Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 59

देवा, आज तो बहुत चिकनी लग रही है तेरी चूत ममता।।
ममता , आपको ऐसे ही पसंद है ना भाई।
देवा, हाँ बस एक बार माँ की मिल जाए मुझे। फिर तुम दोनों माँ बेटी को रात भर नंगा करके चोदुँगा मैं।
ममता , अभी बहन चोद लो माँ को बाद में पेल देना। आओं अंदर डाल दो भैया मेरी चूत में चींटियां रेंग रही हैं।
देवा, ममता को अपने ऊपर खीच लेता है।
आज तू मेरी सवारी कर चल चढ़ जा मेरे लंड पर।
ममता अपनी कमर उठाके अपने भाई के लौडे को अपनी चूत से मिलाती है और घच से
लंड पर धीरे धीरे बैठने लगती है जिससे लंड चूत में घुसता चला जाता है।
ममता, हाय मर गयी उन्हह।
देवा, चल चोद अपने भाई को आह्ह्ह्ह।
ममता, हाँ ऐसे न आहहह्ह्ह मेरी
आह माँ आह्ह्ह्ह्ह्ह।
ममता देवा के ऊपर सवार होके सटा सट उसके लंड को अपनी चूत की गहराइयों में लेने लगती है।
ये नज़ारा देख रत्ना का जिस्म इतना गरम हो जाता है जैसे अभी अभी वो भट्टी में से तप के आई हो।
रत्ना की चूत थी की पिघलते जा रही थी और पिघला हुआ गरम गरम पानी रत्ना के जांघो से होता हुआ नीचे गिर रहा था।
की तभी देवा और रत्ना की नज़र एक हो जाती है
और रत्ना मुँह पर हाथ रख के वहां से अपने रूम में भाग जाती है।
इधर शालु के घर पर सभी गहरी नींद में सो चुके थे।
सबसे पहले नीलम के बापु उसके पास नीलम कुछ दूरी पर शालु और उसके पास पप्पू सोया था।
जहां एक तरफ शालु की चूत उसे सोने नहीं दे रही थी वही पप्पू का लंड भी पायजामे के अंदर चीख चीख के माँ माँ बुला रहा था।
पप्पू अपनी एक टाँग शालु के जांघ पर रख देता है।
शालु गर्दन घुमा के पप्पू की तरफ देखती है।
पप्पू आगे सरकता है और शालु के पीछे से चिपक जाता है।
पप्पू का लंड शालु की गाण्ड के दरार में आगे पीछे होने लगता है।
देवा की लंड से मार खा चुकी शालु की गण्ड जग जाती है और शालु सिसकारियां भरने लगती है।
पप्पू अपने एक हाथ से शालु के ब्रैस्ट मसलने लगता है।
और धीरे से शालु के कान में कहता है।
माँ दूसरे रूम में चलो ना।
शालु, अहह तू पहले जा मै आती हूँ।”
पप्पू, उठके दूसरे रूम में चला जाता है और वहां जाके अपने सारे कपडे उतार देता है और वो नंगा होके शालु का इंतज़ार करने लगता है।
कुछ देर बाद शालु भी वहां आ जाती है और दरवाज़ा बंद करके अपने कपडे पप्पू को देखते हुए निकाल देती है।
शालु पप्पू के ऊपर आके चिपक जाती है।
ले आ गई तेरी माँ ।बोल क्यों बुलाया है।
पप्पू, तुझे चोदना है माँ।
शालु, तो चोद ना । रोका किसने है दोनों माँ बेटे एक दुसरे से चिपक जाते है।
और शालु अपनी ज़ुबान पप्पू के मुँह में डालके उससे ज़ुबान चुसवाने लगती है।
पप्पू, का लंड शालु अपने हाथ में ले के उसे सहलाने लगती है।
पप्पू, आहह ज़्यादा मत हिला माँ झड जाऊँगा।
शालु, तेरा लंड मेरी चूत को ठन्डा नहीं कर पाएगा बेटा।
इसे देवा जैसा मरद चाहिए।
पप्पू, कर लुँगा माँ तुम बस देखते जाओ।
पप्पू, शालू की दोनों टाँगें खोल देता है और उसके पैरों के बीच जाके अपने लंड को शालु की चूत पर घीसने लगता है।
शालु, सुबह से बेचैन थी देवा ने रात भर उसे चोद के उसे पागल सा बना दिया था।
उपर से पप्पू बिना घुसाए ऊपर ऊपर रगड रहा था।
शालु, आहह हरामी घुसाता क्यों नही।
पप्पू, जल्दी से अपना लंड शालु की चूत में घूस्सा देता है
और उसके ऊपर लेट के लंड अंदर बाहर करने लगता है।।
शालू, आहह और अंदर घुसाता क्यों नही आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्।
पप्पू, ज़ोर ज़ोर से लंड को अपनी माँ की चूत के अंदर तक पेलने लगता है।
शालु, पीछे से ले मेरी। बेटा।
शालु कुतिया बन जाती है और पप्पू अपने लंड को हाथ में पकड़ के पीछे आ जाता है।
जैसे ही पप्पू शालु की चूत पर लंड लगाता है शालु उससे कहती है।
शालु, वहाँ नहीं गाण्ड में पेल दे बेटा।
और पप्पू अपना लंड पीछे से शालु की गाण्ड में पेल देता है।
शालु, आहह मेरी गाण्ड में ठीक से जाता है तेरा आहह मारते जा रे….और जोर जोर से अपनी माँ की गांड मार बेटा। पेल जोर जोर से मेरी गाँड में बहुत खुजली हो रही है बेटा आह्ह्ह्ह।
पप्पू, दोनों हाथों में अपनी माँ की कमर पकड़ के सटा सट पीछे से शालु की गाण्ड मारने लगता है और शालु भी कमर हिलाते हुए पप्पू का लंड गाण्ड में लेती चली जाती है।”
ज्यादा देर भी नहीं गुज़रती की पप्पू के धक्के बढ़ जाते है और एक चीख़ के साथ पप्पू अपना माल शालु की गाण्ड में छोड़ने लगता है।
शालु, आहह हरामी तू किसी काम का नहीं है।
शालु, अपनी दोनों टाँगें खोल के लेट जाती है और पप्पू का सर पकड़ के अपनी चूत से लगा देती है।
मेरी चूत में अपनी ज़ुबान घूस्सा अब।
पप्पू, अपनी माँ के ग़ुस्से को शांत करने के लिए ऐसा ही करता है और शालु की चूत को और गाण्ड को अपनी जीभ से चाटने लगता है गलप्प गलप्प्पप्प।
शालु, आहह ऐसे ही मेरे लल्ला आहह।
चाट मेरी चूत को उसे तैयार कर देवा के लंड के लिये।
आह मेरी गाण्ड में भी तेरी ज़ुबान घूस्सा दे रे।
शालु, कमर उछालते हुए पप्पू की ज़ुबान का मज़्ज़ा लेने लगती है और फिर पप्पू के बालों को पकड़ के
उसे अपनी चूत पर दबाते हुए चीख़ पडती है आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
एक तेज़ धार पप्पू के मुँह पर छूटने लगता है और शालु निढाल से पड़ जाती है।
उधर हिम्मत राव शहर में अपने खास आदमी से जाके मिलता है।
वो खास आदमी था।
विक्रांत
विक्रान्त एक पेशेवर कातिल था उसका काम लोगों को लूटना डकैती और खून करना था।
पूलिस की फाइल्स में विक्रांत के नाम पर कई गुनाह दर्ज थे।
और हिम्मत राव विक्रांत की मदद से रुक्मणी और देवा का काम तमाम करना चाहता था।
विक्रान्त हिम्मत से मिलता है।
विक्रान्त, कैसे हैं जागीरदार साहब।
हिम्मत, ठीक तुम कैसे हो।
विक्रान्त, दुआ है आपकी और कैसे आना हुआ आपका।
हिम्मत, किसी का काम करना था तुम्हारे हाथो।
विक्रान्त, हो जाएंगा। काम जो आप चाहे किमत जो मै चाहूँ।
हिम्मत, मंज़ूर है।
दोनो बातें करने बैठ जाते है और हिम्मत विक्रांत को सारी बात समझा देता है।
हिम्मत की बात ख़तम होने पर
विक्रान्त: कहता है आप फिकर ना करें जागिरदार सहाब
मै अगले हफ्ते आपके गांव आऊँगा आप मुझे उन दोनों के हुलिये बता देना समझ लो आपका सर दर्द हमेशा हमेशा के लिए खतम।
हिम्मत, विक्रांत को कुछ एडवांस पैसे दे कर वहां से चला जाता है।
हिम्मत और विक्रांत बहुत पुराने दोस्त थे। जब भी हिम्मत को किसी को अपने रास्ते से हटाना होता तो उसे विक्रांत याद आता।
हिम्मत बहुत खुश था की कुछ ही दिनों में देवा और रुक्मणी का काम हमेशा हमेशा के लिए ख़तम होने वाला है।”
रात ममता को जम कर चोदने के बाद देवा गहरी नींद में सोया हुआ था । सुबह के 8 बज रहे थे।
मगर आज देवा न तो सुबह जल्दी उठा था और न अपने खेत में गया था।
ममता , अपनी माँ के पास जाके सुबह सुबह लेट गई थी।
रत्ना, सुबह का नाश्ता बनाकर देवा को उठाने के लिए उसके रूम में चली जाती है।
देवा उस वक़्त सिर्फ लुंगी में सोया हुआ था पास ही में उसकी चड्डी पड़ी हुई थी।
लूँगी में तम्बू बना हुआ लंड रत्ना को दावत दे रहा था।
रत्ना, देवा के काँधे को हिलाने लगती है।
उठ भी जा बेटा बहुत देर हो गई है।
देवा, सोने दो न माँ अभी अभी तो आँख लगी थी मेरी।
रत्ना, रात भर जागेगा तो सुबह आँख कैसे खुलेंगी तेरी। चल उठ जा।
देवा झटके से उठके बैठ जाता है और रात का वो रत्ना का खिडके से झाँकना उसे याद आ जाता है।
माँ तुम भी न। क्या वक़्त हुआ है अभी।
रत्ना, सूरज सर पर आ गया है और तुम यहाँ हो।
याद है ना अपने मामा के घर भी जाना है तुझे आज
देवा, हाँ याद है ना माँ।
वैसे माँ आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो इस साडी में।
तूम तो साडी पहनती ही नही।
रत्ना, बस बस मै ममता के लिए पूजा करने मंदिर गई थी इसलिए ये साडी पहन ली।
देवा, रत्ना का पल्लू पकड़ के उसे देखने लगता है।
बहुत खूबसूरत साडी है ये।
और अचानक पल्लू रत्ना की छाती से सरक जाता है।
रत्ना, उसे ठीक करने लगती है मगर उससे पहले देवा अपना हाथ सीधा रत्ना की ब्रैस्ट पर रख के उसे ज़ोर से मसल देता है।
रत्ना, आहह उन्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह।
एक सिसकी रत्ना के मुँह से निकल जाती है।
क्या कर रहा है रे
देवा, कुछ भी नहीं माँ।
रत्ना, देवा का हाथ नहीं हटाती बस मुँह से उसे रुकने के लिए कहती है। रात का नशा अब भी रत्ना की ऑखों में छाया हुआ था।
चुदाई तो ममता की हुई थी मगर चूत रत्ना की सुलग रही थी।
देवा, बहुत नरम है ये।
रत्ना, छोड दे हरामी मेरे हाथों की मार भूल गया तु।
देवा, नही भुला माँ।
वो रत्ना की गर्दन को चुमने लगता है।
रत्ना, बस कर रे । ममता समझ रखा है क्या मुझे।
देवा, ममता तो बड़े प्यार से देती है रात भर। तू तो देख चुकी है माँ।
बस एक बार मुझे ये चखने दे।
देवा रत्ना की साडी के ऊपर से उसकी सुलगती चूत पर हाथ रख देता है।”
चूत पर हाथ पडते ही रत्ना बहक जाती है उसे ऐसे लगता है जैसे किसी ने तपते हुए रेत पर पानी के कुछ क़तरे डाल दिए हो।
रत्ना, नही छोड़ मुझे। मै तेरी बातों में नहीं आने वाली।
ये पाप मै नहीं करुँगी आह्ह्ह्ह।
देवा, माँ शहर से मै दो मंगलसुत्र लाने वाला हूँ।
एक ममता की शादी के लिए और एक तेरे लिये।
रत्ना, ये सुनके देवा को धक्का देके उससे अलग हो जाती है।
क्या बकवास कर रहा है तू होश में तो है।
देवा, लपक के रत्ना का हाथ पकड़ के उसे अपने बेड पर गिरा देता है और उसके ऊपर सवार हो जाता है।
रत्ना, देवा से छूटने की लाख कोशिश करती है मगर देवा की मज़बूत पकड़ से वो निकल नहीं पाती।
देवा, हाँ माँ मै तुम्हें अपनी पत्नी बनाना चाहता हूँ बापु की मौत के बाद तुम बिल्कुल अकेली रह गई हो।
मै तुम्हे अपनी पत्नी बनाकर रात दिन चोदना चाहता हूँ। अगर तुम अपनी मर्ज़ी से हाँ कहती हो तो ठीक है।
वरना मै ज़बर्दस्ती भी कर सकता हूँ मगर अपनी बात से पीछे नहीं हटूँगा। मै बोल देता हूँ।
रत्ना, मैंने तुझे पैदा ही क्यों किया हरामी।
देवा, मुझे पैदा करके तूने बहुत अच्छा किया माँ वरना इस प्यासी चूत का कौन ख्याल रखता।
देवा रत्ना की चूत को साडी के ऊपर से सहलाने लगता है और दूसरे हाथ से रत्ना के निप्पल्स को भी मरोडने लगता है।
रत्ना तडपने लगती है। एक तरफ आज देवा ने वो बात कहा था जो वो खवाब में भी नहीं सोच सकती थी।
वो हैरान थी की देवा में इतनी हिम्मत आई कहाँ से शायद क़सूर रत्ना का ही था।
देवा, आज दोपहर में मै मामा के यहां जा रहा हूँ वापस आने के बाद मुझे तुम्हारा जवाब चाहिए।
सोच लो मेरी पत्नी बनकर चुदवाना चाहती हो या कुछ और फैसला तुम पर छोडता हूँ।
देवा, रत्ना के लरज़ते होठो को चूम के उसके ऊपर से उठके बाहर चला जाता है।
और नहा धोकर अपने मामी देवकी के घर की तरफ अपना ट्रेक्टर बढा देता है।
रत्ना, हैरान परेशान से देवा की बात पर सोचने बैठ जाती है।
उधर जब हिम्मत राव को ये बात पता चलती है की देवा अपने मामा के यहाँ कुछ दिन के लिए गया है।
तो उसे हंसी आ जाती है देवा की किस्मत पर। मगर
अगले ही पल हिम्मत का शातिर दिमाग काम करता है और वो खुद से बात करने लगता है।
हिम्मत, देवा गया है अपने मम्मी के यहां । इसका मतलब रत्ना और उसकी बेटी घर में अकेली होगी।”
अगर विक्रांत जल्दी आ जाये तो दोनों माँ बेटी का काम उनके घर में करवा दूंगा और देवा को रास्ते में ही।

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