Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 62

वो चिखना चाहती है मगर उसके चीख़ निकलने से पहले देवा अगला धक्का देकर उसकी चीख़ को हलक के अंदर ही दबा देता है।
देवा, मामी तेरी चूत में जो बात है वो किसी की चूत में नहीं भाभी में भी नहीं आह्ह्ह।
देवकी, जानती हूँ तुझे बड़े गाण्ड वाली औरतें पसंद है बहुत बड़ा गांडु हैं तू।
तू पता नहीं कितनो की गाण्ड मार चुका है।
आह हरामी धीरे कर ना।
देवा, तेरी भी लुँगा साली चिंता क्यों करती है।
दोनो मामी भांजे एक दूसरे से चिपक कर एक दूसरे के होठो को चुमते हुए अपने रास लीला में लगे हुए थे। इस बात से अनजान की कोई खिडकी के बाहर खडा
उन दोनों की बातें भी सुन रहा है और उन दोनों को देख देख कर अपनी चूत भी गीला कर रहा है।
कोमल देवा के गीले कपडे देने देवकी के घर आई थी मगर अंदर का नजारा देख उसके पांव रुक जाते है और वो सोच में पड़ जाती है की एक आदमी मम्मी और भाभी दोनों को कैसे चोद सकता है।
देवकी, की वो बात की तुझे बड़े गाण्ड वाली औरतें पसंद है कोमल के कानों में घुमने लगती है और वो वहां और देर तक रुक नहीं पाती। धीमे धीमे कदमो से वो अपने घर में लौट आती है और सीधा जा कर अपने बिस्तर पर उल्टा लेट जाती है।”
उधर हवेली में हिम्मत राव रात से ग़ायब था उसके जुआ खेलने और शराब पीने की आदत से रुक्मणी और रानी दोनों परेशान थी।
जहां एक तरफ हिम्मत रानी को वक़्त नहीं दी पा रहा था वही दुसरी तरफ बिंदिया की चूत में पड़े रहने से रुक्मणी अंदर ही अंदर घूटते जा रही थी।
सुबह जब हिम्मत नशे में धुत हवेली आता है तो रानी और रुक्मणी उसे सहारा देकर रूम में ले जाती है।
रानी, बापू क्या हालत बना रखा है तुमने कुछ तो हमारी और अपनी इज़्ज़त का ख्याल रखो।
रुक्मणी, इन्हें बोलने का कोई फायदा नहीं बेटी।
ये किसी की बात नहीं सुनेंगे।
हिम्मत, नशे में।
हाँ नहीं सुनूंगा मैं…..
तेरे बाप के पैसों की नहीं पीता साली जो तेरा सुनू मै। चलो निकलो दोनों के दोनो यहाँ से।
रानी, बापू माँ से ठीक से बात किया करो तुम।
हिम्मत, अच्छा अब तू मुझे सिखाएगी कैसे बात की जाती है साली छिनाल।
रानी, होश में तो हो तुम क्या कह रहे हो।
हिम्मत, हाँ हाँ मै होश में हूँ छिनाल है तू देवा की।
देवा के साथ सब कुछ कर चुकी है ना तू हरामज़ादी। निकल जा मेरे रूम से अभी के अभी वरना…..
रानी, वरना क्या ये घर मेरा भी है।
हिम्मत, अच्छा तेरा नहीं मेरा है।
तूम दोनों सालियां ऐसे नहीं सुधरेंगी अभी बताता हूँ।
वो एक लकड़ी उठा लेता है और सटा सट रानी की जांघ पर कमर पर लकड़ी से मारने लगता है।
रुक्मणी, बीच बचाव करती है और रानी को अपने साथ अपने रूम में ले आती है।
हिम्मत, वही नशे में बेड पर गिर जाता है।
साली छिनाल है तू देवा की। देवा की छिनाल है।
रुक्मणी, रानी को अपने रूम में ले आती है और रूम अंदर से बंद कर लेती है।
रानी रोने लगती है।
रुक्मणी, बस रानी रोते नहीं तू जानती है ना अपने बापु को।
ये सब वो नहीं कर रहे। वो बिंदिया करवा रही है उनसे बस कर चुप हो जा।
रानी, माँ मुझे माफ़ कर दो मै हमेशा तुम्हें गलत समझती थी।
मगर मै जान गई हूँ की तुम निर्दोष हो मुझे माफ़ कर दो माँ।
रुक्मणी, हाँ हाँ मैंने तुझे माफ़ कर दिया। चल अब चुप हो जा।
चल लेट जा मै तुझे मरहम लगा देती हूँ।
रानी सिसकते हुए लेट जाती है और रुक्मणी बेड पर उसके पास आकर बैठ जाती है।”
रुक्मणी रानी के पास आकर बैठ जाती है। बिटिया तुम लेट जाओ मै तुझे मरहम लगा देती हूँ। आराम मिलेगा। रानी, माँ मरहम सिर्फ ज़ख़्म पर काम करता है जो दर्द दिल में है उसका क्या। रुक्मणी, मैं समझी नहीं रानी। रानी, माँ बापू बहुत ख़राब इंसान है मुझे नफरत होने लगी हैं उनसे अब। रुक्मणी, बस बेटी वो तेरे बापु है। जैसे भी हैं मेरे पति है और मेरे माँ बाबा ने मुझे एक ही सिख दे कर यहाँ भेजे थे की चाहे इस घर से मेरी अर्थी निकले पर मै अपना पत्नी धर्म निभाऊँ। तू और परेशान न हो लेट जा। रानी, बेड पर उल्टा लेट जाती है। रुक्मणी, कहाँ दर्द हो रहा है बेटी। रानी, कमर में और यहाँ जांघ पर भी लगा है। रुक्मणी, तू सलवार उतार दे और ये कुर्ती भी। रानी, माँ मैं…. रुक्मणी, अरे पगली तू मेरी बच्ची है एक। यहाँ तेरे मेरे सिवा और है भी कोई नही। मुझसे कैसी शरम। रानी, एक पल के लिए खामोश हो जाती है और फिर मुस्कुराते हुए अपनी सलवार और उपर का कुर्ता निकाल के बेड के एक तरफ रख देती है वो पेंटी और ब्रा में बेड पर लेट जाती है। रुक्मणी, हाथ में मरहम लेकर धीरे धीरे रानी के पेट पर लेप लगाने लगती है। दोनो औरतें बेचैन भी थी और बेक़रार भी। जहां एक रानी थी जिसे देवा चोद चूका था वही रुक्मणी थी जो अपने बदन की आग में दिन रात जल रही थी। पति का सुख उस बेचारी को मिल नहीं पाया था और देवा था जीसने उसके तन बदन में एक ऐसी आग लगा दिया था जिसका इलाज सिर्फ और सिर्फ देवा के पास था । मगर वो बेरहम अभी और सितम ढाने वाला था। रानी, अपनी ऑंखें बंद कर लेती है। नाजुक कोमल मख़मली हाथ जैसे जैसे रानी के पेट से होते हुए ऊपर और नीचे कमर की तरफ बढ़ने लगते है। वैसे वैसे रानी मदहोश होने लगती है। अभी तक उसकी मन में अपनी माँ को लेकर कोई गलत बात नहीं थी। मगर ना जाने क्या था रुक्मनी के हाथों में उसकी हथेली की तपीश पाकर रानी बेचैन सी होने लगती है और हलकी हलकी सिसकारियां भरने लगती है। उसकी सिसकारियाँ रुक्मणी को भी सुनाये दे रही थी मगर माँ होने के नाते वो अपनी सीमा जानती थी। रुक्मणी, रानी इसे निकाल दे। वरना ये ख़राब हो जायेगा।

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