Deva Ki Raasleela (Indian sex stories)-Part 75

नूतन, किसी तरह अपने मुँह पर हाथ रख कर अपनी आवाज़ को दबाने की कोशिश करने लगती है और देवा अपनी ज़ुबान को नूतन की चूत के अंदर तक घुसा कर चाटने लगता है गलप्प गलप्प गलपप…. नुतन, जल्दी करो भैया कोई आ जायेगा। देवा, नूतन को लिटा देता है और उस सुहागरात के लिए सजे बिस्तर पर जहाँ पप्पू को होना चाहिए था । वहाँ देवा नूतन की दोनों टाँगें खोल देता है और अपने लंड को नूतन की चूत की गहराइयों में उतार देता है। एक बार फिर से नूतन को अपना वो दिन याद आ जाता है जब देवा ने उसकी चूत का असली उद्घघाटन किया था। उधर दूसरे रूम में पप्पू अपनी माँ शालु की चूत को चाटने लगता है। गलप्प गलपप गलप्प्प गलप्प्प। शालु, आजा मेरे लाल अंदर आ जा उन्हह। अपनी माँ के साथ कर ले पहले सुहागरात आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। बस भी कर ना आह्ह्ह्ह। पप्पू, अपनी माँ शालु के पैरों के बीच आ जाता है और अपने लंड को शालु की चूत पर घीसने लगता है। शालु, नीचे से कमर को ऊपर उठाती है और लंड उसकी गीली चूत में सरक जाता है। उधर नूतन भी अपनी कमर को ऊपर उठाते हुए देवा के लंड को अपनी चूत की गहराइयों में उतारने लगती है। नुतन , आहह जल्दी से मेरी चूत में अपना पानी निकाल दो देवा भइया आह्ह्ह्ह्ह। मुझे आज की रात ही तुम गर्भवती बना दो आहह चोदो अपनी बहन को उसकी सुहागरात में आहह। चौद मेरे सैया।
देवा, नूतन की चूत में झटके मार रहा था और नूतन अपने पिया के लंड की ताप सह रही थी मगर वो इतनी ज्यादा उतेजित थी के ज़्यादा देर टीक नहीं पाती और अपने देवा को अपनी बाहों में कस लेती है। नुतन , आहह मर गयी भइया। मेरी चूत आहह बस भी करो उन्हहह। रुक जाओ ना कोई आ जायेगा ना आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। उन्हें बाहर से कुछ शोर सुनाई देता है। नुतन, झट से अपने हाथ से देवा का लंड पकड़ के अपनी चूत से बाहर निकाल देती है और खड़ी होकर कपडे पहनने लगती है। देवा, का दिमाग घूम जाता है जब वो अपने पूरे जोश में था और अपने सुहागरात का मजा ले रहा था ठीक उसी वक़्त नूतन ने उसके लंड को बाहर खीच ली थी। देवा, साली छिनाल क्या कर रही है नुतन, जाओ यहाँ से मेरे ससुराल वालों ने देख लिया तो क्या होगा पता भी है। देवा, तेरी माँ की। देवा का लंड फौलाद की तरह खड़ा था। किसी किंग कोबरा की तरह अपने फन को उठाये वो डसने को तैयार था। बाहर से आती आवाज़ देवा को कपडे पहनने पर मजबूर कर देती है और वो अपने कपडे पहनकर पीछे के दरवाज़े से बाहर निकल जाता है। वो अपने लंड को बार बार पायजामे के अंदर दबा रहा था मगर वो था की बैठने का नाम नहीं ले रहा था। उसे नूतन पर ग़ुस्सा भी बहुत आ रहा था। ऐसा बहुत कम हुआ था उसके साथ की किसी ने चूत से उसके लंड को बाहर खीचा हो। मगर वो जनता था की नूतन अभी इस काम में नई है और जब वो शालु के घर को अच्छी तरह से जान जाएगी तब वो भी खुल कर अपनी चूत कुटावायेगी। वो अपने घर की तरफ मुडा ही था की उसे पीछे से शालु आवाज़ देती है। देवा, पलट कर देखता है तो वो शालु को देखता ही रह जाता है। शालु सिर्फ ब्लाउज और पेटिकोट में दरवाज़े के पास खड़ी थी। उसके बाल खुले हुए थे और ऑंखों में शराब सा नशा दूर से चमक रहा था। पप्पू, अपने हरामीपन से बाज़ नहीं आया था। उसने शालु के मुँह में अपना लंड डाल कर उसे खड़ा करके नूतन के पास चला गया था और शालु अपनी चूत मलते रह गई थी। वो पप्पू को गलियां देना चाहती थी मगर उसके सुहागरात होने के कारण वो चुप रह गई थी।

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