Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 60

खुद की बात पर मुस्कराता हुआ हिम्मत हुक्के के कश भरने लगता है।
देवा दोपहर तक अपने मामी देवकी के घर पहुँच जाता है।
देवा दरवाज़ा खटखटाता है।
दरवज़ा कौशल्या खोलती है।
कौशल्या, देवा तुम अचानक से आ गए। आओ अंदर आओ किसी के हाथ से संदेशा भिजवा देते। कैसे हो… बैठो ना।
देवा, हाँ वो ममता के रिश्ते की बात चल रही है तुम्हारे गांव में तो सोचा देख आता हूँ उन लोगों का रहन सहन।
कौशल्या, अरे बहुत अच्छा किया तुमने बहुत याद आ रही थी तुम्हारी।
देवा, सच्ची…… वो कौशल्या की बात पर उसे घुरने लगता है।
कौशल्या, शरमा जाती है अब ऐसे घूरो मत मुझे।
देवा, मामी और रामु कहाँ है कोई दिखाई नहीं दे रहा।
कौशल्या, अपनी नज़रें नीचे ज़मीन की तरफ रख के धीमी आवाज़ में उससे कहती है वो खेत में गए है पांच बजे से पहले नहीं आने वाले।
तूम हाथ मुंह धो लो। मै चाय बनाकर लाती हूँ।
कौशल्या, जैसे ही मुडती है देवा उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड लेता है।
कौशल्या, आह अभी नहीं देवा।
देवा, मैंने तो कुछ किया भी नहीं भाभी।
कौशल्या, भाभी नहीं पत्नी हूँ मै तुम्हारी पतिदेव। ये जो मेरे कोख में पल रहा है ये तुम्हारा ही खून है।
देवा, बहुत याद आ रही थी तेरी भाभी मुझे। जो बात तेरी चूत में है वो कही नहीं दिखती मुझे।
कौशल्या, आहह चूत तो आपको देख कर ही खुश हो जाती है। मेरे सैया अब तुम आ गये हो। जी भर के ले लो मेरी। कोई नहीं रोकेंगा तुम्हें।
देवा, मुँह में ले जल्दी।
कौशल्या, हाँ…
वो नीचे बैठ जाती है और हक़ीकत बात यही थी की कौशल्या दिल से देवा को अपना पति मानती थी।
दुनिया की नज़र में रामु उसका पति था मगर असली ख़ुशी उसे देवा ने ही दिया था।
वो नीचे बैठ के देवा का पेंट उतार देती है और झट से अपने नाज़ुक हाथों में देवा का लंड पकड़ के उसे चुम लेती है।
कौशल्या, हाय्य्य ये मुआ मुझे बहुत तड़पाता है कहके देवा का लंड चूसने लगती है।गल्प गल्प गलप्पप्पप्प।”
देवा, धीरे से मेरी भाभी।
कौशल्या, अब अगर दूबारा भाभी बोलोगे तो काट लुंगी इसे गलप्प गलप्प।
देवा, कौशल्या की कमीज की ज़िप पीछे से खोल देता है। और एक झटके में उससे जिस्म से अलग कर देता है।
कौशल्या अपनी सलवार का नाडा खोल देती है और सलवार नीचे गिर जाती है।
ममता की होने वाली सास जो देवकी के घर के सामने ही रहती थी। उसे देवकी के आँगन में ट्रेक्टर खड़ा दिखाई देता है।
और वो समझ जाती है की रत्ना के यहाँ से कोई आया हुआ है वो दौड़ते हुए देवकी के घर में चलि जाती है।
जैसे ही कोमल देवकी के घर के दरवाज़े पर पहुँचती है उसके पैर रुक जाते है अंदर से आने वाली सिसकियाँ उसे रुकने पर मजबूर कर देती है।
कोमल, दिल ही दिल में सोचने लगती है की अंदर क्या हो रहा है।
वो खिडकी के दरार में से झाँकने लगती है और अंदर का नज़ारा देख उसकी ऑंखें फटी की फटी रह जाती है।।
देवा के लंड को अपने मुँह में लिए और अपनी चूत को देवा के मुँह से चिपकाये कौशल्या सिसक रही थी।
कमल, हाय राम ये क्या देख रही हूँ मैं।
देवर अपनी भाभी के साथ।
मगर अगले ही पल कोमल को दुसरा झटका लगता है जब कौशल्या के हलक से देवा का लंड बाहर आता है।
तकरीबन कलाई के जितना मोटा और साँप के तरह फन वाला देवा का लंड देख कोमल के हाथ पैर काँपने लगते है।
कौशल्या, जल्दी करो जी माँ आती होगी।
देवा, कौशल्या को अपने नीचे लिटा के उसके ऊपर चढ़ जाता है।
कोमल सोच में पड़ जाती है की ये मोटा खुट्टा इस नरम ज़मीन में कैसे जायेगा।
मगर अगले ही पल उसे सारे सवालों के जवाब भी मिल जाते है जब देवा अपनी भाभी की नाज़ुक चूत में एक झटके में अपना लंड पेल देता है।
कौशल्या, माँ मर गई।
एक बार में मत घुसाया करो इसे।
जान ले लेता है आअह्हह्हह्हह।
देवा, मेरे रानी तेरी चूत में रुकता ही नही ए।
कौशल्या, रुकना भी मत अब आह्ह्ह्ह्ह।
बहुत सूखी है मेरी चूत। इसे ठण्डी कर दो जी।
कौशल्या, अपने दोनों पैरों को देवा की कमर से लपेट के कमर उछाल उछाल के देवा से चुदवाने लगती है।
और बाहर खड़ी कोमल की चूत ये देख पानी पानी हो जाती है।
वो जल्दी से वहां से निकल के अपने घर में सीधा बाथरूम में घुस जाती है।
और सलवार नीचे सरककर अपनी चूत को रगडने लगती है उसकी ऑखों के सामने वही देवा का मोटा तगड़ा लंड आ जाता है जो थोडी देर पहले कौशल्या की चूत को भंभोड रहा था।
एक चीख़ के साथ कोमल के चूत से पानी की धार बाहर बहने लगती है।”
कोमल अपनी चूत को पानी से साफ़ करके अपनी साँसें सँभाल कर बाथरूम से बाहर आती है की तभी वो अपनी बेटी प्रिया से टकरा जाती है।
प्रिया, आहह माँ लग गई मुझे।
कोमल, देख कर नहीं चल सकती।
वो प्रिया से नज़रें चुरा कर अपने रूम में घुस जाती है।
उसे अब तक यक़ीन नहीं हो रहा था की किसी मरद का लंड इतना मोटा और इतना बड़ा भी हो सकता है।
अपने पति के लंड से चुदवाने वाली कोमल ने बहुत कम लंड देखी थी अपनी ज़िन्दगी में। मगर जो ज़हरीला साँप उसने आज देखी थी उसे देखने के बाद उसके दिल में बस एक बात घर कर गई थी की उसे भी उस साँप से अपने आप को डसवाना है उसके ज़हर की चंद बूंदें उसे भी अपने शरीर में लेनी है।
इधर देवा कौशल्या की चूत में अपना लावा निकाल कर नहाने चला जाता है जब वो नहा कर बाहर आता है
तो उसे देवकी और रामु कौशल्या के साथ बातें करते हुए नज़र आते है वो भी उनके पास जाकर बैठ जाता है।
देवा ने बस कमर पर टॉवल लपेट रखा था।
उपर से बिलकुल नंगा।
उसकी छाती पर के घुंघराले बाल दूर से चमक रहे थे।
देवकी, देवा को देख मुस्कुरा देती है।
आओ आओ देवा बैठो मै और रामु अभी अभी खेत से आये तो बहु ने बताया की तू आया है।
देवा, हाँ मामी वो तुम तो जानती हो ममता के रिश्ते की बात शुरु है न तुम्हारे पड़ोस में । उसी सिलसिले में आना हुआ।
देवकी, हाँ हाँ अपनी गरज़ है तो चला आया वरना कहाँ तू अपनी मामी को याद करता है।
खाना खाया की नही।
कौशल्या, वहां से उठके अंदर चलि जाती है और रामु देवा के साथ बातें करने लगता है।
देवकी की नज़र देवा के शरीर से हटने का नाम नहीं ले रही थी।
उसकी चूत में चींटियां जैसे रेंगने लगी थी।
देवा था ही ऐसा। एक बार जो देख ले देखता रह जाए और एक बार जो चुदवा ले बस उसकी चूत को फिर किसी और का लंड नहीं भाता था।
रामु और देवा बातें ही कर रहे थे की वहां कोमल और प्रिया आ धमकते है।
देवा, कोमल को देख उठने लगता है।
ताकी शर्ट पहन ले मगर फिर प्रिया को देख वो अपना इरादा बदल के वैसे ही वही बैठ जाता है।
देवकी, अरे कोमल अच्छा हुआ तू आ गई। मै रामु को भेजने ही वाली थी।
देवा आया है आज।
कोमल, एक कातिल नज़र देवा की तरफ डालते हुए
मै देख चुकी हूँ बहुत पहले ही देवा को।
देवकी, कब।
कोमल, अरे बाहर वो ट्रैक्टर खड़ा है ना मुझे तभी लगा की देवा आया होगा।
देवकी, तू खड़ी क्यों है बैठ ना।
प्रिया बेटी तू भी बैठ जा ।
प्रिया और कोमल देवा के सामने वाली चारपाई पर बैठ जाते है।”
देवकी, आँखों के ईशारे से देवा को कपडे पहन कर आने के लिए कहती है मगर देवा टस से मस नहीं होता।
कोमल जिस तरह से देवा से बदन सटा करके आई थी उसके घर से। उस से देवा को एक बात तो पता चल गई थी की कोमल गदराई हुई है। अगर उसे ठीक तरह से पटाया जाए तो बहुत मजा हाथ लग सकता है।
मगर कोमल ममता की होने वाली सास भी थी इसलिए देवा कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था।
वो सोच कर ही आया था की अगर ये रिश्ता पक्का हो जाता है तो वो कोमल को एक बार ज़रूर पेल देगा।
ताकी ममता को अपने ससुराल में कोई परेशान न कर सके। मगर प्रिया को देख उसके मुँह में खट्टा खट्टा पानी भी आ गया था।
कोमल, भाई देवा तुम यहाँ आये हो तो तुम्हें हमारे घर पर ही रहना पडेगा।
देवकी, ऐसा क्यों भला।
कोमल, वो इसलिए की कल को देवा और उसके परिवार वालो को ये न लगे की उनकी बेटी को कोई परेशानी है।
मेरी भी एक जवान बेटी है । मै भी उसके शादी के वक़्त चार पाँच दिन उसकी होने वाली ससुराल रह कर आऊँगी।
जहां बेटी देते है उन लोगों का रहन सहन भी जानना जरूरी है न।
कोमल, देखो देवा मै खुले विचारों वाली औरत हूँ तुम हमारे घर पर रहोंगे उसके बाद अगर तुम्हें ठीक लगे तो
आगे की बात करना वरना नहीं। आखिर तुम अपनी बहन दे रहे हो हमारे यहां क्यों देवकी सही कहा न मैने।
देवा, हाँ हाँ सोलह आने सही।
देवा, ठीक है काकी जैसा आप चाहे । वैसे भी दोनों घर आमने सामने ही तो है जब दिल चाहे यहाँ जब दिल चाहे वहाँ।
रामु, मामी मुझे बहुत ज़ोरों की भूख लगी है।
देवकी, अभी लगा देती हूँ बेटा। कोमल तू भी खाना खा ले।
कोमाल, नहीं नहीं मै खा चुकी हूँ।
कोमल और प्रिया खड़ी हो जाती है।
देवा, कोमल की कमर को ही देख रहा था की कोमल अचानक से देवा की तरफ पलटती है।
रात का खाना हमारे घर पर खाना देवा बेटा।
देवा, हाँ में सर हिला देता है।
और कोमल अपनी बेटी प्रिया के साथ वहां से चली जाती है।”
देवकी, रामु को खाना दे कर देवा के पास चली आती है।
क्यूं रे हरामी क्या सोच कर आया है यहाँ।
कबसे देख रही हूँ दोनों माँ बेटी को घूरे जा रहा है और ऐसे ही नंगा बैठा रहा यहाँ । अरे वो तेरी बहन की होने वाली सास और ननद है। दिमाग जगह पर रख ज़रा।
देवा, मुस्कुराते हुए।
तूम भी न मामी मैंने कुछ किया भी नहीं और तुम हो की बस शुरु हो जाती हो।
देवकी, बहुत अच्छे से जानती हूँ मरदों की जात को मै बेटा। सोचना भी मत ऐसा वैसा वरना रिश्ते से हाथ धोना पड़ेगा और पूरे गांव में बदनामी हो जाएगी हमारी भी।
देवा, देवकी की जांघ पर हाथ रख उसकी चूत के पास सहला देता है।
तेरी चूत का क्या हाल है मामी।
देवकी, श हरामी कही का शुरु हो गया । छोड मुझे बहुत काम है।
देवा, सोच ले मामी मना करेगी तो हाथ भी नहीं लगाऊँगा फिर…
देवकी, मत लगा। तू नहीं लगाएँगा तो मै मर नहीं जाऊँगी। चल हट मेरा बेटा रामु है मेरी देख भाल करने के लिये।
देवा, इधर उधर देखता है और और देवकी के ब्लाउज के नीचे हो चुके ब्रैस्ट को कस के मरोड़ देता है।
देवकी, हाय्य्य्य्य्य्य्य्य्यय्य्य्य रे।
मत कर वो वहां से उठ के रामु के पास चली जाती है।
रात का खाना खाने देवा कोमल के घर चल जाता है।
कोमल, बड़े अच्छी तरह देवा की खातिरदारी करती है। कोमल के पति भी देवा के साथ बैठ कर खाना खाते है।
देवा, कोमल के पति को देख कर सोचने लगता है।
साला ये चूसा हुआ आम किसी बिडी के कारख़ाने का मज़दूर लगता है।
और ये कोमल इसे देख कर लगता है इसे तो इसके जैसे दो भी सँभाल नहीं पाते होगे।
कोमल, दाल ड़ालने झुकती है और अपने आधे से ज़्यादा नंगी ब्रैस्ट देवा के सामने पेश करते हुए कहती है।।
कोमल, लो न देवा बेटा रुक क्यों गए।
देवा, अचानक से अपने ख्यालों में से लौट आता है।
कया हाँ बस बस काकी बहुत खा चूका।
सच में बहुत अच्छा खाना बना है।
कोमल, प्रिया ने बनाया है वो तो मुझे चूल्हे के पास जाने भी नहीं देती।
देवा, उँगलियाँ चाटते हुए प्रिया को देखने लगता है और प्रिया शर्मा कर अंदर चली जाती है।
देवा, अरे ये हरी भाई नज़र नहीं आ रहे।”
कोमल, हरी। अरे वो अपने दोस्तो के साथ शिरडी गया हुआ है एक हफ्ते बाद आयेगा। अगर पता होता की तुम आने वाले हो तो रोक लेती।
देवा, अच्छा कोई बात नहीं बाद में मिल लेंगे।
इधर उधर की बाते करने के बाद कोमल एक रूम में देवा के लिए बिस्तर लगा देती है।
कोमल, देवा तुम यहाँ सो जाओ।
देवा, मैं थोड़ा बाहर घूम के आता हूँ।
मुझे खाना खाने के बाद बाहर घुमने की आदत है।
कोमल, ठीक है जब आ जाओ तो यहाँ सो जाना।
देवा, ठीक है कहकर बाहर निकल जाता है।
रात काफी हो चुकी थी। वो गांव में इधर उधर भी नहीं जा सकता था। काफी अँधेरा था। वो देवकी के घर में जाने लगता है।
उसकी नज़र रामु के रूम की तरफ पडती है।
पुरे घर में अँधेरा था बस रामु के रूम में रौशनी थी।
देवा, दिल ही दिल में सोचने लगता है।
चलो देखते है।
रामू कौशल्या भाभी की कैसे लेता है।
वो दबे पांव रामु के रूम की खिडकी के पास जाकर खड़ा हो जाता है।
जैसे ही वो अंदर झाँक कर देखता है।

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