Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 73

देवा के दिल की कलि कलि खिलने लगती है । अपने खवाबों को जब इंसान पूरा होते देखता है तो हर किसी का यही हाल होता है। जो उस वक़्त देवा का हो रहा था। ममता , क्या बात है भैया बड़े खुश लग रहे हो। देवा, खुश होने जा रहा था की बिल्ली आ गई। ममता , बिल्ली कहाँ है बिल्ली। देवा, ममता का हाथ पकड़ के उसे अपने पास बैठा देता है और धीरे से उसके कान में कुछ खुसूर पुसुर करता है जिसे सुनकर ममता पहले चौंकती है और फिर उसके होठो पर मुस्कान फ़ैलती चली जाती है। देवा, सुन आज देवकी मामी और तेरे ससुराल वाले आने वाले है। मेरे लिए ज़रा गरम पानी रख दे जिस्म बहुत दुःख रहा है थोडा गरम पानी से नहा लुँगा तो मेरा दर्द भी दूर हो जायेगा और अंग भी साफ हो जायेगा। ममता , इतराते हुए। हाँ हाँ क्यों नहीं। आज तो मेरे भैया को मै अपने हाथों से नहलाऊँगी। देवा, सच्ची। ममता, मुच्ची। देवा, लुच्ची। ममता , क्या कहा मुझे लुच्ची। अभी बताती हूँ वो देवा की छाती पर मुक्कों की बरसात कर देती है और देवा हँसता हुआ अपनी बहन ममता को अपने बाहों में समेट लेता है। इस झडप में ममता देवा के नीचे आ जाती है और देवा का भारी जिस्म ममता का नरम मख़मली जिस्म पर टीक जाता है। ममता, आहह सच कहूं तो मुझे आपकी बहुत याद आएँगी शादी के बाद। देवा, मुझे भी बहुत आयेगी। ममता , झूठे कहीं के मेरे जाने के बाद तुम्हारी तो चाँदी होने वाली है। देवा, वो कैसे ममता, वो ऐसे की मै जाऊँगी और नूतन वहां से आएगी और जब नूतन आएगी तो मुझे अच्छी तरह पता है की पप्पू भैया में वो बात कहाँ जो मेरे सैयां में है । देवा, तुझे ये सब कैसे पता। ममता , लो कर लो बात मेरी भी ऑंखें है भइया। सब पता है मुझे। देवा, मुस्कुराते हुए अच्छा सब पता है। ज़रा मुझे भी बता दे अपने इन रसीले होठो से। वो ममता के होंठो पर झुकता है और उन्हें अपने होठो से लगा कर चूसने लगता है गलप्प गलप्प गलप्प्प गप्पप्प।
ममता , अपने देवा की बाहों में पागल सी हो जाती थी। जब भी देवा उसे अपनी बाँहों में समेट कर चुमता था। ममता को दुनिया की कोई परवाह नहीं होती थी। ममता भी अपने दोनों हाथों को अपने भाई के गले में डाल कर उसे अपने मोटे मोटे सन्तरे दबवाते हुए चुमती चली जाती है। दोनो की साँसें फुलने लगती है । ऑंखों में नशा सा छाने लगता है। ममता , बस भाई मुझे कुछ हो रहा है आह्ह्ह्ह। माँ आ जाएँगी ना। देवा, आने दे। ममता, उन्हह बहुत ज़िद्दी हो आप आहह। धीरे से ना दर्द होता है मुझे आह्ह्ह्ह। देवा, साली तेरे इतने बड़े कैसे हो गए हैं। ममता , आप ने ही किये है ना। देवा, कैसे मेरी जान। ममता, आपको पता है ना। देवा अपने मज़बूत पंजों में उस नाज़ुक सी चिडिया को दबोच लेता है और उसके ब्रैस्ट को इतनी ताकत से मसलता है की ममता का मुँह खुला का खुला रह जाता है। ममता, मुझे चोदने से बड़े हो गए हैं देवा भइया। रत्ना, दरवाज़े के पीछे से खंखारती है। जिसकी वजह से ममता देवा अलग हो जाते है। थोड़ी देर बाद रत्ना अंदर आती है। रत्ना, देवा तुम तैयार हो जाओ । मेहमान आने वाले होंगे। देवा, ठीक है मै पहले नहा लेता हूँ। रत्ना, ठीक है। मै शालु से मिलकर आती हूँ। रत्ना के जाने के बाद देवा भी नहाने के लिए बाथरूम में चल जाता है और थोडी देर बाद ममता भी हाथ में बालटी लिए वहां आ जाती है जिस में गरम पानी था। ममता , भइया तुम यहाँ बैठ जाओ आज मै तुम्हें नहलाऊँगी। देवा, ये तो बड़े अच्छी बात है। वो अपने कपडे निकाल कर सिर्फ अंडरवियर में नीचे बैठ जाता है। ममता, देवा के सर पर पानी डालकर साबुन लगाते हुए सोचने लगती है। देवा, खड़ा होजाता है और बाल्टी में से पानी लेकर उसे ममता के जिस्म पर डाल देता है जिस की वजह से ममता के कपडे भी भीग जाते है। ममता , क्या कर रहे हो भाई। मुझे क्यों नहला रहे हो। देवा, ममता को अपनी बाहों में भर कर उसकी चूत को सलवार के ऊपर से सहलाने लगता है। एक हफ्ता हो गया तूने मुझे ये नहीं दी बहना। ममता , आपने नहीं लिया आह्ह्ह मैंने कभी मना नहीं की आपको भाई।
देवा, ममता बहुत दिल कर रहा है तुझे नंगी करके चोदने का। ममता , चोदीये न भैया।आपकी ही हूँ मै हमेशा हमेशा आह्ह्ह। देवा, ममता के भिगे हुए कपडे निकाल देता है और उसे भी पूरी नंगी कर देता है। ममता की ऑंखों में हवस की लाली बिखर जाती है और वो अपने नरम हाथों में देवा का लंड थाम लेती है। हाथो में देवा का लंड आते ही देवा के लंड में जैसे सरसराहट सी होने लगती है पिछले एक हफ्ते से ये भूखा शेर बिना शिकार के जी रहा था । आज हिरण खुद चल कर सामने से उसके पास आ गई थी भला ऐसा मौका वो कैसे जाने देता। और देवा जानता भी था की ममता इस घर में कुछ दिन की मेहमान है और ये बचे हुए कुछ दिन वो ममता की ज़िन्दगी के सबसे यादगार दिन बना देना चाहता था । एक भाई होने का भला इससे अच्छा फ़र्ज़ और क्या कर सकता था देवा। ममता नीचे बैठ जाती है और देवा के लंड को पहले चुमती है और उसके बाद उसे अपने मुँह में खीच लेती है गलप्प गलप्प गलप्प्प चूसने लगती है। देवा, आहह ममता तेरी माँ को चोदूँ आह्ह्ह्ह्हह। ऐसे मत काट उसे आह्ह्ह्ह। ममता , धीरे धीरे अपनी दाँतो से देवा के लंड को हलके हलके काटने लगती है जिससे देवा को मीठा मीठा दर्द भी होता है और उसके लंड की नसे फुलती चलि जाती है। ममता , मुझे नहीं पता गलप्प गलप्प । मेरा है कुछ भी करूँ गलप्प गलपप। देवा, साली इतनी ज़ोर से करुँगा की याद रखेगी यह। आह्ह्ह अह। ममता , कुछ नहीं कहती और दिल में सोचने लगती है यही तो मै चाहती हूँ भाई की आप मुझे कस कर चोदे । देवा से वो दर्द बर्दाश्त नहीं होता और वो ममता को और ज़ोर का दर्द देने के लिए खड़ा कर देता है और उसकी गाँड पर अपना लंड घीसने लगता है। देवा अपने लंड को ममता की गाण्ड के सुराख़ पर लगा देता है। ममता, आहह भाई वहां नहीं मेरी चूत में डालो पहले। आहह चिंगारियाँ निकल रही है वहां से आह्ह्ह्ह। देवा, अपनी बहन की ये इच्छा भी पूरी कर देता है और अपने लंड पर थूक लगा कर उसे ममता की चूत में धीरे धीरे घुसाता चला जाता है। एक हफ्ते से चूत के दरवाज़े बंद थे और आज इतने दिन बाद देवा ने लंड मारकर वो दरवाजा भी खोल दिया था। जीसकी वजह से ममता की आह निकल जाती है।
ममता , भइया मुझे शादी के बाद भी करेंगे ना भूल तो नहीं जाओंगे न अपनी बहन को माँ। देवा, कैसे भूल सकता हूँ तुझे मै ममता आहह तेरी चूत मुझे बहुत पसंद है और जिसकी सबसे ज़्यादा पसंद है वो मिल जाने के बाद भी इसे चोदना बंद नहीं करुँगा मै आअह्हह्हह्हह। ममता , किसकी चूत आपको मेरी चूत से भी ज़्यादा अच्छी लगती है भइया आह्ह्ह्ह। देवा, माँ की…. मुझे माँ को नंगा करके चोदने का बड़ा मन है ममता। बस माँ मान जाए आह्ह्ह्ह। ममता , माँ कभी नहीं मानेगी आहह । देवा, दिल में सोचने लगता है वो क्या नहीं मानेगी जब उसकी चूत मेरा लंड देखेगी तो खुद ब खुद मान जाएगी। वो अपनी ही दुनिया में खोये हुए एक दूसरे के जिस्मो का मजा ले रहे थे। इस बात से अन्जान की रत्ना बाहर खड़ी सब सुन रही है। और सिर्फ सुन नहीं रही बल्कि देवा के एक एक शब्द का उसके जिस्म पर इतना गहरा असर हो रहा था की उसकी चूत से कतरा कतरा पानी बहकर जांघों को भिगोता हुआ नीचे ज़मीन पर गिर रहा था। रत्ना, देवा नहाना हो गया होगा तो बाहर आ जा। महमान आ गये है। देवा, ये सुनकर अपने लंड को ममता की चूत की गहराइयों में उतारता हुआ सटा सट ममता की कमर को पकडता हुआ उसे चोदने लगता है। देवा के धक्कों से ममता की चूत भी घायल हो जाती है और दोनों एक साथ झरने लगते है। थोड़ी देर बाद जब दोनों बहार आते हैं तो ये देख हैरान रह जाते है की रत्ना अभी तक वहां से गई नहीं थी। रत्ना, ये लो देवा आज तुम ये कपडे पहनना और ममता तू ये पहन ले। मेहमान अभी नहीं आये है मगर थोडी देर में आ जाएंगे। ये कहकर रत्ना वहां से किचन में चलि जाते है और उसके जाने के बाद देवा ममता की तरफ देख मुस्कुरा देता है।
गांव से कोमल और उसका परिवार और देवकी भी अपने पति के साथ देवा के घर आते है। शालु और उनका परिवार भी देवा के घर मेहमान नवाजी में शामिल हो जाता है नुतन और ममता की शादी की तारिख पक्की होने वाली थी। सभी लोग बहुत खुश थे। जहाँ एक तरफ नूतन अपने देवा की बाहों में आने को बेक़रार थी वही कोमल भी खुश थी देवा उसके घर आता रहेगा। पंडित जी 15 दिन बाद का मुहूर्त निकालते है और सभी ये बात सुनकर एक दूसरे का मुँह मीठा कराते है। रत्ना, देवकी को इस बात के लिए मना लेती है की नूतन और ममता की शादी एक मंडप में होगी और देवकी को अपने परिवार के साथ यहाँ आना होगा। ताकी ममता को यहाँ से विदा करके अपना आशिरवाद दे सके। देवा के लिए ख़ुशी की बात भी थी और चिंता की भी उसे बहुत सी तैयारियाँ करनी थी और वो उस दिन के बाद से अपनी बहन की शादी की तैयारियों में इतना मगन हो जाता है की खाने पीने की भी उसे परवाह नहीं रहती। दिन तो शादी की तैयारियों में बीत जाता है लेकिन हर रात देवा की सुहागरात होती है।वह ममता को हर पोजीशन में चोदता है और रत्ना उनकी चुदाई देखकर अपनी गरम चूत रगड़ती है। देवा अच्छी से अच्छी शादी करने की इच्छा में वो हर छोटा बड़ा काम पूरी ईमनदारी और मेहनत से अंजाम देता है और देखते ही देखते वो 15 बिन भी गुज़र जाते है और वो शुभ दिन भी आ जाता है जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था।

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