Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 61

हैरान रह जाता है।
कौशल्या, नीचे ज़मीन पर गहरी नींद में सोई हुई थी और रामु ऊपर बेड पर नंगा लेटा हुआ था।
और उसके लंड पर देवकी झुकी हुई थी।
रामु, हलकी हलकी सिसकारियां भर रहा था।
देवा ने सुबह कौशल्या की इतनी जम कर चुदाई किया था की वो गहरी नींद में जा चुकी थी।
और उसे वैसे भी इन दोनों माँ बेटे के बीच में रहना ज़्यादा पसंद नहीं था।
रामु, माँ धीरे कर।
कितना चुसेगी खड़ा हो गया न अब।
देवकी, गलप्प गलप्प।
दिल नहीं भरा मेरा चुसने दे गलप्प गलप्पप्प।
वो हरामी देवा भी यहाँ आकर किसी काम का नही
गलप्प गलप्पप्प।
रामु: मैं हूँ न तेरा बेटा रामु देख आज तुझे जन्नत की सैर करवाता हूँ माँ।
रामु, देवा को नीचे लिटा कर उसके ऊपर चढ़ जाता है। और देवकी दोनों पैर खोल कर रामु का लंड हाथ में पकड़ लेती है।
देवकी, बहुत दिल कर रहा है बेटा ज़रा अंदर तक घूस्सा दे इसे आहहहह्ह्ह्ह।
रामु, अपने लंड को अपनी प्यासी माँ की चूत की गहराइयों में पहुंचा देता है मगर शायद वो उस जगह तक नहीं जा पाता। जहाँ देवकी के चूत ख़तम होती थी।
अपने मन को मार कर देवकी अपनी कमर ऊपर उठा उठा कर रामु के लंड को अंदर लेने लगती है
और देवा अपने लंड को सहलाता हुआ वहां से वापस कोमल के घर में लौट आता है।”
जब वो कोमल के घर में पहुँचता है तो उसे कुछ खुसुर पुसुर की आवाज़ें सुनाई देती है वो कोमल के रूम में झाँक कर देखता है।
कोमल का पति सिर्फ चड्डी पहने बैठा हुआ था और कोमल अपनी साडी निकाल कर लहँगा खोलने में लगी हुई थी।
कोमल का पति ‘, क्या बात है आज तो बिना बोले सब उतार रही है।
कोमल, धीरे बोलो घर में मेहमान है।
कोमल, अपना लंहगा उतार कर अपने पति के पास आकर बैठ जाती है और उसकी
चड्डी उतार कर उसका मुर्झाया हुआ लंड हाथ में लेकर हिलाने लगती है।
ये कभी जल्दी खड़ा नहीं होता।
कोमल का पति , मुँह में ले कर चूस न अभी खड़ा हो जायेंगा।
कोमल झुकती है और अपने पति के लंड को मुँह में लेकर पूरा का पूरा अंदर खीच लेती है गलप्प गलप्प्प चूसने लगती है।
कोमल, सुनो जी आज जल्दी मत निकाल देना तुम्हारा पानी।
कोमल का पति , तू चिंता मत कर।
वो कोमल की दोनों टाँगें खोल कर अपना लंड उसकी चूत पर घीसने लगता है और उसे कोमल के बड़े से सुराख़ में उतार देता है।
कोमल के चेहरे को देख कर देवा समझ जाता है की कोमल की चूत में लंड जाने से उसे कोई खास फ़र्क़ नहीं पडा।
कोमल अपने एक हाथ से चूत के दाने को मसलने लगती है और उसका पति हाँफता हुआ अपनी कमर को आगे पीछे करने लगता है।
और कुछ ही देर में वो अपना पानी कोमल की चूत के ऊपर निकाल के एक तरफ निढाल सा लेट जाता है।
कोमल दिल ही दिल में अपने पति को गालियां देते हुए ऑंखें बंद कर लेती है।
उसका पानी अब भी नहीं निकला था वो ऑखें बंद करके देवा के लंड के बारे में सोचने लगती है।
और उसे ऐसे लगता है जैसे देवा कौशल्या को नहीं बल्कि उसके दोनों पांव खोल कर चोद रहा है
वो चरम पर पहुँच जाती है और ढेर सारा पानी कोमल की चूत से बहता हुआ जांघो से नीचे बहने लगता है।
देवा, अब भी वही खड़ा सब देख रहा था।
कोमल ऑंखें खोलती है और उसकी नज़र भी दरवाज़े की तरफ चली जाती है देवा वहां से खिसक जाता है और अपनी जगह आकर लेट जाता है।
कोमल के चेहरे पर एक मुस्कान सी फैल जाती है।
तकरीबन दो घंटे बाद।
देवा गहरी नींद में सोया हुआ था।
तभी उसे अपने पांव पर कुछ गीला गीला सा महसूस होता है।
वो धीरे से ऑखें खोल कर देखता है।
कोमल उसके पांव के पास बैठी देवा के पैर का अंगूठा मुँह में लिए चूस रही थी कोमल की ऑंखें बंद थी।
देवा, कौन।
कोमल, घबरा कर वहाँ से दबे पांव अपने रूम में चली जाती है।
और देवा सोचने लगता है।
बहुत जल्द ये चिडीया जाल में फँस जाएगी”
देवा की रात बहुत मुश्किल भरी रही।
सुबह चिडयों की चहचहाहट से देवा की आँख खुलती है वो हाथ मुँह धोकर नहाने के लिये अपनी मामी देवकी के घर की तरफ जाने लगता है तभी कोमल उसे आवाज़ देकर रोक देती है।
कोमल, अरे देवा कहाँ जा रहे हो।
देवा, वो काकी नहाने जा रहा था मामी के यहाँ।
कोमल, लो कर लो बात ये भी तो तुम्हारा घर है चलो आ जाओ मैंने पहले ही तुम्हारे लिए पानी गरम करके रखी हूँ जल्दी से नहा कर नाश्ता कर लो।
देवा, मगर काकी मेरे कपडे वहां है।
कोमल, तुम नहाने बैठो तो ।कपडे मै ले आती हूँ।
देवा, कुछ नहीं कहता और कोमल के रूम में बने बाथरूम में घूस जाता है वहां पहले से एक बॉकेट में गरम पानी था।
देवा, को अजीब सा महसूश हो रहा था इससे पहले वो कभी किसी बाहर के लोगों के घर में नहाया नहीं था।
वो दरवाज़ा बंद करके अपने कपडे निकल लेता है और नहाने लगता है।
जब वो अपने लंड पर साबुन लगाता है तो उसके जिस्म में सरसराहट सी होने लगती है।
साबून से भिगे हाथों में जब चिकना देवा का लंड आता है तो वो खुद बा खुद आगे पीछे होने लगता है।
देवा, कभी मुठ नहीं मारता था जब उसे चूत नहीं मिलती थी तो वो अपने दोस्त पप्पू के हाथ से मालिश करवाकर उसकी पीछे से लेता था।
मगर न जाने आज क्यों उसे अपने लंड को साबुन लगाकर उसकी मालिश करने में बहुत मजा आ रहा था।
वो अपनी ऑखें बंद कर लेता है।
की तभी उसे प्रिया की आवाज़ सुनाई देती है।
प्रिया, माँ वहां क्या कर रही हो।
कोमल, दरवाज़े के दरार में से अंदर झाँक रही थी।
उसकी नज़रें देवा के लंड पर टीकी हुई थी जब उसे प्रिया किचन में से देख कर आवाज़ देती है।
कोमल, उसे चुप रहने के लिए कहती है और तेज़ क़दमों से प्रिया के पास चली जाती है।
कोमल, वो मै देख रही थी की देवा ठीक से नहा रहा है की नही।
उसे उस वक़्त दुसरा कोई जवाब नहीं सूझता।
प्रिया भी जवान लौंडिया थी हालाँकि वो कुँवारी थी मगर इतनी बडी तो वो भी हो गई थी की गीली डण्डे का खेल खेल सके।
देवा नहा कर बाहर आता है और प्रिया उसे नाश्ता देकर सामने रोटिया बनाने लग जाती है।
जब से देवा यहाँ आया था प्रिया की उससे कुछ खास बातचीत नहीं हुई थी।
प्रिया एक खूबसूरत लड़की थी।
जवानी खिल कर उभरी थी उस पर।”
अपनी ज़िन्दगी के वो उस दौर से गुज़र रही थी जब एक मरद की निगाह भी लड़की की चूत को गीला करने के लिए काफी होती है और देवा की जानलेवा निगाहें उसी पर टीकी हुई थी।
उसका ध्यान रोटी बेलने में कम और अपनी चूत को सुलाने में ज़्यादा लगा हुआ था।
देवा, नाश्ता ख़तम कर लेता है।
प्रिया, और दुं।
देवा, नहीं अभी नहीं चाहिए।
बाद में लूंगा।
प्रिया, बुरी तरह सकपका जाती है।
देवा, उठके सीधा देवकी के घर चला जाता है।
देवकी के घर में सन्नाटा पसरा हुआ था।
देवा, मामी मामी कहता हुआ अंदर तक चला जाता है मगर उसे कोई नज़र नहीं आता। वो देवकी के रूम में चला जाता है।
उसे देवकी अपने बेड पर बैठी बाल संवारती हुई नज़र आती है।
वो शायद अभी अभी नहा कर बाहर आई थी।
देवा, क्या बात है मामी घर में कोई नज़र नहीं आ रहा।
देवकी, रामु और बहु तेरे मामा के साथ खेत में गए है।
आज गन्ने की कटाई है इसलिए। क्यों तुझे किसी से काम था।
देवा, वही देवकी के क़दमों में बैठ जाता है।
मुझे तो अपनी मामी से ही काम है।
देवकी, चल हट बड़ा आया
जा न तेरे नए रिश्तेदारों के पास। यहाँ क्यों आया है।
देवा, अरे बाप रे मामी तुम ग़ुस्से में बडी प्यारी लगती हो।
बात क्या है क्यों मुँह फुला कर बैठी हो।
देवकी: मैं कौन होती हूँ मुँह फुलाने वाली।
मुझे बहुत काम है जाने दे मुझे।
देवा, देवकी का हाथ पकड़ लेता है अभी नही।
देवकी, चल जा बाबा तेरी बहन की सास तेरा रास्ता देखती होंगी हम क्या है।
देवा, मामी।
मुझे भूख लगी है।
देवकी, क्यूँ कोमल ने नाश्ता भी नहीं दिया तुझे।
देवा, नाश्ता तो मै कर चुका हूँ बस मुझे दूध पीने का बड़ा मन कर रहा है।
देवकी, जा जाकर पी ले पतीले में रखा है।
देवा, नहीं न मामी समझा करो न। मुझे यहाँ से दूध पीना है।
वो देवकी की एक ब्रैस्ट को पकड़ के उसे मसलते हुए कहता है।
देवकी, कोई दूध नहीं मिलेंगा तुझे। चल है सब पता है मुझे एक बार भी सीधे मुँह बात नहीं किया तूने मुझसे।
देवा, उठके देवकी की बगल में बैठ जाता है और अपना सर देवकी के गोद में डाल देता है।
देवकी, क्या कर रहा है कोई आ जायेंगा।
देवा, आने वाली की माँ के चूत।
दूध पिलाती हो के नही। अभी बोलो।
देवकी मुस्कुरा देती है।
नही कहूँगी तो तू मानेगा थोड़े।
चल मुँह खोल।
देवकी अपनी ब्लाउज निकाल के ब्रा निकाल देती है और देवा अपना मुँह खोल देता है।”
देवकी, आहह देवा बहुत याद आती है रे तेरी।
उन्हह धीरे मसल उसे बेटा उन्हह आह्ह्ह्ह।
देवा, मुझे भी तेरी बहुत याद आती है मामी।
गलप्प गलप्प।
देवकी, कल रात तेरे भाई ने सारा बदन गरम कर दिया मेंरा। उन्हह देवा ।काट मत ना।
देवा, मेरा लंड भी तेरी चूत की याद में तडपता रहा मामी।
देवकी, दोनों का मिलन करवा दे बेटा। अकेली है तेरी
मामी आज भोग लगा दे मुझे उसको पीछे से आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा, अपने कपडे निकल देता है और रास लीला में तडपती देवकी भी अपने सारे कपडे निकाल के फ़ेंक देती है।
देवा, मेरे चेहरे पर आकर बैठ जा देवकी।
देवकी, अपने दोनों पैर खोल कर अपनी चूत देवा के मुँह के सामने ले आती है और देवा अपनी मामी की चूत पहले सूँघता है और फिर उस पर टूट पड़ता है गलप्प गलप्प करके पूरा चाटने लगता है।
देवकी, बेटा तेरा जवाब नहीं तेरे जैसा लंड मैंने नहीं देखा न तेरे जैसा चोदने वाला देखी नहीं।
आहह मेरे लाल क्या चुसता है तु।
उन्ह माँ मेरी चूत आह्ह्ह्हह्ह।
देवा, अपनी एक ऊँगली देवकी की गाण्ड में घूस्सा कर उसकी चूत के अंदर तक अपनी ज़ुबान घुसाता चला जाता है।
और अंदर तक देवकी की चूत चाट चाट कर लाल करने लगता है।
देवकी की दोनों टाँगें काँपने लगती है बदन ऐठने लगता है। उसे समझ नहीं आता क्या करे। वो देवा के चेहरे से उतरना चाहती है मगर देवा दोनो हाथों से उसकी कमर पकड़ लेता है और नीचे से ऊपर तक देवकी की चूत और गाण्ड चाटने लगता है।
देवकी, बस कर देवा।
बस मेरे बच्चे अपनी मामी के अंदर घुस्स जा जल्दी
उन्ह मत तड़पा मुझे आह्ह्ह्ह।
सुखी ज़मीन पर बारिश कर दे बेटा।
देवा का लंड तो कल रात से दहाड़ रहा था। वो देवकी को लिटा देता है और दोनों पैरों को हाथ में पकड़ के उसे खोल देता है।
अपने लंड को देवकी की चिकनी चूत पर रगड के वो उसे और गीला करता है।
और बिना देवकी को बताये गप्प करके
अपना पूरा का पूरा लंड देवकी की चूत के अंदर तक घूस्सा देता है।”
एक ख़ौफ़नाक चीख़ देवकी के मुँह से निकलती है।
मर गयी हरामी आह्ह्ह्ह।
देवा, अभी कहा से मरेंगी तू साली अभी कुछ किया भी नहीं मैंने तो…..
देवा अपने लंड को सुपाडे तक बाहर खीचता है और फिर से उसे देवकी की चूत को चीरता हुआ अंदर तक आगे पीछे करने लगता है।
जहां रामु पहुँच भी नहीं पाता था। उस सरहद के पार जा कर अपने नाम का परचम लहराने वाला देवा का वो मज़बूत लंड देवकी की चूत को अंदर तक चीर के रख देता है।
देवकी, आहह मार ड़ालता है तू अपनी मामी को हर बार।
हर औरत देवा के लंड के लिए तरसती थी मगर जब वही लंड चुत में पेला जाता तो वही औरत पनाह भी मांगती थी।
वही हाल देवकी का भी था। रात से देवा के लंड के लिए तडपने वाली देवकी की साँस रुक रुक के चलने लगती है। हर धक्का जानलेवा लगता है उसे।

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