Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 63

रानी, हाथ पीछे ले जाकर अपना ब्रा का हुक खोल देती है। माँ इसे भी निकाल दो वरना ये भी गन्दी हो जाएगी मरहम से। रानी का इशारा अपनी पेंटी की तरफ था। रानी ने ऐसी बात कही थी जिसे सुनकर एक तरफ रुक्मणी का दिल जोर से धड़का था और दूसरी तरफ उसके हाथ काँपने लगे थे। रुक्मणी, कांपते हाथों से रानी की पेंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगती है। जैसे जैसे पेंटी नीचे होते जाती है। कमर के उभार रुक्मणी की ऑखों के सामने आते चले जाते है । रुक्मणी की नज़रें रानी की कमर से हटने का नाम नहीं ले रही थी। रानी, अपनी दोनों टाँगें थोड़ा खोल देती है जिससे उसकी गाण्ड की सुराख़ और चूत की दरार पीछे से रुक्मणी को नज़र आने लगती है। इससे पहले रुक्मणी ने कभी भी किसी जवान लड़की की चूत को इतने क़रीब से नहीं देखी थी। एक वासना भरी आवाज़ रुक्मणी की चूत से निकलती है और उसके हाथ खुद ब खुद रानी की कमर को दोनों हाथों में जकड लेते हैं। रानी, माँ सीईईईईईइ। रुक्मणी, एक बात पूंछूं। रानी, हाँ माँ पुछो ना। रुक्मणी, तेरे बापू तुझे देवा की रांड क्यों कह रहे थे। क्या देवा ने तुझे छुआ है। रानी, हाँ उसने मुझे छुआ है। रुक्मणी, कहाँ कहाँ। रानी, जहाँ तुम छु रही हो । कमर पर। रुक्मणी की उँगलियाँ रानी की गाण्ड के सुराख़ को सहलाने लगती है। और उँगलियों का कुछ हिस्सा चूत के लिप्स को भी छूने लगता है। रानी, आहह माँ। रुक्मणी, बोल और कहाँ…. रानी पीठ के बल लेत जाती है और रुक्मणी के हाथों को अपनी चूत के ऊपर रख देती है। यहाँ अंदर तक आह्ह्ह्ह। रुक्मणी की हालत उस वक़्त तक बहुत ख़राब हो चुकी थी अपनी बेटी के साथ ऐसी नंगी बातें करने से उसकी चूत में बस एक इच्छा बन रही थी की कुछ भी कोई भी चीज़ उसकी चूत के अंदर जाए।
रुक्मणी, रानी के ऑंखों में देखते हुए अपना अँगूठा रानी की चूत में डाल कर उसको आगे पीछे करने लगती है। रानी, माँ आह्ह्ह क्या कर रही हो आह्ह्ह्ह। रुक्मणी, तू सच में छिनाल है रानी। रानी, हैं माँ मै हूँ छिनाल देवा की। उसने मुझे हर तरह से चोदा है मेरी चूत मारी है। दिन दिन भर मेरी गाँड भी मारा है आहह धीरे माँ। मुझे पता है माँ तुम भी देवा से प्रेम करती हो। रुक्मणी, ये तू क्या कह रही है रानी। रानी, हाँ माँ मैंने देखा हूँ तुम्हारी ऑखों में देवा के लिए प्यार। रुक्मणी खामोश रह जाती है। और रानी अपना हाथ बढा कर रुक्मणी की चूत को सलवार के ऊपर से सहलाने लगती है। रुक्मणी, आहह मत कर रानी मै आअह्हह्हह्हह। नही ना। रुक्मणी से रहा नहीं जाता और वो रानी की ऑखों में देखते हुए अपना कमीज भी निकालने लगती है। उसने अंदर कुछ नहीं पहनी थी। चूत के आग अब दिमाग तक पहुँच चुकी थी। यही होता है जब किसी जवान चूत से लंड दूर रखा जाए या चुत को लंड में एक बार नहलाकर उससे फिर उसे तडपाया जाए। यही हाल दोनों का था वो भूल चुकी थी की वो रिश्ते में माँ और बेटी है। रुक्मणी भी नंगी हो चुकी थी और रानी भी। रानी अपनी माँ को अपने ऊपर खीच लेती है और दोनों एक दूसरे की ऑखों में देखते हुए अपनी अपनी ऑखें बंद कर लेते है। दोनो की साँसें एक दूसरे के क़रीब महसूस होने लगती है और धीरे धीरे रुक्मणी के सुलगते हुए होठो पर रानी अपने रसीले होंठ रख देती है। दोनो एक दूसरे को बाहों में कस के जकड लेती हैं। रुक्मणी की आंखों में देवा समाया हुआ था और रानी की ऑखों में देवा का लहराता हुआ लंड। दोनों एक दूसरे की चुत पर चूत घीसने लगती है और चूचि पर चूचि। माँ बेटी का मिलाप ऐसा था की कोई देख ले तो बस यही कहे की दो प्रेमी प्यार की आग में जल रहे हैं। रुक्मणी, रानी देवा का कैसा है। रानी, बहुत बड़ा है माँ मेरी चूत चीर के रख देता है ओ ज़ालिम आहहह्ह्ह्ह।
रुक्मणी, मुझे कब चोदेगा देवा आह्ह्हहह रानी और अंदर नही। रानी की तीन उँगलियाँ रुक्मणी की चूत में घुस चुकी थी लंड के लिए तरसने वाली रुक्मणी के लिए ये बहुत थी। उसकी कमर ऊपर नीचे होने लगती है । रानी की ऊँगलियाँ इतने तेजी से आगे पीछे अंदर बाहर होने लगती है की रुक्मणी चीख पड़ती है मगर ठीक वक़्त पर रानी अपने मुँह में रुक्मणी का मुँह लेकर उसकी आवाज़ को अपने अंदर समा लेती है। रुक्मणी, आहह रानी मेरी चूत आह्ह्ह्ह्ह्ह। उसका कुछ कर बेटी कुछ कर ना रे….. रानी, अपनी माँ को बेड पर लिटा कर उसके ऊपर चढ़ जाती है और धीरे धीरे ब्रेस्ट को चुमते हुए पतले नाज़ुक पेट से होते हुए चूत तक पहुँच जाती है। जैसे ही रानी अपनी ज़ुबान बाहर निकाल कर रुक्मणी की चूत पर लगाती है रुक्मणी बेहोश होने लगती है। रुक्मणी, आहह मर गयी उईईईईई माँ…. आह नही बस नही। वहाँ नही ना। रानी अपनी ज़ुबान को रुक्मणी की रसीली चूत के अंदर तक डाल कर क्लाइटोरिस को हल्के हलके दाँतो से काटने लगती है । रुक्मणी दोनों हाथों से रानी के सर को पकड़ लेती है और कमर को ऊपर नीचे पटकने लगती है । उसके मुँह से बस यही निकलता है। रुक्मणी, छोडो मुझे रानी बिटिया छोडो मुझे। आह चाट चाट कर काट खाओ मेरे चूत को आहह माँ मेरी चूत में ये क्या हो रहा है। वो रुक्मणी जो शायद भूल ही गई थी की उसके पास एक खूबसूरत चूत भी है। आज पहली बार कई सालों के बाद ऐसा महसूस कर रही थी। जैसे उसे पंख निकल आये हो और वो ऊँचे आकाश में उड़ रही हो। उसके ऑखें बंद हो जाती है जिस्म ऐंठते जाती है और कमर तेज़ रफ़्तार से ऊपर नीचे होने लगती है। एक चीख़ मुँह से निकलती है और रुक्मणी अपनी बेटी रानी के मुँह पर अपना नमकीन पानी छोडने लगती है। रानी, एक एक कतरा पीती चली जाती हैं गलप्प गलपप। वो पानी इतना ज़्यादा था की रानी का पूरा चेहरा भीग जाता है। रुक्मणी रानी को अपने ऊपर खीच लेती है और उसके चेहरे को चाटने लगती है। रुक्मणी, तूने मुझे वो सुख दिया है रानी जो मै शायद भूल ही गई थी। गलप्प मेरी बच्ची तेरा बहुत बहुत शुक्रिया गलप्प।
इधर गांव में ही शालु के घर उसकी बेटी रश्मि अपने ससुराल से सुबह आ चुकी थी। सुबह से पप्पू अपनी बहन को ताड़ रहा था और ये बात रश्मि भी जानती थी। वो दोनों तो बस अकेले रहने का मौका ढूंढ़ रहे थे। रात का खाना खाने के बाद पप्पू अपने रूम में सोने चला जाता है और रश्मि नीलम के साथ बातें करने बैठ जाती है। शालु, अपने काम जल्दी जल्दी निपटाकर पप्पू के रूम में चली जाती है। पप्पू अपने बेड पर नंगा लेटा हाथ में लंड पकडे उसे रश्मि के नाम से हिला रहा था उसकी आँखे बंद थी और ध्यान में सिर्फ रश्मि छाई हुई थी। शालु रूम के अंदर चलि आती है उसके आने से पप्पू ऑंखें खोल देता है। शालु मुस्कुरा देती है अरे बाप रे तू बड़ा बेसब्र हो रहा है आज कल। पप्पू, माँ तुम…… शालु, क्यूँ कोई और आना चाहिये था क्या। पप्पू, नहीं वो तो….. शालु, अरे इसे क्यों छुपा रहा है बता मै इसे ठीक करती हूँ वो पप्पु के लंड को हाथ में पकड़ती है और गलप्प गलप्प्प जल्दी से उसे अपने हलक में उतार देती है। रश्मी, पानी पीने के लिए किचन में आती है मगर उसे पप्पू के रुम से सिसकारियों की आवाज़ सुनाई देती है। उसे लगता है के पप्पू मुठ मार रहा है। वो धीरे धीरे दबे पांव चलते हुए पप्पू के रूम में चलि जाती है और जाते ही उसके मुँह से चीख़ निकल पडती है। रश्मी, माँ…… शालु और पप्पू घबरा कर उसकी तरफ देखते है।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *