
ममता, नहीं तुम अभी जाओ मै रात में माँ के सोने के बाद आती हूँ।”
देवा, जल्दी आजा।
देवा, अपने रूम में जाने लगता है तो रत्ना उसे आवाज़ दे के अपने पास बुला लेती है।
रत्ना, अरे बेटा वो जहाँ ममता के रिश्ते की बात चल रही है ना वहां कल तुझे जाना है।
उन लोगों के कई बार बुलावा भेज चुके है तुझे याद कर रहे थे । जा एक दो दिन के लिए मिल आ। देवकी से भी और उन लोगों के बारे में भी पता कर लेना।
देवा, ठीक है माँ मै कल सुबह चला जाऊँगा।
रत्ना, ठीक है।
रत्ना और ममता एक रूम में आस पास सोई हुई थी। दोनों को लेटे हुए एक घण्टा बीत चूका था।
ममता उठके रत्ना की तरफ देखती है और रत्ना को गहरी नींद में सोता देख चुपचाप उठके अपने भाई के रूम में चली जाती है।
ममता के रूम में घुसते ही रत्ना टक से अपनी ऑखें खोल देती है। शायद वो देखना चाहती थी की ममता जाती है या नहीं अपने भाई से मिलने
रत्ना भी चुपचाप उठके देवा के रूम की खिडके के पास जाके खड़ी हो जाती है।
अंदर देवा और ममता एक दूसरे से लिपटे हुए एक दूसरे के मुँह में मुँह डाले एक दूसरे को मसल रहे थे।
ममता, भैया कहाँ थे इतने दिनों से । देखो न मेरी चूत सुख गई है आपके रस के बिना।
देवा, मेरा भी मुर्झा सा गया है बहना तेरी चूत के बिना।
ममता, इसे तो मै अभी गरम कर देती हूँ।
वो नीचे बैठ के देवा का पजामा उतार देती है और अपने हाथ में देवा का लंड पकड़ के पहले उसे चुमती है
और फिर मुँह में लेकर उसे गीला कर देती हैं गलप्प गलप्प्प।
देवा अपने बिस्तर पर लेट जाता है और ममता के कपडे भी निकाल के उसे पूरी नंगी कर देता है।
बाहर खड़ी रत्ना को अपने बेटी की हरक़तों पर यक़ीन नहीं होता मगर इस बार रत्ना की नज़र मे
ममता की चूत नहीं बल्कि देवा का वो मुसल लंड था। जिस पर से रत्ना की नज़र नहीं हट पा रही थी।
और ममता थी की बिना रुके देवा के लंड को मुँह में अंदर बाहर किये जा रही थी।
गलप्प गलप्प गलप्प करके चूस रही थी चाट रही थी।
देवा की नज़र अचानक ही खिडकी की तरफ जाती है और वहां खड़ी रत्ना उसे दिख जाती है।
देवा, आहह तेरी माँ रत्ना को चोदूँ धीरे धीरे चूस
ममता।
आह मेरा लौडा कैसा है ममता।
ममता, बहुत मीठा है भइया।
देवा, माँ को पसंद आएगा ऐ।
रत्ना की चूत से पहला पानी का कतरा निकल जाता है।
ममता, हाँ। माँ की चूत भी अभी जवान है गलप्प गलप्प।
ये तो हर किसी को पसंद आने जैसा है गलप्प गलप्प।
देवा, बस कर अब नहीं रुका जाता।
देवा ममता को लिटा देता है और उसकी चूत को सहलाने लगता है।”
ममता, आहह क्या कर रहे हो भाई।

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