Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 69

विक्रान्त, अपुन को एक बार जो चीज़ पसंद आ जाती है वो मुझे चाहिए मतलब चाहिए और अगर वो मुझे नही मिली ना(वो अपनी बन्दूक निकाल के हिम्मत को दिखाता है)समझो वो गया क्या गया समझो वो। हिम्मत, अरे साले इसे नीचे रख कहीं चल गई तो। विक्रान्त, एक ज़हरीली हँसी हँसते हुए। अभी नहीं चलेगी सेठ अभी वक़्त है। हिम्मत, क्या मतलब। विक्रान्त, मतलब ये की तुमने तो कहा था की रात में बिंदिया के साथ मुलाकात करवाएगा और अब खुद पी कर सोने की तैयारी कर रहे हो। हिम्मत, अरे हाँ देख साला मै भी न नशे में कुछ याद ही नहीं रहता चल तू मेरे साथ। वो विक्रांत के सहारे से लडख़ड़ाता हुआ बिंदिया के पास आ जाता है। बिंदिया, पलंग पर साडी पहने लेटी हुई थी। हिम्मत और विक्रांत को एक साथ देख वो समझ जाती है की क़यामत आने वाली है। वो अपना पल्लू ठीक करते हुए पलंग पर बैठ जाती है। हिम्मत, ए बिंदिया वहां क्या बैठी है यहाँ आ मेरे पास। बिंदिया , विक्रांत को देखते हुए हिम्मत के पास चली आती है। चलिये आपने बहुत पी ली है। और तुम बाहर जाओ इन्हें मै सुला दूँगी। विक्रान्त, बिंदिया की कमर पर हाथ फेरते हुए बहुत सती सावित्री बन रही है साली रंडी कहीं की। मुझे भी सुला दे कभी अपने साथ। बिंदिया , ज़बान सँभाल के बात कर। हिम्मत, चुप साली …..सही कह रहा है वो। जा खुश कर दे मेरे दोस्त को। हिम्मत धक्का देकर बिंदिया को विक्रांत के पास धकेल देता है। उस वक़्त बिंदिया को अंदाज़ा होता है की हिम्मत उसे क्या समझता है। वो बेवकूफ हवेली की मालकिन बनने के सपने देख रही थी मगर हक़ीकत में हिम्मत उसे सिर्फ रात गुजारने के लिए यहाँ लाया था। बिंदिया , क्या कहा तुमने। तुमने मुझे समझ क्या रखा है। इस के साथ सो जा उसके साथ वो कर ले। मै भी एक औरत हूँ।
हिम्मत के दिमाग की नस गरम हो जाती है और वो एक ज़ोरदार थप्पड बिंदिया के मुँह पर जड़ देता है। और बिंदिया चक्कर खाकर बिस्तर पर जा गिरती है। हिम्मत, साली रंडी है। रंडी बनकर रह मेरे सर पर मत नाच। देख मत विक्रांत चोद डाल साली को बहुत बातें करने लग गई है ये छिनाल आज कल। इसे इसकी असलियत बतानी ही पडेगी।। विक्रान्त, आगे बढ़ता है और बिंदिया के बाल पकड़ के उसे खीचता है मगर बिंदिया हिम्मत की बातें सुनकर तिलमिला गई थी। वो विक्रांत को धक्का देकर पीछे की तरफ ढ़केलती है। बिंदिया , अपने हाथ दूर रख मुझसे कमीने। विक्रान्त से रहा नहीं जाता। साली मुझे गाली देती है। मुझे…. वो अपनी पिस्तोल निकाल के बिंदिया के मुँह में डाल देता है। अपने मुँह में पिस्तोल के घुसते ही बिंदिया के जैसे होश उड़ जाते है। आंखेँ फटी की फटी रह जाती है उसे विक्रांत के बारे में पता था की वो बहुत ग़ुस्से वाला इंसान है। बिंदिया थोडी सँभल जाती है। विक्रान्त, साली 6 की 6 अभी उतार दूंगा अभी के अभी अब चिल्ला। चिल्ला अब….. विक्रान्त की आवाज़ सुनकर रानी और रुक्मणी भागते हुए बिंदिया के रूम के पास चली आती है। हीम्मत, अपने कपडे निकाल देता है और बिंदिया के पास चला आता है। हिम्मत को देख विक्रांत भी अपनी पेंट खोल के नीचे गिरा देता है। विक्रान्त, बिंदिया के मुँह से पिस्तोल निकाल लेता है। साली अगर आईन्दा मेरे सामने ऊँची आवाज़ में बात की न तो याद रख काम ख़तम करने में देरी नहीं करुँगा मैं। हिम्मत, अब देख क्या रही है रंडी। मुँह खोल और चाट हमारा लंड। दोनो एक दूसरे को देख हंसने लगते है और बिंदिया अपने हाथों में हिम्मत और विक्रांत का लंड पकड़ लेती है। खिड़की की आड़ में खड़ी रानी और उसके पीछे खड़ी रुक्मणी विक्रांत और हिम्मत को देख सहम गई थी मगर बिंदिया को देख उन्हें तरस नहीं आ रहा था। रानी, चलो माँ। रुक्मणी, उसका हाथ पकड़ के अपने से चिपका लेती है और धीमी आवाज़ में कहती है। रुक थोडी देर।। बिंदिया एक एक करके हिम्मत और विक्रांत के लंड को चुसने लगती है।
विक्रान्त, काफी दिनों से बिंदिया पर नज़र गडा कर बैठा हुआ था और आज उसकी दिल की मुराद पूरी हो रही थी। मगर उसकी नज़रों के सामने उस वक़्त बिंदिया नहीं बल्कि उसे तो नीलम नज़र आ रही थी। नीलम का वही भोला चेहरा जिसे देख विक्रांत अपना दिल हार बैठा था। विक्रान्त, बिंदिया को नंगी कर देता है और उसे अपने लंड पर झुका देता है । पीछे से हिम्मत अपनी दो उंगलिया बिंदिया की चूत में घूस्सा कर अंदर बाहर करने लगता है। अब तक ग़ुस्से में बैठी बिंदिया इस हमले से सिहर उठती है और उसके अंदर की औरत जाग जाती है। बिंदिया , आहह हरामी आहह मै तुझे छोड़ूँगी नहीं आहह। विक्रान्त, साली छोड़ूँगा तो मै तुझे नहीं बहुत नाटक करती है ना तू । आज देख कैसे तेरी चूत सुजा न दूँ तो मेरा नाम भी विक्रांत नही। हिम्मत का लंड भी तन चूका था वो नीचे लेट जाता है और बिंदिया को अपने ऊपर खीच कर अपने लंड पर बैठा देता है। बिंदिया, आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। हिम्मत, अपने लंड को बिंदिया की चूत पर लगा कर अंदर पेल देता है एक चीख़ के साथ बिंदिया हिम्मत से चिपक जाती है और हिम्मत नीचे से अपने लंड को बिंदिया की चूत में आगे पीछे करने लगता है।। थोड़ी ही देर गुज़री थी की बिंदिया पर पीछे से दुसरा ज़ोरदार हमला होता है और वो विक्रांत करता है सटा सट सटा सट वो बिंदिया के चूतडो पर थप्पड़ों की बरसात करने लगता है नीचे से हिम्मत के धक्के और ऊपर से विक्रांत का मरदाना हाथ चूतड़ पर पडने से बिंदिया रोने लगती है मगर उस वक़्त दोनों को उस बेचारी पर कोई तरस नहीं आता वो बेरहम इंसान उसकी चूतड़ को लाल कर देता है।। और अपने लंड पर थूक लगा कर उसे बिंदिया के गाण्ड की सुराख़ पर रगडते हुए अंदर की तरफ ड़ालने लगता है। बिंदिया, नही आहह मेरी आहह मै मर जाऊँगी आहह। विक्रान्त, मर जा साली रंडी।तेरे रेहने न रहने से मुझे कोई फर्क नहीं पडता आहह। विक्रान्त, का विराट लंड बिंदिया की गाण्ड के सुराख़ को चीरता हुआ अंदर और अंदर चला जाता है। अपने दोनों सुराखों में लंड महसूस करके बिंदिया के ऑंसू भी रुक जाते हैं और वो सिसक सिसक के रोने लगती है । हर धक्का जानलेवा था बिंदिया को साँस लेने भर की मोहलत नहीं मिलती। जहाँ हिम्मत नशे में बिंदिया को किसी कुतिया की तरह चोद रहा था वहीँ विक्रांत अपने थप्पड का जवाब दे रहा था जो कई साल पहले बिंदिया ने विक्रांत को मारी थी।विक्रांत और हिम्मत बिंदिया को किसी गली की कुतिया समझकर चोद रहे थे। उसकी गांड और चूत एक ही समय में दर्द कर रही थी।विक्रांत गांड मारने के साथ साथ बिंदिया की चूचियों पर भी थप्पड़ मार रहा था।थप्पड़ से बिंदिया की गांड तो पहले ही लाल कर दिया था।बिंदिया को आज अपनी औकात पता चल गई थी।
दोनो अपना अपना ग़ुस्सा बिंदिया पर निकालने रहते है और बाहर खड़ी रानी और रुक्मणी की जवान चुत में आग भड़क उठती है । ये देख कर की एक औरत दो मरदों के बीच में कैसे दबी हुए चुद रही है। रुक्मणी, रानी का हाथ पकड़ के उसे अपने रूम में ले जाती है और देखते ही देखते दोनों माँ बेटी पल भर में नंगी हो जाती है। रानी, माँ बापु उस बेचारी के साथ ऐसा कैसे कर सकते है रुक्मणी, रानी के होठो को चुमते हुए उसके निप्पल्स को मरोडते हुए। बिटिया मरद होते ही ऐसे हैं बेरहम । काश कोई मुझ पर भी ऐसे तरस न खाये आह्ह्ह्ह रानी, अपने दो उंगलिया रुक्मणी की चूत में डाल देती है और दोनों एक दूसरे को चुमते हुए बिस्तर पर गिर जाती है। रात के 2 बजे तक हिम्मत और विक्रांत बिंदिया को अलग अलग तरह से चोदते हुए हलकान कर देते है।। तब जाकर उन तीनो की आँख लगती है । उधर गांव में प्रिया के चूत जग जाती है। जब से देवा ने उसकी ऑंखों के सामने उसकी माँ को चोदा था तबसे उसकी ऑंखों से जैसे नींद गायब हो गई थी । वो काफी देर से करवट बदल रही थी मगर नींद उसकी ऑंखों से नदारद थी।। आखीरकार वो कुछ सोचते हुए देवा के पास चली जाती है। देवा, गहरी नींद में सोया था। प्रिया , उसके पास जाकर बैठ जाती है और उसके लंड पर से कंबल हटा देती है।। देवा, नंगा ही सोया हुआ था। प्रिया, कुछ देर तक देवा के लंड को देखती रहती है और फिर मुस्कुराते हुए उसे अपने हाथ में पकड़ लेती है। पहली बार किसी मरद के डण्डे को उसने अपने हाथों में लेकर हिलाई थी । उसका तन बदन काँपने लगता है। एक जवान मरद उसके सामने नंगा सोया हुआ था। वही आदमी जो थोडी देर पहले उसकी माँ को उसकी ऑंखों के सामने चोद चूका था।। प्रिया, जवान थी कुँवारी थी वो अपने आप को रोक नहीं पाती और झुक कर देवा के लंड को अपने मुँह में ले लेती है गलप्प गलप्प। अपने लंड पर दबाव महसूस करके देवा जग जाता है देवा, प्रिया तुम यहाँ।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *