Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 64

रश्मी की आवाज़ सुनके पप्पू और शालु घबरा कर उसकी तरफ देखते है। रश्मी, माँ क्या कर रही हो तुम। शालु, बेटी वो मै यहाँ पानी देने आई थी। मै नीलम को देख कर आती हूँ। वो झट से वहां से बाहर निकल जाती है। रश्मी, और तुम भइया माँ के साथ। पप्पू, अब बस भी कर बड़ी सती सावित्री के जैसी बातें कर रही है। मेरा ख़ास काम बनने वाला था क्या ज़रूरत थी अंदर आने की। रश्मी, बेशरम तुम जानते भी हो क्या कह रहे हो। पप्पू, रश्मि का हाथ पकड़ के उसे अपने पास खीच लेता है। हाँ जानता हूँ मै क्या कह रहा हूँ और क्या करने जा रहा था। माँ को चोदने जा रहा था मेरी बहना। रश्मी, नीचे से ऊपर तक पप्पू को देखने लगती है। पर भैया माँ इस सब के लिए राजी कैसे हो गई। पप्पू, सब देवा का किया धरा है उसी ने माँ को ऐसे बना दिया है। माँ मुझसे चुदती है मगर याद देवा को करती है। देखा न माँ के मुँह में कैसा उछल रहा था मेरा लंड। रश्मी, मुस्कुराते हुए पप्पू का लंड पकड़ लेती है। ये माँ की सवारी भी करता है। पप्पू, हाँ रश्मि बहुत चुदकड़ है माँ। तू नहीं जानती एक साथ दोनों तरफ से चाहिए उसे। रश्मी, देवा भी न। पहले मुझे जवान किया और अब मेरी माँ को। रश्मी अपनी नाज़ुक हाथों में पप्पू का चप्पु लेकर सहलाने लगती है। पप्पू, आह्ह। रश्मी माँ तो चली गई अब तेरे भैया का ख्याल कौन रखेंगा। रश्मी, भैया का ख्याल मै रखुंगी। पप्पू, तो रख न। मेरी बहना। रश्मी, पप्पू के लंड की तरफ झुकती चली जाती है। गलप्प गलप्प। पप्पू भइया। बहुत याद आती थी मुझे घर की गलप्प गल्लपप पप्पू, मुझे भी तेरी बहुत याद आती थी रश्मि आह धीरे मेरी बहना आह्ह्ह्हह।
पप्पू, रश्मि की सलवार का नाडा खोल देता है। और पेंटी के साथ सलवार भी कमर से निकाल देता है। रश्मी के मुँह में पप्पू का छोटा सा लंड आगे पीछे होने लगता है और इधर पप्पू की उंगलिया अपनी बहन की चूत में हलचल मचाने लगती है। जैसे जैसे पप्पू की ऊँगली रश्मि की चूत में आगे पीछे जाती है रश्मि के मुँह में पप्पू के लंड की पकड़ बढ़ती जाती है। पप्पू, मेरी बहन आह्ह्ह। लगता है तेरा पति तुझे ठीक से नहीं करता आह्ह्ह्ह। रश्मी, करता है भाई मगर बहुत जल्दी हार मान जाता है। गलप्प उस में वो बात कहाँ जो देवा में और तुम में है। गलप्प गलप्प आज तक उसके करने से मै वैसी गीली नहीं हो पाई जैसे तुम्हारे और देवा के करने से हो जाती हूँ गलपप गलप्प्प। पप्पू, बस अब रुक जा वरना तेरे मुँह में मेरा माल निकल जाएगा। पप्पू, रश्मि को लिटा देता है और उसके ऊपर के कपडे भी निकाल कर निप्पल्स को मुँह में लेकर चुसने लगता है गलप्प गलप्पप्प। रश्मी की चूत पर पप्पू अपना लंड घीसने लगता है और निप्पल चुस्ने से उसके तन बदन में जो आग बढ़ रही थी पप्पू को डर था की वो उसे पूरी तरह बुझा पाएगा भी या नही। वो निप्पल्स को चुसते हुए फिर से अपनी दो उंगलियाँ रश्मि की चूत में डाल देता है। रश्मी, आहह हरामी हाथ कहाँ डाल रहा है वहां लंड है ना तेरे पास उसे मेरी चूत में डाल न आहह। कहते है शादी के बाद लड़की भाई से भी बड़ी हो जाती है यही हाल रश्मि का भी था। अपने भाई के सामने सर न उठाने वाली रश्मि आज उसे खुलेआम गालिया दे रही थी और हैरत की बात तो ये थी की पप्पू को भी उसके मुँह से गालिया पसंद आ रही थी। देवा जब भी पप्पू की गाण्ड मारा करता था। वो उसे गंदी गंदी गालिया दिया करता था। आज जब रश्मि उसे गालिया देती है तो पप्पू के सोये गाण्ड में से आवाज़ से आती है और देवा का वो कोहराम मचा देने वाला लंड उसे फिर से याद आ जाता है।। पप्पू, हाँ छिनाल जानता हूँ तुझे लंड चाहिए ले अभी ड़ालता हूँ तेरे ओखली में। वो रश्मि की दोनों टाँगें चौडी करके उसके बीच में आ जाता है और अपने लंड को रश्मी की चूत पर टीका कर सट से अंदर घूस्सा देता है।
जहां इससे पहले सबल घूस्सा हो वहां सुई की चुभन से क्या होने वाला था। देवा ने अपने लंड से रश्मि की चूत को वहां तक खोल दिया था। पप्पू की लूल्ली का उस पर कोई असर नहीं हो रहा था। रश्मी, आहह भैया तुम्हारी लूल्ली में दम नहीं है पता नही। नुतन का क्या होगा उसे भी देवा के नीचे सुला देना । पप्पू, साली छिनाल बहुत मस्ती चढ़ी है ना तुझे। तो ले…… शायद पप्पू की मर्दांनगी को ठेस पहुंची थी वो रश्मि के मुँह में मुँह डाल कर अपनी कमर को घचा घच घचा घच आगे पीछे करते हुए रश्मि को चोदता चला जाता है। रश्मी, अपनी चूत की आग में जलती हुई ससुराल से मायके आई थी इस उम्मीद में की वो अपने प्यारे देवा से दिन रात कमर उछाल उछाल के छुदवाएंगी मगर यहाँ आकर उसे पता चला की देवा गांव गया है। उस दिन से वो तड़प रही थी आज अपने भाई के लंड में वो खो जाना चाहती थी । अपना रस कस अपना सब कुछ बहा देना चाहती थी मगर ऐसा नहीं होता जिस गाण्ड को लंड की आदत लगी हो उसके लंड में औरत की चूत को शांत करने की ताकत नहीं रहती और पप्पु अपनी बहन की चूत में पानी छोडता हुआ हाँफने लगता है। रश्मी, तिलमिला जाती है। वो पप्पू के नीचे से निकल जाती है और खड़ी होकर अपने कपडे पहनने लगती है। कुत्ते कमिने देवा से गाण्ड मरवा के भी तुझ में ताकत नहीं आई। हरामी कही का। आगे से मुझे हाथ भी लगाने का सोचा न तो जान से मार दुंगी। वो पैर पटकते हुए वहां से चली जाती है। और पप्पू अपने मुरझाये हुए लंड को देख सोच में पड़ जाता है की नूतन का क्या होगा।
उधर गांव में देवा कोमल के घर में अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था। मगर उसे नींद नहीं आ रही थी।आगे रूम से उसे कोमल और उसके पति की आवाज़ें उसे सोने नहीं दे रही थी। दरवज़ा पूरी तरह बंद नहीं था। देवा उठके दरवाज़े के पास चला जाता है। अंदर कोमल पूरी तरह नंगी होकर अपने पति के लंड पर सवारी कर रही थी। कोमल का चेहरा दरवाज़े की तरफ था और वो आवाज़ें निकाल निकाल के सटा सट अपने पति के लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी। देवा, कोमल के बदन का तो दिवाना उसी दिन हो गया था जिस दिन उसने पहली बार उसे देखा था। कोमल, अपना सर उठा कर दरवाज़े की तरफ देखती है। उसे जैसे कोई फ़र्क़ नहीं पडा की उसके सामने देवा खड़ा था। बल्कि वो और चीखने लगती है। कोमल, आहह मारो जी धक्के तुम्हारे लंड में अब वो बात नहीं रही जो मुझे मुता दे आह्ह्ह। कोमल का पति , साली छिनाल तू भी पहले वाली कोमल कहा रही तुझे तो हर दिन लंड चाहिए। खेत में काम करू या तुझे चोदता रहूँ। कोमल, उन्हह उन्हह आह्ह्ह्ह। बातें बनाओ बस तुम तो। छोटे छोटे लौंडे तुमसे अच्छा चोद लेते है। कोमल का पति शायद और नहीं रोक पाता और वो कोमल की चूत के अंदर ही पानी निकाल देता है वो पानी रिसता हुआ कोमल की झांटो पर से बहता हुआ नीचे गिरने लगता है। कोमल उस पानी को अपने हाथ पर लेती है और देवा की ऑखों में ऑखें डाल के अपनी गीली उंगलिया अपने मुँह में लेकर चुसने लगती है । वो इस तरह से अपने पति के पानी को चाट रही थी जैसे किसी का लंड चूस रही हो। देवा, वहां से आकर अपने बिस्तर पर लेट जाता है। उसका लंड तन चूका था उसे भी कोमल नज़र आ रही थी। उसकी ऑखों में जैसे खून उतर आया था। कोमल का अपनी कमर उछाल उछाल के चुदवाना साफ़ बता रहा था की वो क्या चाहती है मगर देवा नए रिश्तेदारी के कारण चुप था। वो अपनी सोच में गुम था की कोई उसे रूम में अंदर आता हुआ दिखाई देता है। वो उसकी तरफ देखने लगता है जब वो उसके क़रीब पहुँचती है तो देवा हैरान रह जाता है। जीस हालत में कोमल अंदर अपने पति से चुदवा रही थी वो उसी हालत में अब देवा के सामने खड़ी थी। बिलकुल नंगी। देवा, उसे देखने लगता है। कोमल उसके पास बैठ जाती है और अपना हाथ देवा के लंड पर रख के उसे कस के पकड़ लेती है।

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