Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 67

रुक्मणी, ठीक है। बिंदिया , अपने ख्यालों में गूम सी हो गई थी विक्रांत को देख कर। वो बाहर निकल कर फिर से गेस्ट रूम की खिडके के पास आकर खड़ी हो जाती है और दोनों की बातें सुनने लगती है। हिम्मत, क्या बात है विक्रांत। बिंदिया को देख तुम्हारी सिट्टी पिट्टी क्यों गूम हो गई। विक्रान्त, ऐसी बात नहीं है साहब। पहले ये बताओ वो आपकी लगती कौन है। हिम्मत, छिनाल है मेरी ….हा हा. उसकी बात सुनकर विक्रांत भी हंसने लगता है। विक्रान्त, मुझे पता है वो धंधे वाली है। बहुत बार उसकी लेने की लिए कोशिश कर चुका हूँ। मगर साली हाथ भी नहीं घुमाने देती। तीखि मिर्ची है सेठ। आपके हाथ कैसे चढ़ गई। हिम्मत, छिनाल है और तुझे तो पता है हम जागीरदारो को ऐसी ही रंडियां रास आती है।। पहले उसके गांव जाकर चोदता था उसकी। इस बार सोचा यही हवेली ले आऊँ। रोज़ मेरा बिस्तर गरम करती है साली। विक्रान्त, इससे पहले कुछ बोलता उसके दिल की बात समझ कर हिम्मत ही बोल पडता है। जानता हूँ तू क्या सोच रहा है। अब तू मेरा इतना फायदा करने वाला है तुझे नाराज़ नहीं होने दूँगा। विक्रान्त रात में अभी तू आराम कर और वैसे भी जिस काम से तुझे यहाँ बुलाया है मैंने वो अभी कुछ दिन नहीं हो सकता। विक्रांत’, क्यूं। हिम्मत, वो गांडु यहाँ नहीं है गांव में। ले जाम ले। हिम्मत, विक्रांत की तरफ शराब का जाम बढाता है। शराब की चुसकी लेते हुए। अभी मै यहाँ आ रहा था। मुझे एक लौंडिया दिखाई दी ज़्यादा से ज़्यादा 19 साल की होगी। बड़ा नमक है लौंडिया के बदन में दिल मचल गया साली को देख के। हिम्मत, कहाँ दिखी तुझे। विक्रान्त, यह जहाँ से हवेली की तरफ मुडते है ना वहीँ। जो घर में गाये भैंस बँधे हुए हैं वहाँ। हिम्मत, वो शालु की लड़की। हाँ माल तो बड़ा नमकीन है। साले आते ही शुरू हो गया पहले मेरा काम कर दे उसके बाद जिस पर ऊँगली रखेंगा वो तेरे हवाले कर दूंगा।
विक्रान्त, ये हुई न बात। और दोनों हँस हँस के शराब पीने लगते है। बाहर ख़ड़ी बिंदिया को कुछ कुछ समझ आता है और कुछ नही। उधर देवा का सुबह से बुरा हाल था वो अपनी मामी देवकी के घर में लेटा हुआ था उसके दिमाग में प्रिया की आवाज़ घूम रही थी। वो परेशान हो गया था ये सोच सोच कर की अगर प्रिया ने ये रिश्ता नहीं होने दिया तो वो माँ को क्या जवाब देगा। और सारे गांव वाले थू थू करेंगे ये सुनकर की जहाँ रिश्ता होने वाला था वहीँ मै ये सब कर चूका हूँ। ओ उठ कर चारपाई पर बैठ जाता है। देवकी, क्या बात है रे मुए जब से आया है ठीक से न बात कर रहा न हँस बोल रहा है आखिर बात क्या है बोलेंगा भी। देवा, नहीं मामी कोई बात नहीं वहां रामु और कौशल्या भी बैठे हुए थे। ऐसे में अपने दिल की बात देवकी को बताना देवा को ठीक नहीं लगा। सुबह से शाम हो गई थी मगर सामने वाले घर से न तो कोमल आई थी और न कोई देवा को खाना खाने बुलाने आया था। प्रिया ने कोमल को भी खूब खरी खोटी सुनाई थी जिसकी वजह से कोमल भी डरी हुई थी।। प्रिया ने साफ़ साफ़ कोमल से कही थी की अगर देवा यहाँ आयेंगा तो वो बापू और हरी को सब कुछ बता देगी। थोड़ी देर गुज़री थी की कोमल देवकी के घर में चली आती है उसे देख देवा खड़ा हो जाता है। कोमल, अरे देवा तू घर क्यों नहीं आया । चल मैंने तेरे लिए हल्वा पूरी बनाया है चल। देवकी, कोमल यहाँ खा लेगा वो…. रहने दो आज का दिन। कोमल, नहीं मैंने और प्रिया ने इतनी मेहनत करके खाना तैयार की है ऐसे कैसे। चल देवा.. और देवा को मजबूरन कोमल के साथ उसके घर जाना पडता है वो कोमल के पीछे पीछे चलने लगता है।। कोमल, देवा को घर में लेकर दरवाज़ा बंद कर देती है। मुझे बहुत डर लग रहा है देवा। देवा, क्यूँ क्या हुआ। कोमल, चल तू बताती हूँ। वो देवा का हाथ पकड़ के उसे प्रिया के रूम में ले जाती है। ये देख क्या हो गया है इसे…..
प्रिया, बिस्तर पर पड़ी हुई थी उसके ऊपर तीन चार रजाई थी और वो थर थर काँप रही थी और बड़बड़ा भी रही थी की माँ तुमने ये अच्छा नहीं किया। माँ तुमने ये अच्छा नहीं किया।। देवा, उसके पास आकर बैठ जाता है और अपना हाथ उसकी पेशानी पर रख के देखता है ।।प्रिया का जिस्म भट्टी की तरह तप रहा था। देवा, इसे तो तेज़ बुखार है। कोमल, पता है मुझे ठण्ड लग गई है इसे । किसी को बुला भी नहीं सकती थी ये बड़बड़ा जो रही है। पता नहीं क्या होने वाला है मुझे बहुत घबड़ाहट हो रही है । देवा कुछ कर कुछ कर देवा।। देवा, इसके बापू कहाँ है। कोमल, वो अपनी बहन के यहाँ गए है दो दिन बाद आयेंगे उनकी बहन की तबियत ख़राब है ।। देवा रूम की सारी खिड़किया बंद कर देता है और रूम में की रौशनी भी बंद कर देता है बस एक जीरो का लाइट जल रहा था। कोमल, क्या कर रहा है बेटा। देवा, अपने कपडे उतार। कोमल, क्या। पागल हो गये हो क्या। मेरी प्रिया इस हाल में है और तुम हो की मुझे कपडे उतारने के लिए कह रहे हो। देवा, इसी के लिए कह रहा हूँ अपने कपडे उतारो और इसे अपने जिस्म के गर्मी दो ये ठीक हो जाएगी।। कोमल, सच। देवा, हाँ जल्दी करो। कोमल जल्दी से अपनी साडी लंहगा ब्लाउज और पेंटी निकाल के प्रिया की रज़ाई में घुस जाती है। प्रिया का बदन थर थर काँप रहा था । कोमल प्रिया को अपनी बाहों में जकड लेती है । प्रिया भी अपनी माँ के गरम बदन से चिपक जाती है। देवा भी अपने कपडे उतार कर प्रिया के पास चला आता है और रज़ाई सर से पांव तक ले लेता है। कोमल, ये क्या कर रहे हो देवा। देवा, चुप कर और इसके कपडे निकाल। वरना ये ठण्ड से मर जाएगी। प्रिया उस वक़्त इतने होश में नहीं थी की कुछ कह सके। कोमल प्रिया की शलवार कमीज ब्रा और पेंटी निकाल देती है। देवा, प्रिया को बीच में लिटा देता है प्रिया की गांड की तरफ से कोमल लेट जाती है और चुत की तरफ से देवा उसे करवट लिटा कर दोनों आगे पीछे से उसे अपने बीच में दबा लेते है।
प्रिया, माँ मुझे बहुत ठण्ड लग रहे है। कोमल, हाँ प्रिया कुछ नहीं होंगा तुझे। कोमल, पीछे से अपनी चूत प्रिया के चूतड पर घीसने लगती है। और सामने से देवा भी प्रिया को अपने चौड़े छाती से चिपका कर उसे अपने जिस्म की गर्मी देने लगता है। 15 मिनट गुज़रने के बाद प्रिया की कंपकंपाहट बंद हो जाती है। और वो उन्हह सिसकारने लगती है। देवा का लंड प्रिया की कुँवारी चूत से टकराने से खडा हो चूका था और वो अब सीधा प्रिया की चूत पर घिस रहा था जिस की वजह से प्रिया के मुँह से हलकी हलकी सिसकारियां निकल रही थी। पीछे लेटी हुए कोमल भी जान चुकी थी अपनी बेटी प्रिया के सिसकारीयों की वजह। कोमल, क्या हुआ देवा। देवा, इसे मुँह से गर्मी देना पडेगी कोमल। कोमल, अपना हाथ प्रिया की कमर से नीचे ले जाते हुए सीधा प्रिया की चूत पर रख के हलके से उसकी चूत को दबाती है। प्रिया, ओह्ह्ह्ह्ह। कोमल, लगा दे। देवा भी कोमल के बात समझ कर एक हाथ प्रिया के ब्रैस्ट पर रख के उससे मसलते हुए अपने होठो को प्रिया के होठो से लगा देता है और उसके मुँह में अपनी ज़ुबान डाल कर चुसने लगता है। नीचे से कोमल प्रिया की चूत के दाने को मसलने लगती है जिसकी वजह से प्रिया का जिस्म थरथराने लगता है। मगर इस बार सर्दि की वजह से नहीं बल्कि चूत की गर्मी की वजह से। वो ऑखें फाड़े देवा को देखने लगती है। वो पूरी तरह जग चुकी थी मगर फिर भी वो देवा को धक्का नहीं देती। इसी तरह अपनी माँ और देवा के नंगे जिस्मों के बीच में फँसी प्रिया को भी इस सब में बहुत मजा आ रहा था। देवा, अपने हाथ से प्रिया के नरम ब्रैस्ट को मसलते जाता है और कोमल अपनी ही सगी बेटी की चूत को सहलाती जाती है। प्रिया, माँ तुम ये क्या कर रही हो शर्म करो माँ। मै बापू से उन्हह….. कोमल, अपनी एक ऊंगली प्रिया के चूत में घुसा देती है। प्रिया बोलते बोलते चुप हो जाती है।

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